ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन (Rashtriya Gramin Vikas Sammelan-2026) सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, तकनीक आधारित ग्रामीण विकास और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा हुई।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित ग्राम, विकसित भारत‘ के लक्ष्य को गति देना था। इस दौरान ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई, राज्यों के सफल मॉडलों को साझा किया गया और आने वाले वर्षों के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई। सम्मेलन में देशभर के ग्रामीण विकास मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, नीति विशेषज्ञ, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के प्रतिनिधि और विकास साझेदार शामिल हुए।
शिवराज सिंह चौहान ने किया सम्मेलन का उद्घाटन
सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी तथा ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य केवल गांवों का विकास करना नहीं, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का प्रत्येक गांव मजबूत होगा और वहां रहने वाले लोगों को बेहतर आजीविका, आवास, सड़क, रोजगार और बाजार उपलब्ध होंगे।
VB-GRAMG Act 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर
सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण VB-GRAMG Act, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा रही। इस कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार, आजीविका और विकास से जुड़ी नई सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में रणनीति तैयार की गई।
इसके अलावा सम्मेलन में कई प्रमुख ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की गई, जिनमें शामिल हैं—
- प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G)
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)
- दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)
- ग्रामीण कौशल विकास कार्यक्रम
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP)
विशेषज्ञों ने इन योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्यों के अनुभव साझा किए और नई कार्ययोजना तैयार की।
ग्राम पंचायतों को और सशक्त बनाने पर जोर
सम्मेलन में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि ग्रामीण विकास की सफलता मजबूत ग्राम पंचायतों पर निर्भर करती है।
इसीलिए पंचायतों की क्षमता बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर बेहतर योजना निर्माण, डिजिटल शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जनभागीदारी को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि यदि पंचायतों को आधुनिक तकनीक और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो ग्रामीण विकास योजनाओं का लाभ तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।
2029 तक 6 करोड़ ‘लखपति दीदी‘ बनाने का लक्ष्य
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण को सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल किया गया।
सरकार ने दोहराया कि वर्ष 2029 तक 6 करोड़ ‘लखपति दीदी‘ तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए डिजिटल तकनीक, उद्यमिता प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार से जोड़ने और ब्रांडिंग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सम्मेलन में बताया गया कि स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं को केवल ऋण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।
10 करोड़ से अधिक महिलाओं को मिल रहा लाभ
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत वर्तमान में 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में भाग ले रही हैं।
इन महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देशभर में उनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
सरकार का लक्ष्य इन महिला उद्यमियों को आधुनिक विपणन, डिजिटल प्लेटफॉर्म, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स से जोड़ना है ताकि उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो सके।
लॉन्च हुआ ‘SARAS Shakti Collection’
सम्मेलन के दौरान ग्रामीण महिला उद्यमियों को नई पहचान देने के उद्देश्य से ‘SARAS Shakti Collection’ लॉन्च किया गया।
यह संग्रह देशभर के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्कृष्ट उत्पादों का विशेष संकलन है।
इसमें हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, वस्त्र, गृह सज्जा सामग्री, स्वास्थ्य एवं वेलनेस उत्पाद, पारंपरिक खाद्य सामग्री और अन्य प्रीमियम ग्रामीण उत्पाद शामिल किए गए हैं।
सरकार का उद्देश्य इन उत्पादों को बड़े संस्थागत खरीदारों, कॉर्पोरेट बाजार और आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है ताकि महिला उद्यमियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।
‘SARAS Shakti Coffee Table Book’ भी हुई लॉन्च
सम्मेलन में SARAS Shakti Coffee Table Book का भी विमोचन किया गया।
इस पुस्तक में देशभर की महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की विविधता, गुणवत्ता, नवाचार और बाजार क्षमता को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक केवल उत्पादों का परिचय नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की सफलता की कहानियों और उनके उद्यमों की प्रेरणादायक यात्रा को भी सामने लाती है।
सरकार का मानना है कि इससे ‘SARAS’ ब्रांड की राष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी।
सारस आजीविका बना राष्ट्रीय मार्केटिंग प्लेटफॉर्म
सम्मेलन में सारस आजीविका (SARAS Aajeevika) की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला गया।
बताया गया कि वर्ष 1999 में शुरू हुए पहले सारस मेले से लेकर आज यह पहल एक राष्ट्रीय मार्केटिंग नेटवर्क का रूप ले चुकी है।
वर्तमान में—
- 25 से अधिक राज्य ब्रांड इससे जुड़े हैं।
- हर वर्ष 200 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो रहा है।
- हजारों महिला उद्यमियों को सीधे बाजार उपलब्ध हो रहा है।
इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राज्यों के प्रतिनिधियों ने देखा ‘सारस आजीविका गैलरी‘
सम्मेलन के दौरान गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मेघालय, बिहार, केरल, तेलंगाना सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने सारस आजीविका गैलरी का अवलोकन किया।
गैलरी में देशभर की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प का शानदार प्रदर्शन किया गया।
यहां प्रदर्शित प्रमुख उत्पादों में शामिल थे—
- पंजाब की फुलकारी
- जम्मू-कश्मीर की पश्मीना
- तेलंगाना की इकत और तेलिया वस्त्र
- मिजोरम की पौंचेई बुनाई
- मीनाकारी कला
- डोकरा शिल्प
- पीतल शिल्प
- लकड़ी की हस्तकला
- पारंपरिक खाद्य उत्पाद
- हर्बल एवं वेलनेस उत्पाद
इन उत्पादों ने देश की सांस्कृतिक विविधता और ग्रामीण कारीगरों की उत्कृष्ट कला का शानदार परिचय दिया।
‘लखपति दीदी‘ बनीं प्रेरणा का केंद्र
गैलरी में कई सफल लखपति दीदी भी मौजूद रहीं, जिन्होंने अपने अनुभव साझा किए।
इन महिलाओं ने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने, प्रशिक्षण प्राप्त करने, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध होने के बाद उनकी आय में कई गुना वृद्धि हुई है।
उनकी सफलता की कहानियां सम्मेलन में आए अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों और महिला उद्यमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं।
तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिलेगा नया बाजार
सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भविष्य का ग्रामीण विकास डिजिटल तकनीक के बिना संभव नहीं है।
महिला उद्यमियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन मार्केटिंग, सोशल मीडिया ब्रांडिंग और आधुनिक पैकेजिंग से जोड़ने की रणनीति तैयार की गई।
सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण उत्पादों की पहुंच देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक भी बढ़ाई जा सकेगी।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026 ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले वर्षों में ग्रामीण विकास केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण, डिजिटल तकनीक, स्वयं सहायता समूहों की मजबूती, ग्राम पंचायतों की क्षमता, आधुनिक बाजार व्यवस्था और सामुदायिक भागीदारी इसके प्रमुख आधार होंगे।
‘SARAS Shakti Collection’ और ‘SARAS Shakti Coffee Table Book’ जैसे नए प्रयास ग्रामीण महिला उद्यमियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि सम्मेलन में तैयार किए गए रोडमैप को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह न केवल लाखों ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाएगा, बल्कि ‘विकसित ग्राम, विकसित भारत‘ के लक्ष्य को भी नई गति प्रदान करेगा।

