• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home योजना

MIDH scheme: केंद्रीय मंत्री को 99 लाख की सब्सिडी: अपने ही मंत्रालय की योजना से लाभ, किसानों के लिए MIDH योजना क्यों जरूरी?

MIDH scheme: Union Minister receives ₹99 lakh subsidy: Benefiting from his own ministry's scheme—why is the MIDH scheme essential for farmers?

Fiza by Fiza
June 27, 2026
in योजना
0
MIDH scheme

MIDH scheme

0
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

MIDH scheme: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को अपने ही मंत्रालय के तहत आने वाली योजना से 99 लाख रुपये से अधिक की सब्सिडी मिलने का मामला चर्चा में है। इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह सब्सिडी राजस्थान में उनके खीरे की खेती वाले प्रोजेक्ट के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड यानी NHB के माध्यम से मंजूर हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि भागीरथ चौधरी कृषि राज्य मंत्री होने के नाते NHB के पदेन उपाध्यक्ष भी हैं, इसी वजह से इस मामले में हितों के टकराव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह सब्सिडी बागवानी फसलों को बढ़ावा देने वाली योजना के तहत दी गई। इस योजना में संरक्षित खेती, यानी पॉलीहाउस या ग्रीनहाउस जैसी तकनीक से खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और फूलों की खेती को प्रोत्साहन दिया जाता है। इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि इस योजना में अधिकतम 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी और एक परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये तक की सीमा तय है।

क्या है पूरा मामला?

भागीरथ चौधरी राजस्थान के अजमेर क्षेत्र से आते हैं और वर्तमान में केंद्र सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उनका खीरे की खेती से जुड़ा प्रोजेक्ट राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव में बताया गया है। वहां लगे प्रोजेक्ट बोर्ड के आधार पर रिपोर्ट में परियोजना की कुल लागत करीब 1.99 करोड़ रुपये बताई गई। इसमें प्रमोटर का हिस्सा करीब 49.8 लाख रुपये और बैंक लोन लगभग 1.49 करोड़ रुपये बताया गया है। इसी प्रोजेक्ट के लिए लगभग 99 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी मंजूर होने की बात सामने आई है।

मामले की संवेदनशीलता इसलिए बढ़ गई क्योंकि सब्सिडी जिस बोर्ड से मिली, वह कृषि मंत्रालय के अधीन आता है। कृषि राज्य मंत्री होने के नाते भागीरथ चौधरी इस बोर्ड से जुड़े पद पर भी हैं। विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाया है कि क्या ऐसे मामलों में मंत्री या उच्च पदस्थ व्यक्ति को लाभ लेने से पहले नैतिक आधार पर खुद को अलग कर लेना चाहिए था। हालांकि अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि नियमों का कोई उल्लंघन हुआ है।

मंत्री की सफाई

रिपोर्ट सामने आने के बाद भागीरथ चौधरी की ओर से सफाई भी आई। द वीक की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि वे पहले किसान हैं और उन्होंने कोई जानकारी नहीं छिपाई। उनका कहना है कि योजना का लाभ निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिया गया है और देश के हजारों किसान ऐसी योजनाओं का लाभ लेते हैं।

उनकी सफाई का मुख्य आधार यह है कि अगर कोई व्यक्ति किसान है और योजना की पात्रता पूरी करता है, तो वह सरकारी योजना का लाभ ले सकता है। लेकिन सवाल नियमों से ज्यादा नैतिकता और पारदर्शिता का है। यही वजह है कि यह मामला सिर्फ एक सब्सिडी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी योजनाओं की निगरानी, लाभार्थियों की चयन प्रक्रिया और प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर बड़ी बहस बन गया है।

विपक्ष ने क्यों उठाए सवाल?

विपक्ष का आरोप है कि आम किसान को सरकारी सब्सिडी के लिए कई बार लंबी प्रक्रिया, दस्तावेजी जांच, बैंक लोन, निरीक्षण और विभागीय मंजूरी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जब किसी केंद्रीय मंत्री को अपने ही मंत्रालय की योजना से इतना बड़ा लाभ मिलता है, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लाभार्थी चयन में सभी किसानों को समान अवसर मिला? क्या मंत्री से जुड़े प्रोजेक्ट की जांच उसी सख्ती से हुई, जैसे किसी सामान्य किसान की होती है? क्या बोर्ड की मंजूरी प्रक्रिया में हितों के टकराव से बचने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था थी? इन सवालों के स्पष्ट जवाब आने जरूरी हैं, क्योंकि कृषि योजनाओं पर किसानों का भरोसा पारदर्शिता से ही मजबूत होता है।

NHB और MIDH योजना क्या है?

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड यानी NHB केंद्र सरकार की ऐसी संस्था है, जो बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चलाती है। मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर यानी MIDH के तहत फल, सब्जी, मसाले, फूल और संरक्षित खेती को बढ़ावा दिया जाता है। NHB की वेबसाइट पर भी MIDH और संरक्षित खेती से जुड़ी गाइडलाइंस उपलब्ध हैं। (National Horticulture Board)

NHB की योजनाओं में आमतौर पर कमर्शियल हॉर्टिकल्चर, संरक्षित खेती, कोल्ड स्टोरेज, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट, प्लांटेशन और उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है। संरक्षित खेती के तहत किसान पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस, ग्रीनहाउस, ड्रिप इरिगेशन और नियंत्रित वातावरण में खेती कर सकते हैं। इससे मौसम के जोखिम कम होते हैं और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है।

किसानों के लिए यह योजना कैसे फायदेमंद है?

MIDH और NHB जैसी योजनाएं किसानों के लिए काफी उपयोगी हो सकती हैं, खासकर उन किसानों के लिए जो पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती करना चाहते हैं। भारत में बहुत से किसान गेहूं, धान या सामान्य सब्जियों पर निर्भर रहते हैं, जिनमें कमाई मौसम, बाजार भाव और लागत पर बहुत निर्भर करती है। इसके मुकाबले पॉलीहाउस या संरक्षित खेती में खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च, फूल और अन्य बागवानी फसलें बेहतर आमदनी दे सकती हैं।

सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान सीमित जमीन पर भी ज्यादा उत्पादन ले सकते हैं। पॉलीहाउस में तापमान, नमी और सिंचाई को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जाता है। इससे फसल जल्दी तैयार हो सकती है, गुणवत्ता अच्छी रहती है और बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ती है।

दूसरा फायदा पानी की बचत है। संरक्षित खेती में ड्रिप इरिगेशन और फर्टिगेशन का उपयोग किया जाता है। इससे पानी और खाद दोनों का सही मात्रा में उपयोग होता है। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है, वहां यह तकनीक किसानों के लिए मददगार साबित हो सकती है।

तीसरा फायदा मौसम से सुरक्षा है। खुले खेत में तेज बारिश, ओलावृष्टि, गर्मी, ठंड और कीटों का खतरा ज्यादा रहता है। पॉलीहाउस में फसल को बाहरी मौसम से काफी हद तक बचाया जा सकता है। इससे नुकसान कम होता है और उत्पादन स्थिर रहता है।

चौथा फायदा बाजार से जुड़ा है। खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च और फूलों जैसी फसलें होटल, रिटेल मार्केट, मंडी और प्रोसेसिंग यूनिट में मांग वाली फसलें हैं। अगर किसान सही मार्केटिंग और ग्रेडिंग करें, तो उन्हें पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर दाम मिल सकते हैं।

पांचवां फायदा यह है कि सब्सिडी से शुरुआती लागत कम होती है। पॉलीहाउस या ग्रीनहाउस बनाने में लाखों रुपये खर्च हो सकते हैं। छोटे और मध्यम किसानों के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना आसान नहीं होता। सरकारी सहायता मिलने से बैंक लोन का बोझ कम हो सकता है और किसान नई तकनीक अपनाने की हिम्मत कर पाते हैं।

किसानों को योजना का लाभ लेने से पहले क्या ध्यान रखना चाहिए?

किसानों को इस योजना का लाभ लेने से पहले अपने जिले के उद्यान विभाग, राज्य हॉर्टिकल्चर मिशन या NHB से सही जानकारी लेनी चाहिए। आवेदन करने से पहले जमीन के दस्तावेज, आधार, बैंक खाता, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, लागत अनुमान, लोन स्वीकृति और फसल योजना तैयार रखनी चाहिए। NHB की गाइडलाइंस के अनुसार, एक ही प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग केंद्रीय योजनाओं से दोहरा लाभ नहीं लिया जा सकता। (National Horticulture Board)

किसानों को यह भी समझना चाहिए कि पॉलीहाउस खेती सिर्फ सब्सिडी लेकर शुरू करने वाली चीज नहीं है। इसमें तकनीकी जानकारी, बाजार की समझ, गुणवत्तापूर्ण बीज, सही सिंचाई, रोग प्रबंधन और नियमित निगरानी जरूरी है। बिना प्रशिक्षण के बड़ा निवेश जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए किसान पहले कृषि विज्ञान केंद्र, उद्यान विभाग या सफल पॉलीहाउस किसानों से सलाह लें।

निष्कर्ष

भागीरथ चौधरी को 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने का मामला सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और नैतिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। कानूनी रूप से क्या हुआ और क्या नहीं, यह जांच और आधिकारिक जवाब से साफ होगा। लेकिन इस मामले ने यह जरूर दिखाया है कि कृषि योजनाओं में लाभार्थियों की जानकारी सार्वजनिक और स्पष्ट होनी चाहिए।

दूसरी तरफ, MIDH और NHB जैसी योजनाएं किसानों के लिए बेहद फायदेमंद हो सकती हैं। अगर इनका लाभ सही किसानों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे, तो बागवानी, पॉलीहाउस खेती और उच्च मूल्य वाली फसलों के जरिए किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि योजना का लाभ प्रभावशाली लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि छोटे और मध्यम किसानों तक भी आसानी से पहुंचे।

 

Tags: Agriculture MinistryBhagirath ChoudharyCucumber FarmingFarmer Subsidyfasal krantiHorticulture SchemeKisan Yojanamidh schemeNHB SubsidyPolyhouse Farmingprotected cultivationRajasthan Newsकृषि सब्सिडी
Previous Post

Khadya Suraksha Adhiniyam: गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए भोजन का कानूनी अधिकार

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • MIDH scheme: केंद्रीय मंत्री को 99 लाख की सब्सिडी: अपने ही मंत्रालय की योजना से लाभ, किसानों के लिए MIDH योजना क्यों जरूरी?
  • Khadya Suraksha Adhiniyam: गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए भोजन का कानूनी अधिकार
  • Dasheri Mango किसानों की मेहनत से हर घर तक पहुँचने वाला स्वाद का असली राजा
  • माइक्रोन्यूट्रिएंट उर्वरकों का बाजार: बढ़ती मांग, नए अवसर और भविष्य की दिशा
  • भारत को ग्रीन यूरिया की जरूरत क्यों है?

Recent Comments

  1. sfokcer topsde on Papaya Farming आपके खेत में स्वस्थ पपीता उगाने का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक तरीका
  2. sfokcer topsde on Papaya Farming के लिए बेहतरीन जैविक खाद तकनीकें
  3. sfokcertopsde on बेगूसराय के किसान अमरदीप ने पपीते की खेती ( Papaya Farming) से रचा सफलता का नया अध्याय
  4. Rolando Lanno on बेगूसराय के किसान अमरदीप ने पपीते की खेती ( Papaya Farming) से रचा सफलता का नया अध्याय
  5. Marion Lamberth on Papaya Farming आपके खेत में स्वस्थ पपीता उगाने का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक तरीका
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.