• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

धान की Organic Farming कैसे करें? जानिए जैविक तरीके से धान की खेती की पूरी जानकारी, लागत और बेहतर उत्पादन का तरीका

How to practice organic paddy farming? Learn all about organic paddy cultivation, including costs and methods for achieving better yields.

Fiza by Fiza
August 29, 2026
in कृषि समाचार
0
धान की Organic Farming कैसे करें? जानिए जैविक तरीके से धान की खेती की पूरी जानकारी, लागत और बेहतर उत्पादन का तरीका

Organic Farming

0
SHARES
2
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत में धान प्रमुख खाद्यान्न फसलों में शामिल है और देश के करोड़ों किसानों की आय का महत्वपूर्ण आधार है। बदलती कृषि पद्धतियों के बीच किसानों का रुझान अब ऐसी खेती की ओर बढ़ रहा है, जिसमें मिट्टी की उर्वरता बनी रहे, कृषि लागत को नियंत्रित किया जा सके और उपज को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सके। इसी वजह से Organic Farming यानी जैविक खेती को लेकर किसानों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

धान की खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता से लंबे समय में मिट्टी के स्वास्थ्य, जैव विविधता और खेती की लागत पर असर पड़ सकता है। इसके विकल्प के रूप में किसान जैविक खाद, हरी खाद, जैव उर्वरक, फसल अवशेष प्रबंधन और जैविक कीट नियंत्रण जैसी तकनीकों को अपना सकते हैं।

लेकिन सवाल यह है किधान की Organic Farmingकैसे करें?धान की जैविक खेती शुरू करने से पहले खेत की तैयारी, बीज का चयन, बीज उपचार, नर्सरी प्रबंधन, रोपाई, पोषण प्रबंधन, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और कीट-रोग प्रबंधन की सही जानकारी होना जरूरी है।

इस लेख में जानिएOrganic Rice Farmingकी पूरी प्रक्रिया, जरूरी सावधानियां, जैविक खाद का इस्तेमाल, कीट नियंत्रण और बेहतर उत्पादन के लिए अपनाई जाने वाली महत्वपूर्ण तकनीकें।

धान की Organic Farming क्या है?

धान कीOrganic Farmingऐसी कृषि पद्धति है जिसमें फसल उत्पादन के दौरान रासायनिक उर्वरकों, सिंथेटिक कीटनाशकों और अन्य कृत्रिम कृषि रसायनों के उपयोग को कम या पूरी तरह समाप्त करते हुए जैविक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है।

इस पद्धति में खेत की उर्वरता बनाए रखने के लिए गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद, फसल अवशेष, जैव उर्वरक और अन्य अनुमोदित जैविक इनपुट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

धान की जैविक खेती का मुख्य उद्देश्य केवल रसायनों का इस्तेमाल बंद करना नहीं है, बल्कि Soil Health Management, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और एक संतुलित कृषि पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना भी है।

Organic Rice Farming शुरू करने से पहले क्या करें?

यदि किसान पहली बार धान की Organic Farming शुरू कर रहा है, तो पूरे खेत को एक साथ जैविक खेती में बदलने के बजाय चरणबद्ध तरीके से शुरुआत करना उपयोगी हो सकता है।सबसे पहले खेत की मिट्टी की जांच करानी चाहिए। इससे मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों और उसकी स्थिति के बारे में जानकारी मिलती है। इसके आधार पर जैविक पोषण प्रबंधन की योजना बनाई जा सकती है।

यदि खेत में पहले लंबे समय से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल होता रहा है, तो जैविक खेती की ओर संक्रमण के दौरान खेत की उर्वरता और फसल की जरूरतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

धान की जैविक खेती के लिए खेत और मिट्टी का चयन

धान की अच्छी फसल के लिए ऐसी मिट्टी बेहतर मानी जाती है जिसमें पानी को रोकने की क्षमता अच्छी हो और जल निकास की उचित व्यवस्था हो।धान की खेती के लिए दोमट और चिकनी दोमट मिट्टी सामान्यतः उपयुक्त होती है। खेत में पानी लंबे समय तक जमा रहने की स्थिति में पौधों की जड़ों को नुकसान हो सकता है, इसलिए अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए उचित व्यवस्था जरूरी है।Organic Farming for rice में मिट्टी की जैविक गतिविधि बढ़ाना महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए खेत में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

धान की Organic Farming के लिए खेत की तैयारी

खेत की तैयारी का उद्देश्य मिट्टी को भुरभुरी बनाना, खरपतवार को नियंत्रित करना और खेत को समतल करना है।पहली जुताई के बाद खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाई जा सकती है। इसके बाद खेत की आवश्यकता के अनुसार जुताई और पडलिंग की जाती है। धान की रोपाई वाले खेत मेंLand Leveling in Rice Farmingमहत्वपूर्ण है। समतल खेत में सिंचाई का पानी समान रूप से फैलता है और पानी की अनावश्यक बर्बादी कम की जा सकती है।

जैविक खाद का इस्तेमाल कैसे करें?

धान कीOrganic Farmingमें पोषण प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। किसान खेत की मिट्टी और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अलग-अलग जैविक खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं।

  1. गोबर की खाद

अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद करती है। इसे खेत की तैयारी के दौरान मिट्टी में मिलाया जा सकता है।

कच्ची या अधपकी गोबर की खाद का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे खरपतवार के बीज और कुछ अवांछित जीव खेत में पहुंच सकते हैं।

  1. कम्पोस्ट

फसल अवशेष, पत्तियों और अन्य जैविक पदार्थों से तैयार कम्पोस्ट का उपयोग मिट्टी की संरचना और जैविक गतिविधि को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।

  1. वर्मी कम्पोस्ट

Vermicompost for Rice Farmingजैविक धान उत्पादन में उपयोगी पोषक स्रोत हो सकता है। इसमें विभिन्न पोषक तत्वों के साथ जैविक पदार्थ भी मौजूद होते हैं।

  1. हरी खाद

हरी खाद के लिए ढैंचा जैसी फसलें उगाकर उचित अवस्था में मिट्टी में मिलाई जा सकती हैं। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलती है।

  1. जैव उर्वरक

किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसारBiofertilizers for Organic Rice Farmingजैसे उपयुक्त जैव उर्वरकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

जैव उर्वरकों का इस्तेमाल करते समय उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देशों और निर्धारित मात्रा का पालन करना चाहिए।

धान की Organic Farming के लिए बीज का चयन

अच्छी फसल के लिए गुणवत्तापूर्ण और क्षेत्र के अनुकूल बीज का चुनाव बहुत जरूरी है। किसानों को ऐसी धान की किस्म का चयन करना चाहिए जो उनके क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, पानी की उपलब्धता और बाजार की मांग के अनुसार उपयुक्त हो।बीज हमेशा विश्वसनीय स्रोत से लेना चाहिए। स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल प्रमाणित या गुणवत्तापूर्ण बीज का इस्तेमाल फसल की स्थापना में मदद करता है। Best Organic Rice Farming Practicesमें स्वस्थ और अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण कदम है।

धान के बीज का जैविक उपचार कैसे करें?

धान की Organic Farming में बीज उपचार का विशेष महत्व है। बीज उपचार का उद्देश्य बीज से होने वाले रोगों की संभावना को कम करना और स्वस्थ पौध तैयार करना है।किसान कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय या विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार अनुमोदित जैविक बीज उपचार सामग्री का इस्तेमाल कर सकते हैं।जैव उर्वरक या माइक्रोबियल उत्पादों का इस्तेमाल करते समय उत्पाद के निर्माता द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए।

धान की नर्सरी कैसे तैयार करें?

धान की सफल खेती के लिए स्वस्थ पौध तैयार करना बहुत जरूरी है। नर्सरी के लिए ऐसे स्थान का चयन करें जहां सिंचाई और जल निकासी की सुविधा उपलब्ध हो।नर्सरी की मिट्टी को अच्छी तरह तैयार करें और आवश्यकतानुसार जैविक खाद का इस्तेमाल करें। बीज की बुवाई बहुत अधिक घनी नहीं करनी चाहिए। घनी नर्सरी में पौधों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।

Organic Rice Nursery Managementमें पानी, पोषण और रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

धान की रोपाई कब और कैसे करें?

धान की रोपाई का समय क्षेत्र और किस्म के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। सामान्य तौर पर स्वस्थ और उचित उम्र की पौध को मुख्य खेत में लगाया जाता है।बहुत अधिक उम्र की पौध लगाने से पौधों की वृद्धि और कल्ले निकलने पर असर पड़ सकता है। वहीं बहुत कम उम्र की पौध भी प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील हो सकती है।रोपाई करते समय पौधों के बीच उचित दूरी रखना जरूरी है। बहुत अधिक घनी रोपाई से हवा का संचार कम हो सकता है और रोगों का खतरा बढ़ सकता है।Rice Plant Spacing for Organic Farmingका निर्धारण स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और धान की किस्म के अनुसार किया जाना चाहिए।

जैविक तरीके से धान में खरपतवार नियंत्रण

धान की Organic Farming में खरपतवार नियंत्रण एक बड़ी चुनौती हो सकती है। खरपतवार धान के पौधों के साथ पानी, पोषक तत्व, प्रकाश और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।

खरपतवार नियंत्रण के लिए किसान निम्न उपाय अपना सकते हैं:

  • खेत की उचित तैयारी करें।
  • रोपाई के समय उचित पौध दूरी रखें।
  • समय पर निराई-गुड़ाई करें।
  • यांत्रिक खरपतवार नियंत्रण उपकरणों का इस्तेमाल करें।
  • खेत में पानी का उचित प्रबंधन करें।
  • फसल अवशेषों और जैविक मल्चिंग जैसी तकनीकों का उचित इस्तेमाल करें।

Organic Weed Management in Riceमें समय पर खरपतवार नियंत्रण बेहद जरूरी है। खरपतवार बहुत बड़े होने के बाद उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

धान में जैविक तरीके से कीट नियंत्रण कैसे करें?

धान की फसल में तना छेदक, पत्ती लपेटक, गंधी बग और अन्य कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं। Organic Farming में कीट नियंत्रण के लिए Integrated Pest Management यानी समेकित कीट प्रबंधन को अपनाना उपयोगी हो सकता है।

सबसे पहले खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए। केवल कीट दिखाई देने पर तुरंत किसी जैविक उत्पाद का छिड़काव करने के बजाय यह देखना चाहिए कि कीट की संख्या आर्थिक नुकसान की सीमा तक पहुंची है या नहीं।

जैविक कीट नियंत्रण के प्रमुख उपाय

नीम आधारित उत्पाद:
अनुमोदित नीम आधारित जैविक उत्पादों का इस्तेमाल लेबल और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार किया जा सकता है।

प्रकाश प्रपंच:
कुछ कीटों की निगरानी और नियंत्रण में Light Trap उपयोगी हो सकता है।

फेरोमोन ट्रैप:
विशिष्ट कीटों की निगरानी के लिए उपयुक्त फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल किया जा सकता है।

जैविक नियंत्रण एजेंट:
कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार Trichogrammaजैसे जैव नियंत्रण एजेंटों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

फसल की निगरानी:
नियमित खेत निरीक्षण से कीटों की शुरुआती पहचान की जा सकती है।

धान के रोगों का Organic Management

धान में ब्लास्ट, शीथ ब्लाइट, ब्राउन स्पॉट और अन्य रोगों की समस्या कुछ परिस्थितियों में हो सकती है।

रोग प्रबंधन के लिए सबसे पहले रोग की सही पहचान जरूरी है। बिना पहचान के किसी भी उत्पाद का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

रोग प्रबंधन के लिए:

  • स्वस्थ बीज का इस्तेमाल करें।
  • खेत में अत्यधिक नमी से बचें।
  • संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाएं।
  • अत्यधिक घनी रोपाई से बचें।
  • खेत की नियमित निगरानी करें।
  • रोगग्रस्त पौधों की पहचान समय पर करें।
  • अनुमोदित जैविक उत्पादों का इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से करें।

Organic Disease Management in Riceमें रोकथाम को उपचार की तुलना में अधिक महत्व दिया जाता है।

धान की Organic Farming में सिंचाई प्रबंधन

धान को पानी की अधिक आवश्यकता वाली फसल माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फसल के पूरे जीवनकाल में खेत में लगातार पानी भरा रहना जरूरी है। सिंचाई का प्रबंधन मिट्टी, मौसम, फसल की अवस्था और क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार करना चाहिए। अत्यधिक पानी से पोषक तत्वों की हानि और जड़ों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, जबकि पानी की कमी से पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। Water Management in Organic Rice Farmingका उद्देश्य फसल की आवश्यकता के अनुसार पानी उपलब्ध कराना और अनावश्यक जल उपयोग को कम करना है।

फसल अवशेषों का प्रबंधन

धान की कटाई के बाद बचे अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग जैविक संसाधन के रूप में किया जा सकता है। फसल अवशेषों से कम्पोस्ट तैयार की जा सकती है। इससे खेत में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है।

Rice Straw Management in Organic Farmingके माध्यम से किसान फसल अवशेषों को संसाधन में बदल सकते हैं और खेत में पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा दे सकते हैं।

धान की Organic Farming में लागत कैसे कम करें?

Organic Farming में लागत कम करने के लिए किसानों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना चाहिए। यदि किसान के पास पशुधन है तो अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद तैयार करके खेत में इस्तेमाल की जा सकती है। इसी प्रकार खेत के फसल अवशेषों से कम्पोस्ट तैयार की जा सकती है। जैविक खेती में बाहरी इनपुट पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजायFarm Resource Recyclingपर ध्यान देना लागत को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

हालांकि जैविक खेती में शुरुआती वर्षों में कुछ अतिरिक्त श्रम या प्रबंधन लागत आ सकती है। इसलिए किसान को उत्पादन लागत, उपज, गुणवत्ता और बाजार मूल्य को ध्यान में रखकर आर्थिक योजना बनानी चाहिए।

Organic Rice Farming से उत्पादन कितना मिल सकता है?

धान की जैविक खेती में उत्पादन कई कारकों पर निर्भर करता है। इसमें धान की किस्म, मिट्टी की उर्वरता, मौसम, सिंचाई, रोपाई की तकनीक, पोषण प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण और किसान के प्रबंधन कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि Organic Farming में हर किसान को निश्चित मात्रा में उत्पादन मिलेगा।

जैविक खेती में संक्रमण के शुरुआती वर्षों में उत्पादन में बदलाव आ सकता है। उचित Soil Fertility Management और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान उत्पादन को स्थिर करने की दिशा में काम कर सकते हैं।

जैविक धान की बिक्री और बाजार

यदि किसान जैविक धान का उत्पादन करता है तो बाजार से जुड़ी योजना भी खेती के साथ ही बनानी चाहिए। जैविक उत्पादों के बाजार में उपभोक्ता अक्सर गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी और प्रमाणन को महत्व देते हैं। इसलिए यदि किसान प्रमाणित जैविक उत्पादन करना चाहता है तो उसे संबंधित Organic Certification प्रक्रिया और लागू मानकों की जानकारी लेनी चाहिए। किसान FPO, सहकारी संस्था, स्थानीय बाजार, प्रोसेसर और अन्य खरीदारों के साथ जुड़कर बेहतर बाजार अवसर तलाश सकते हैं।

Organic Rice Market in Indiaमें संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन बेहतर मूल्य प्राप्त करने के लिए गुणवत्ता, प्रमाणन, पैकेजिंग और बाजार संपर्क पर भी ध्यान देना जरूरी है।

 

Organic Farming में किसानों को किन गलतियों से बचना चाहिए?

धान की जैविक खेती करते समय कुछ सामान्य गलतियां फसल के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।

पहली गलती: अचानक पूरी तरह बदलाव

लंबे समय से रासायनिक खेती वाले खेत को अचानक पूरी तरह जैविक बनाने के बजाय किसान को चरणबद्ध रणनीति और विशेषज्ञ सलाह के साथ बदलाव करना चाहिए।

दूसरी गलती: केवल खाद डालना

Organic Farming का मतलब सिर्फ गोबर की खाद डालना नहीं है। इसमें मिट्टी स्वास्थ्य, फसल विविधता, खरपतवार प्रबंधन, कीट नियंत्रण और फसल अवशेष प्रबंधन सभी शामिल हैं।

तीसरी गलती: कीटों की निगरानी न करना

जैविक खेती में भी कीट नियंत्रण की आवश्यकता होती है। नियमित निगरानी जरूरी है।

चौथी गलती: बिना पहचान के उत्पाद इस्तेमाल करना

किसी भी जैविक या जैव-आधारित उत्पाद का इस्तेमाल केवल नाम देखकर नहीं करना चाहिए। उत्पाद की वैधता, उपयोग विधि और अनुशंसित मात्रा की जानकारी जरूर लें।

पांचवीं गलती: बाजार की योजना न बनाना

जैविक धान पैदा करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उसे कहां और किस खरीदार को बेचा जाएगा।

धान की Organic Farming के फायदे

धान कीOrganic Farmingअपनाने से कई संभावित लाभ हो सकते हैं। पहला, जैविक पदार्थों के इस्तेमाल से मिट्टी की संरचना और जैविक गतिविधि को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। दूसरा, खेत में स्थानीय जैविक संसाधनों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिलता है। तीसरा, सिंथेटिक कृषि रसायनों पर निर्भरता कम करने का अवसर मिलता है। चौथा, उचित बाजार और प्रमाणन की स्थिति में जैविक उत्पादों के लिए अलग बाजार अवसर मिल सकते हैं। पांचवां, Organic Farming एक अधिक समग्र और संसाधन-कुशल कृषि प्रणाली विकसित करने में मदद कर सकती है।

क्या धान की Organic Farming हर किसान कर सकता है?

धान की Organic Farming की जा सकती है, लेकिन इसे अपनाने से पहले किसान को अपने खेत की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों का आकलन करना चाहिए। मिट्टी की स्थिति, पानी की उपलब्धता, जैविक खाद की उपलब्धता, श्रम, फसल की किस्म और बाजार—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर योजना बनानी चाहिए। यदि किसान पहली बार जैविक खेती कर रहा है तो कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विभाग या प्रशिक्षित कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा। धान की Organic Farming केवल रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों को हटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मिट्टी, पानी, फसल, जैव विविधता और किसान की अर्थव्यवस्था को एक साथ ध्यान में रखने वाली कृषि पद्धति है।

यदि किसान गुणवत्तापूर्ण बीज का चयन, जैविक खाद का उचित इस्तेमाल, हरी खाद, जैव उर्वरक, संतुलित सिंचाई, समय पर खरपतवार नियंत्रण और Integrated Pest Management जैसी तकनीकों को अपनाता है, तो वह जैविक धान उत्पादन की दिशा में बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकता है।

हालांकि Organic Farming में सफलता के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि प्रबंधन जरूरी है। इसलिए किसी एक तकनीक या इनपुट को हर खेत के लिए समान रूप से प्रभावी मानना उचित नहीं है। किसानों को चाहिए कि वे मिट्टी की जांच, स्थानीय कृषि सलाह और बाजार की मांग को ध्यान में रखकरOrganic Rice Farmingकी योजना बनाएं। सही तकनीक, बेहतर प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव के साथ जैविक धान की खेती भविष्य में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कृषि विकल्प बन सकती है।

 

Tags: Organic Farming
Previous Post

नेशनल टेस्ट हाउस के 115वें स्थापना दिवस पर नई टेस्टिंग सुविधाओं और डिजिटल पहल का शुभारंभ, प्रह्लाद जोशी करेंगे उद्घाटन

Next Post

Organic Sugarcane Farming: नई तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, बेहतर उत्पादन के लिए इन बातों का रखें ध्यान

Next Post
Organic Sugarcane Farming

Organic Sugarcane Farming: नई तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, बेहतर उत्पादन के लिए इन बातों का रखें ध्यान

Recent Posts

  • Organic Sugarcane Farming: नई तकनीक से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, बेहतर उत्पादन के लिए इन बातों का रखें ध्यान
  • धान की Organic Farming कैसे करें? जानिए जैविक तरीके से धान की खेती की पूरी जानकारी, लागत और बेहतर उत्पादन का तरीका
  • नेशनल टेस्ट हाउस के 115वें स्थापना दिवस पर नई टेस्टिंग सुविधाओं और डिजिटल पहल का शुभारंभ, प्रह्लाद जोशी करेंगे उद्घाटन
  • फार्मा और मेडटेक इनोवेशन को नई रफ्तार, ₹5,000 करोड़ की पीआरआईपी योजना के तहत आवेदन का दूसरा मौका
  • UP Farmers News: यूपी के 75 जिलों के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, अब विदेशों में बिकेगी उपज! FPO और निर्यातकों के बीच हुआ बड़ा समझौता

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.