दिल्ली के किसानों, युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), उजवा द्वारा आयोजित 10 दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। “मशरूम उत्पादन तकनीक: लाभदायक स्वरोजगार आधारित उद्यम” विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को आधुनिक मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना था। यह प्रशिक्षण 23 जून से 2 जुलाई 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें दिल्ली और आसपास के राज्यों से आए किसानों, युवाओं तथा महिला प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. डी.के. राणा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मशरूम उत्पादन कृषि क्षेत्र का तेजी से उभरता हुआ व्यवसाय है। उन्होंने बताया कि कम भूमि, सीमित निवेश और कम समय में अधिक लाभ देने वाला यह उद्यम ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प बन सकता है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर मशरूम उत्पादन की स्थिति, भारत में इसकी बढ़ती मांग, विभिन्न प्रजातियों तथा मशरूम के पोषण और औषधीय गुणों की विस्तृत जानकारी भी प्रतिभागियों को दी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन मशरूम विशेषज्ञ डॉ. बाबू लाल फगोड़िया ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक पद्धति से कम्पोस्ट तैयार करने, सफेद बटन मशरूम, ऑयस्टर मशरूम और मिल्की मशरूम की उन्नत खेती, शेड निर्माण, केसिंग प्रक्रिया, तापमान एवं आर्द्रता प्रबंधन सहित उत्पादन की आधुनिक तकनीकों का सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की प्रत्येक प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी कराया गया, जिससे वे स्वयं इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए आत्मविश्वास प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम में बागवानी विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि बदलते कृषि परिदृश्य में मशरूम उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रभावी साधन बनकर उभर रहा है। उन्होंने बताया कि मशरूम केवल पौष्टिक खाद्य पदार्थ ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है। इसकी बढ़ती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग किसानों के लिए नए बाजार और बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने वैज्ञानिक खेती अपनाकर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करने पर विशेष बल दिया।
गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. रितु सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान कटाई के बाद मशरूम के उचित प्रबंधन, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और भंडारण की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि किसान केवल ताजा मशरूम बेचने तक सीमित न रहकर मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करें, तो उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है। उन्होंने मशरूम सूप, मशरूम बिस्किट, मशरूम पकौड़े, मशरूम चिप्स जैसे उत्पादों के निर्माण और विपणन की जानकारी भी प्रतिभागियों के साथ साझा की।
सस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. समर पाल सिंह ने गुणवत्तापूर्ण कम्पोस्ट और जैविक खाद तैयार करने की वैज्ञानिक विधियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बायो-फर्टिलाइजर का उचित उपयोग उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने मशरूम उत्पादन में जैविक तरीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया।
कृषि प्रसार विशेषज्ञ श्री कैलाश ने मशरूम उद्यम की ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और विपणन रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से भी मशरूम उत्पादों की सफल बिक्री की जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मशरूम उत्पादन इकाइयों की स्थापना के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता और अनुदान योजनाओं की जानकारी भी दी, जिससे नए उद्यमियों को आर्थिक सहायता प्राप्त हो सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसान श्री पवन कुमार ने अपने व्यावहारिक अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए। उन्होंने वातानुकूलित परिस्थितियों में सफेद बटन मशरूम की व्यावसायिक खेती, गुणवत्तापूर्ण कम्पोस्ट निर्माण, केसिंग प्रक्रिया और अच्छी गुणवत्ता वाले स्पॉन की पहचान एवं खरीद से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उनके अनुभवों ने प्रतिभागियों को व्यावसायिक स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
इस प्रशिक्षण की विशेषता यह रही कि प्रतिभागियों को केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें दिल्ली क्षेत्र के सफल मशरूम उद्यमियों की इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया। वहां उन्होंने आधुनिक उत्पादन तकनीकों, उद्यम प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन व्यवस्था का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इससे प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में मशरूम उत्पादन व्यवसाय को समझने और भविष्य में स्वयं का उद्यम स्थापित करने की व्यावहारिक प्रेरणा मिली।
समापन समारोह में प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और रोजगारपरक बताते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने की अपेक्षा जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर मशरूम उत्पादन शुरू करें और आधुनिक विपणन रणनीतियों का उपयोग करें, तो यह व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यही कारण है कि मशरूम उत्पादन आज पारंपरिक खेती के साथ एक लाभदायक स्वरोजगार आधारित उद्यम के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
