अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय सर्राफा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर सैन्य गतिविधियों और तनावपूर्ण माहौल ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि आमतौर पर ऐसे हालात में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आई। मजबूत होते डॉलर इंडेक्स के चलते सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारतीय बाजार में भी गोल्ड सस्ता हो गया।
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती ने सोने की मांग को कमजोर कर दिया है। निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर को प्राथमिकता दी, जिससे गोल्ड पर दबाव बढ़ गया।
डॉलर इंडेक्स में तेजी बनी मुख्य वजह
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स अमेरिकी मुद्रा की ताकत को दर्शाता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तब अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इसका असर मांग पर पड़ता है और कीमतों में गिरावट आने लगती है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते निवेशकों ने डॉलर में ज्यादा भरोसा दिखाया। यही कारण रहा कि डॉलर इंडेक्स में उछाल आया और सोने की चमक फीकी पड़ गई। जानकारों के अनुसार, अमेरिका की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख भी डॉलर को मजबूती दे रहा है।
दिल्ली सर्राफा बाजार में क्या रहे भाव
दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। वहीं चांदी की कीमतों में भी हल्की कमजोरी दर्ज की गई। बाजार कारोबारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से ग्राहकों की खरीदारी में भी कमी देखी जा रही थी, क्योंकि लोग कीमतों के स्थिर होने का इंतजार कर रहे थे।
हालांकि अब दामों में गिरावट आने के बाद शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन को देखते हुए बाजार में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। कई ज्वेलर्स का मानना है कि आने वाले दिनों में ग्राहकों की संख्या बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में सोने का बाजार पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर बना हुआ है। ईरान-अमेरिका तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी ब्याज दरें और डॉलर की चाल — ये सभी कारक गोल्ड की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
अगर डॉलर आगे भी मजबूत बना रहता है, तो सोने की कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है। हालांकि किसी बड़े वैश्विक संकट की स्थिति में निवेशक फिर से सोने की ओर लौट सकते हैं, जिससे दामों में तेजी आ सकती है।
विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे जल्दबाजी में कोई बड़ा निवेश निर्णय न लें। बाजार की चाल और वैश्विक संकेतों को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध निवेश करना अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।
ग्रामीण और कृषि बाजार पर भी असर
सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर केवल निवेशकों या ज्वेलरी बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में सोना बचत और निवेश का प्रमुख माध्यम माना जाता है। किसान परिवार अक्सर शादी, त्योहार या भविष्य की सुरक्षा के लिए सोने में निवेश करते हैं।
कीमतों में गिरावट से ग्रामीण खरीदारों को राहत मिल सकती है। खासकर उन परिवारों के लिए यह अच्छा अवसर माना जा रहा है, जो लंबे समय से सोना खरीदने का इंतजार कर रहे थे।
आगे क्या हो सकता है?
आर्थिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हालात और अमेरिकी आर्थिक नीतियां सोने की दिशा तय करेंगी। यदि ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ता है, तो बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर लिए जाने वाले फैसले भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल है और निवेशक हर छोटे-बड़े वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।


