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Home कृषि समाचार

उत्तम पैदावार के लिए करें अच्छे बीज का चयन

Select good seeds for maximum yield

Emran Khan by Emran Khan
August 8, 2026
in कृषि समाचार
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बीज उपचार का महत्व

बीज उपचार का महत्व

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लेखक: सुनयना पुनिया एवं मनप्रीत सिंह
                              पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, अबोहर–152116

अच्छी फसल की शुरुआत खेत की तैयारी या खाद डालने से भी पहले, सही बीज के चयन से होती है। बीज कृषि उत्पादन की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत सामग्री है। जब किसान उच्च गुणवत्ता वाले बीज का चयन करता है, तो अच्छी और भरपूर फसल मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्नत किस्म, संतुलित उर्वरक, समय पर सिंचाई और पौध संरक्षण के सभी उपायों का पूरा लाभ तभी मिल सकता है, जब बोया गया बीज शुद्ध, स्वस्थ और अधिक अंकुरण क्षमता वाला हो। खराब गुणवत्ता वाले बीज के उपयोग से उत्पादन में 35–40 प्रतिशत तक की हानि हो सकती है। इसलिए बीज की खरीद और बुवाई को केवल एक सामान्य कृषि कार्य न मानकर फसल उत्पादन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण निर्णय समझना चाहिए।

अच्छे बीज की पहचान

उत्तम बीज की पहली पहचान उसकी आनुवंशिक (Genetic) और प्रजातीय शुद्धता है। इसका अर्थ है कि बीज उसी किस्म का होना चाहिए, जिसके नाम से उसे खरीदा गया है और उस किस्म के विशिष्ट गुण उसमें स्पष्ट रूप से मौजूद होने चाहिए।

बीज की भौतिक शुद्धता भी अच्छी होनी चाहिए। उसमें मिट्टी, कंकड़, खरपतवारों के बीज या किसी दूसरी फसल के बीज मिले हुए नहीं होने चाहिए। साफ और शुद्ध बीज खेत में एक समान पौध संख्या स्थापित करने में सहायता करता है।

बीज का अंकुरण प्रतिशत अधिक होना चाहिए तथा वह रोगों और कीटों से मुक्त और स्वस्थ होना चाहिए। बीज के आकार, रंग और भार को देखकर भी उसकी गुणवत्ता का प्रारंभिक अनुमान लगाया जा सकता है। ये विशेषताएं संबंधित किस्म के अनुरूप होनी चाहिए। बहुत हल्के, सिकुड़े हुए या बदरंग बीज प्रायः कमजोर पौधे देते हैं।

इसके साथ ही बीज में नमी की मात्रा भी उचित सीमा में होना आवश्यक है। सामान्यतः फसल के अनुसार लगभग 10–14 प्रतिशत नमी उपयुक्त मानी जाती है। अधिक नमी वाले बीजों के भंडारण में फफूंद लगने तथा अंकुरण क्षमता घटने की संभावना बढ़ जाती है।

बीज खरीदते समय बरतें सावधानी

किसान को बीज हमेशा प्रमाणित (Certified) और विश्वसनीय संस्थान या अधिकृत विक्रेता से ही खरीदना चाहिए। बीज खरीदते समय पैकेट पर दी गई सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। इनमें फसल और किस्म का नाम, अंकुरण प्रतिशत, शुद्धता, परीक्षण या पैकिंग की तिथि तथा वैधता जैसी जानकारी शामिल होती है।

बीज खरीदने के बाद उसकी स्थिति की एक बार अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए और आवश्यकता होने पर उसकी सफाई भी करनी चाहिए। टूटे, सिकुड़े, अपरिपक्व, रोगग्रस्त तथा कीटों से क्षतिग्रस्त बीजों को अलग कर देना चाहिए, ताकि खेत में केवल स्वस्थ और अच्छी गुणवत्ता वाला बीज ही बोया जाए।

यदि जांच में बीज का अंकुरण प्रतिशत कम पाया जाता है, तो खेत में अपेक्षित पौध संख्या बनाए रखने के लिए अनुशंसित अनुपात में बीज दर बढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, बहुत कमजोर या संदिग्ध बीज को केवल अधिक मात्रा में बोना समझदारी नहीं है। जहां संभव हो, अच्छी अंकुरण क्षमता वाला बीज ही उपयोग करना चाहिए।

बुवाई से पहले फसल के लिए अनुशंसित बीज उपचार अवश्य करना चाहिए। एक बात हमेशा याद रखें—रसायनों से उपचारित बीज का उपयोग न तो खाने के लिए और न ही पशुओं के चारे के रूप में किया जाना चाहिए।

अंकुरण की जांच क्यों जरूरी है?

अंकुरण प्रतिशत यह बताता है कि बोए गए कुल बीजों में से कितने बीज स्वस्थ पौधों के रूप में विकसित होने की क्षमता रखते हैं। यदि अंकुरण कम होगा, तो खेत में पौधों की संख्या भी कम रह जाएगी।

खेत में खाली स्थान बढ़ने से उपलब्ध भूमि, पानी, खाद और धूप का पूरा उपयोग नहीं हो पाएगा। इसका सीधा असर फसल की उत्पादकता पर पड़ सकता है। इसलिए बुवाई से पहले अंकुरण की जांच कर लेने से बीज की गुणवत्ता और आवश्यक बीज दर के बारे में समय रहते निर्णय लिया जा सकता है।

घर पर अंकुरण परीक्षण की सरल विधि

किसान घर पर भी बीज की अंकुरण क्षमता की प्रारंभिक जांच आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए कुछ बीज गिनकर लें और उन्हें गीले कपड़े या ब्लॉटिंग पेपर के बीच समान दूरी पर रख दें। कपड़ा नम रहना चाहिए, लेकिन उसमें पानी भरा हुआ नहीं होना चाहिए।

बीजों को उचित नमी के साथ सुरक्षित स्थान पर लगभग 30–40 घंटे तक रखें। इसके बाद अंकुरित हुए बीजों की संख्या गिनें और अंकुरण प्रतिशत की गणना करें।

अंकुरण प्रतिशत = (अंकुरित बीजों की संख्या ÷ कुल बीजों की संख्या) × 100

उदाहरण के लिए, यदि रखे गए 100 बीजों में से 85 बीज अंकुरित होते हैं, तो अंकुरण प्रतिशत 85 प्रतिशत होगा।

अलग-अलग फसलों के बीजों को अंकुरित होने में अलग-अलग समय लग सकता है। इसलिए 30–40 घंटे बाद प्रारंभिक स्थिति देखने के साथ आवश्यकतानुसार कुछ समय और निरीक्षण जारी रखा जा सकता है।

बीजों का अंकुरण कम क्यों होता है?

अच्छी गुणवत्ता वाले बीज होने के बावजूद यदि खेत की परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं, तो अंकुरण प्रभावित हो सकता है। मिट्टी में पर्याप्त नमी न होने पर बीज फूल नहीं पाता और अंकुर बाहर नहीं निकलता।

इसी तरह, बहुत अधिक गहराई पर बुवाई करने से नन्हे अंकुर को मिट्टी की सतह तक पहुंचने में अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। इसके कारण कई अंकुर बीच में ही कमजोर पड़ सकते हैं। इसलिए बुवाई की गहराई फसल और मिट्टी की स्थिति के अनुसार रखनी चाहिए।

बीज की अपनी स्थिति भी अंकुरण के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है। बहुत पुराना, अपरिपक्व, रोगग्रस्त या टूटा हुआ बीज कम अंकुरण देता है। भंडारण के दौरान अधिक नमी रहने से बीज की जीवंतता घट सकती है और उसमें रोग लग सकते हैं।

इसी प्रकार, भंडारण में कीटों द्वारा पहुंचाया गया नुकसान बीज के भ्रूण को क्षतिग्रस्त कर सकता है। कुछ बीज स्वस्थ होने के बावजूद सुप्तावस्था (Dormancy) में रहते हैं और अनुकूल नमी मिलने के बाद भी तुरंत अंकुरित नहीं होते। इसलिए कम अंकुरण के वास्तविक कारण को समझकर ही उचित उपाय करना चाहिए।

बीज उपचार का महत्व

बुवाई से पहले किया गया उचित बीज उपचार बीजजनित रोगों और शुरुआती अवस्था में लगने वाले कुछ कीटों से फसल को सुरक्षा प्रदान करता है। इससे अंकुरण और प्रारंभिक पौध वृद्धि बेहतर हो सकती है तथा पौधों को खेत में अच्छी तरह स्थापित होने का अवसर मिलता है।

बीज उपचार का चयन फसल, रोग या कीट की समस्या तथा कृषि विशेषज्ञ की अनुशंसा के अनुसार करना चाहिए।

बीज उपचार मुख्य रूप से तीन प्रकार से किया जा सकता है।

रासायनिक उपचार: इसमें कवकनाशी या अन्य अनुशंसित रसायनों से बीज का उपचार किया जाता है, जिससे फफूंद और रोगजनकों को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।

आंतरिक उपचार: इसमें ऐसे रसायनों का उपयोग किया जाता है, जो बीज के अंदर मौजूद रोगजनकों को नियंत्रित कर सकें।

भौतिक उपचार: इसमें गर्म पानी या गर्म हवा की सहायता से कुछ बीजजनित रोगों को नियंत्रित किया जाता है।

किसी भी प्रकार के बीज उपचार में निर्धारित मात्रा, उपचार की अवधि और सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन करना आवश्यक है।

बीज की सुप्तावस्था दूर करने के उपाय

कुछ फसलों के बीजों का बीजावरण बहुत कठोर होता है। ऐसे बीजों में पानी आसानी से प्रवेश नहीं कर पाता, जिसके कारण अंकुरण में देरी होती है।

आवश्यकता के अनुसार ऐसे बीजों को कुछ समय तक पानी में भिगोने से बीजावरण नरम हो सकता है और पानी का प्रवेश आसान हो जाता है।

दूसरी विधि में कठोर बीजावरण को बहुत हल्का खुरचा जाता है। इसे स्कारिफिकेशन (Scarification) कहा जाता है। यह कार्य सावधानीपूर्वक करना चाहिए, ताकि केवल बाहरी आवरण प्रभावित हो और अंदर का भ्रूण सुरक्षित रहे।

याद रखने योग्य बातें

भरपूर और स्वस्थ फसल के लिए हमेशा उच्च गुणवत्ता वाले बीज का चयन करें। बीज की शुद्धता और अंकुरण क्षमता की जांच करें तथा बुवाई से पहले उपयुक्त बीज उपचार अपनाएं।

इन सावधानियों से फसल की प्रारंभिक वृद्धि बेहतर होती है, रोगों और कीटों के प्रकोप को कम करने में सहायता मिलती है और अंततः उत्पादन तथा किसान की आय बढ़ सकती है।

इसलिए हर मौसम में प्रमाणित, स्वस्थ और अधिक अंकुरण क्षमता वाले बीज को ही प्राथमिकता दें, क्योंकि मजबूत और अच्छी फसल की नींव हमेशा अच्छे बीज से ही पड़ती है

 

Tags: AgricultureFarmingIndian Agriculture News
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