भारतीय कृषि विपणन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) के ई-ऑक्शन पोर्टल NAFEX.in का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, सहकारिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा NAFED के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान NAFEX.in के साथ-साथ NAFED द्वारा शुरू की गई अन्य डिजिटल और प्रशासनिक पहलों का भी शुभारंभ किया गया। इनमें ‘दृष्टि’, ‘ईआरपी’ और ‘NAFED कल्याण’ जैसी योजनाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य संगठन की कार्यक्षमता बढ़ाना, किसानों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना और सहकारी क्षेत्र को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है।
किसानों को मिलेगा पारदर्शी और डिजिटल प्लेटफॉर्म
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि NAFEX.in केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह कृषि विपणन प्रणाली में एक बड़ा परिवर्तन साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल के माध्यम से कृषि उत्पादों की खरीद और बिक्री अधिक पारदर्शी होगी तथा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि नई प्रणाली के जरिए किसानों की उपज की नीलामी ऑनलाइन होगी, जिससे व्यापार प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। इसके साथ ही किसानों को भुगतान भी निर्धारित समय के भीतर सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त होगा।
अमित शाह ने कहा कि लंबे समय से किसान अपनी उपज बेचने के बाद भुगतान में देरी और मूल्य निर्धारण की समस्याओं का सामना करते रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म इन चुनौतियों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बंद होने की स्थिति से मुनाफे में पहुंचा NAFED
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में NAFED गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा था और संगठन का भविष्य अनिश्चित दिखाई दे रहा था। उस समय केंद्र सरकार ने इसे पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया और पारदर्शी संचालन के माध्यम से इसकी वित्तीय स्थिति को मजबूत किया गया।
उन्होंने बताया कि आज NAFED न केवल आर्थिक रूप से मजबूत संस्था बन चुका है, बल्कि लाखों किसानों के लिए एक भरोसेमंद सहकारी संगठन के रूप में स्थापित हुआ है। वर्तमान में संगठन का कारोबार लगभग 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और यह 74 लाख से अधिक किसानों को विभिन्न सेवाएं प्रदान कर रहा है।
उन्होंने कहा कि संगठन की लाभप्रदता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे यह भविष्य की योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम हुआ है।
दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
अमित शाह ने कहा कि देश को दलहन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए NAFED और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) को और अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि किसानों को यदि उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिले तो वे स्वाभाविक रूप से दलहन उत्पादन की ओर आकर्षित होंगे। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि देश की आयात निर्भरता भी कम होगी।
उन्होंने घोषणा की कि अगले दो वर्षों के भीतर ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी जिसके तहत दलहन का प्रत्येक दाना सीधे किसानों से खरीदा जा सकेगा। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ खरीद प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी।
खरीद प्रणाली में बिचौलियों की भूमिका होगी कम
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि कृषि विपणन में बिचौलियों की भूमिका को कम करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मेहनत से फसल पैदा करता है, लेकिन कई बार उसे उचित मूल्य नहीं मिल पाता क्योंकि लाभ का बड़ा हिस्सा मध्यस्थों के पास चला जाता है।
नई डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से किसानों और खरीद एजेंसियों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। इससे किसानों को वास्तविक बाजार मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी और भुगतान प्रक्रिया भी सरल होगी।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह है कि किसान की उपज का मूल्य सीधे उसके खाते में पहुंचे और उसे किसी प्रकार की अनावश्यक प्रक्रिया या देरी का सामना न करना पड़े।
कृषि क्षेत्र में NAFED की बढ़ती भूमिका
अमित शाह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में NAFED ने केवल कृषि उत्पादों की खरीद तक स्वयं को सीमित नहीं रखा है, बल्कि कई नए क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
उन्होंने बताया कि संगठन जैविक खेती, बीज उत्पादन, जैव उर्वरक निर्माण, खुदरा व्यापार, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कृषि व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इन गतिविधियों के कारण संगठन की पहुंच और प्रभाव दोनों में वृद्धि हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारी संस्थाओं की भूमिका केवल खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें किसानों के समग्र विकास में भागीदार बनना चाहिए। NAFED इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
किसानों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजना
कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण घोषणा किसानों के परिवारों के लिए छात्रवृत्ति योजना से संबंधित रही। अमित शाह ने बताया कि NAFED ने अपने मुनाफे का एक हिस्सा किसानों के बच्चों की उच्च शिक्षा और करियर विकास के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया है।
इस योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों के बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी ताकि आर्थिक कठिनाइयों के कारण उनकी शिक्षा प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली छात्र संसाधनों की कमी के कारण अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाते। यह पहल ऐसे विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगी और किसान परिवारों के सामाजिक सशक्तिकरण में योगदान देगी।
सहकारिता क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि NAFEX.in का शुभारंभ सहकारिता क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कृषि विपणन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने के लिए तकनीक का उपयोग अब अनिवार्य हो गया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म न केवल खरीद और बिक्री प्रक्रिया को सरल बनाएंगे बल्कि डेटा आधारित निर्णय लेने में भी सहायता करेंगे। इससे किसानों, व्यापारियों और सहकारी संस्थाओं के बीच विश्वास मजबूत होगा।
किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद
कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार यदि खरीद प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ती है और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलता है, तो इसका सीधा प्रभाव उनकी आय पर पड़ेगा। साथ ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था से वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा।
NAFEX.in जैसे प्लेटफॉर्म किसानों को बाजार से सीधे जोड़ने का कार्य करेंगे, जिससे कृषि व्यापार अधिक प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी बनेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
सहकारिता आधारित कृषि मॉडल को मिलेगा बल
भारत में सहकारिता आंदोलन लंबे समय से किसानों और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम रहा है। सरकार का मानना है कि यदि सहकारी संस्थाओं को आधुनिक तकनीक और पारदर्शी व्यवस्थाओं से जोड़ा जाए तो वे कृषि क्षेत्र में बड़े परिवर्तन का आधार बन सकती हैं।
NAFED और NCCF जैसी संस्थाओं की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होने वाली है। किसानों की उपज की सीधी खरीद, डिजिटल नीलामी, त्वरित भुगतान और शिक्षा जैसी सामाजिक पहलों के माध्यम से सहकारिता मॉडल को नई दिशा मिल सकती है।
कृषि विपणन में नए युग की शुरुआत
NAFEX.in के शुभारंभ को कृषि विपणन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल किसानों को बेहतर मूल्य, त्वरित भुगतान और पारदर्शी व्यापार व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्लेटफॉर्म का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया और किसानों को व्यापक स्तर पर इससे जोड़ा गया, तो यह कृषि विपणन प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
केंद्र सरकार की यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सहायक होगी, बल्कि सहकारिता आधारित कृषि विकास मॉडल को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी। आने वाले वर्षों में NAFED और NCCF की भूमिका भारतीय कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी, आत्मनिर्भर और तकनीक-सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

