देश में सतत और पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार जैविक और जलवायु-कुशल खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है। इनमें मुख्य रूप से परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन (एमओवीसीडीएनईआर) शामिल हैं।
पीकेवीवाई योजना देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू की जा रही है, जबकि एमओवीसीडीएनईआर योजना विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों के लिए तैयार की गई है। इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, प्रमाणीकरण और विपणन तक संपूर्ण सहयोग देना है, जिससे किसान बिना रासायनिक खादों और कीटनाशकों के सुरक्षित खेती कर सकें और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें।
इन दोनों योजनाओं में लघु और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देते हुए जैविक क्लस्टरों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही, ये योजनाएं प्राकृतिक संसाधन आधारित कृषि को बढ़ावा देती हैं जिसमें जल संरक्षण, पोषक तत्वों की रिसाइक्लिंग और जलवायु-अनुकूल पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाता है।
पीकेवीवाई योजना के तहत किसानों को तीन वर्षों में प्रति हेक्टेयर ₹31,500 की सहायता दी जाती है, जिसमें से ₹15,000 का प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैविक खाद और आदानों के लिए दिया जाता है। वहीं, एमओवीसीडीएनईआर योजना के अंतर्गत किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹46,500 तक की सहायता मिलती है, जिसमें ₹32,500 डीबीटी के रूप में जैविक आदानों के लिए दी जाती है। इन योजनाओं के अंतर्गत किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर भूमि के लिए सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, फसलों को प्राकृतिक आपदाओं या मौसम से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) भी लागू की हैं। ये योजनाएं किसानों के लिए स्वैच्छिक हैं और राज्य सरकारें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इनमें शामिल हो सकती हैं। जहां पीएमएफबीवाई फसल कटाई प्रयोगों पर आधारित है, वहीं RWBCIS मौसम इंडेक्स के आधार पर दावा भुगतान सुनिश्चित करती है।
बाजार से जोड़ने और उत्पाद की ब्रांडिंग के लिए भी विशेष कदम उठाए गए हैं। पीकेवीवाई के तहत विपणन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के लिए प्रति हेक्टेयर ₹4,500 तथा प्रमाणीकरण हेतु ₹3,000 और प्रशिक्षण आदि के लिए ₹9,000 की सहायता दी जा रही है। वहीं, एमओवीसीडीएनईआर के अंतर्गत भी विपणन, प्रशिक्षण और प्रमाणीकरण के लिए प्रति हेक्टेयर ₹14,000 तक की सहायता उपलब्ध है।
सरकार द्वारा ऑर्गेनिक महोत्सव, क्रेता-विक्रेता बैठकें, प्रदर्शनियाँ, और डिजिटल बाजार संपर्क जैसी गतिविधियों के माध्यम से किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जा रहा है। GeM प्लेटफ़ॉर्म और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) जैसे डिजिटल माध्यमों से किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को ऑनलाइन बिक्री की सुविधा भी दी जा रही है।
इन पहलों से यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार जैविक और जलवायु-कुशल खेती को देश की कृषि नीति के केंद्र में लाकर किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण को संरक्षित रखने की दिशा में मजबूत कदम उठा रही है। इससे न केवल खेती की लागत घटेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।

