पंचायती राज मंत्रालय ने स्थानीय शासन को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 रिपोर्ट जारी कर दी है। यह रिपोर्ट 24 अप्रैल को मनाए गए राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रस्तुत की गई, जो देशभर की ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, 3,635 ग्राम पंचायतें ‘फ्रंट रनर’ (अग्रणी) श्रेणी में शामिल हुई हैं, जबकि 1,18,824 पंचायतें ‘परफॉर्मर’ (उत्कृष्ट) श्रेणी में आई हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि ग्रामीण भारत में विकास की गति लगातार तेज हो रही है। विशेष रूप से गरीबी उन्मूलन, आजीविका सृजन और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में पंचायतों ने उल्लेखनीय सुधार किया है।
पीएआई 2.0 की सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी 97.3 प्रतिशत की रिकॉर्ड भागीदारी है। देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 2.59 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने इसमें डेटा प्रस्तुत किया, जो पिछले संस्करण (PAI 1.0) की 80.79% भागीदारी की तुलना में बड़ा सुधार है। यह दर्शाता है कि पंचायतें अब डेटा-आधारित शासन और पारदर्शिता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि गरीबी मुक्त और बेहतर आजीविका के क्षेत्र में 3,313 पंचायतों ने A+ ग्रेड हासिल किया, जबकि स्वस्थ पंचायत थीम के तहत 1,015 पंचायतों को A+ ग्रेड मिला। इन पंचायतों ने पोषण जागरूकता, स्वच्छता, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक सहभागिता में उत्कृष्ट कार्य किया है।
पीएआई 2.0 को पहले से अधिक सरल और प्रभावी बनाया गया है। इसमें 150 संकेतकों और 230 डेटा बिंदुओं के आधार पर पंचायतों का मूल्यांकन किया गया है, जबकि पिछले संस्करण में यह संख्या कहीं अधिक थी। इससे न केवल डेटा की गुणवत्ता बेहतर हुई है, बल्कि पंचायतों के लिए इसे समझना और लागू करना भी आसान हो गया है।
इस संस्करण में कई तकनीकी सुधार भी किए गए हैं, जैसे—एकीकृत डेटा एंट्री फॉर्म, ग्राम सभा द्वारा अनिवार्य सत्यापन, विभिन्न मंत्रालयों के पोर्टलों से ऑटो-डेटा इंटीग्रेशन, और रीयल-टाइम डैशबोर्ड। साथ ही स्थानीय भाषाओं में उपलब्धता ने इसे और अधिक समावेशी बनाया है।
पंचायतों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पांच श्रेणियों—A+ (अचीवर), A (फ्रंट रनर), B (परफॉर्मर), C (एस्पिरेंट) और D (बिगिनर)—में वर्गीकृत किया गया है। इससे राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है और बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतें अन्य के लिए मॉडल बनती हैं।
कुल मिलाकर, पीएआई 2.0 न केवल पंचायतों के प्रदर्शन का आकलन करने का एक मजबूत उपकरण है, बल्कि यह “विकसित ग्राम पंचायत” की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि देश में ग्रामीण विकास अब अधिक पारदर्शी, सहभागी और डेटा-आधारित बनता जा रहा है, जो भविष्य के सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की नींव रखेगा।

