मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिला है। गुरुवार को कारोबार शुरू होते ही शेयर बाजार में एक बार फिर कोहराम मच गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी दोनों ही बड़े नुकसान के साथ खुले और शुरुआती कारोबार में ही तेज गिरावट दर्ज की गई।
कारोबार की शुरुआत में बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,863 के मुकाबले गिरकर 76,369 के स्तर पर खुला। हालांकि गिरावट यहीं नहीं रुकी और कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स करीब 978 अंक लुढ़ककर 75,871 के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह एनएसई का निफ्टी भी दबाव में नजर आया। निफ्टी अपने पिछले बंद 23,866 के मुकाबले गिरकर 23,674 पर खुला और शुरुआती कारोबार में ही फिसलकर 23,556 तक आ गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। इस संघर्ष के चलते कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 9 फीसदी तक का उछाल देखने को मिला, जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ गई।
तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी का असर भारत पर भी पड़ रहा है। देश में एलपीजी संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी है। निवेशकों को डर है कि अगर तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो इसका सीधा असर महंगाई, सरकारी खर्च और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा। यही वजह है कि बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
गिरावट के इस दौर में कई दिग्गज कंपनियों के शेयर भी धड़ाम नजर आए। एयरलाइन सेक्टर से जुड़ी इंडिगो के शेयरों में कमजोरी देखी गई, क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ने से एविएशन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। वहीं फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो और बैंकिंग सेक्टर की बड़ी कंपनी आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के कई शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।
दरअसल, भारतीय बाजार को गिरावट के संकेत पहले से ही विदेशी बाजारों से मिल रहे थे। पिछले कारोबारी दिन अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं गुरुवार को एशियाई बाजार भी दबाव में नजर आए। इसके साथ ही गिफ्ट निफ्टी भी करीब 180 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था, जिसने भारतीय बाजार के लिए नकारात्मक माहौल बना दिया।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।

