लोगों में बढ़ती विटामिन-डी की कमी की समस्या से निपटने के लिए Punjab Agricultural University ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने विटामिन-डी समृद्ध मशरूम पाउडर तकनीक के व्यावसायीकरण के लिए Agam Earth Foods के साथ समझौता किया है।
इस संबंध में विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक Ajmer Singh Dhatt और अगम अर्थ फूड्स के प्रतिनिधि Ripudaman Singh ने अपने-अपने संस्थानों की ओर से समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत कंपनी को विटामिन-डी समृद्ध मशरूम पाउडर के उत्पादन और विपणन के लिए गैर-विशिष्ट अधिकार प्रदान किए गए हैं।
इस अवसर पर अतिरिक्त अनुसंधान निदेशक (कृषि एवं बागवानी) G. S. Mangat, अतिरिक्त अनुसंधान निदेशक (कृषि इंजीनियरिंग) Mahesh Kumar, कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस की अनुसंधान समन्वयक Deepika Vig तथा टेक्नोलॉजी मार्केटिंग एवं आईपीआर सेल के एसोसिएट डायरेक्टर Khushdeep Dharni भी उपस्थित रहे।
डॉ. अजरमेर सिंह धत्त ने इस तकनीक के विकास और व्यावसायीकरण के लिए खाद्य एवं पोषण विभाग की प्रोफेसर Sonika Sharma और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह तकनीक पोषण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या के समाधान में उपयोगी साबित हो सकती है।
डॉ. सोनिका शर्मा ने बताया कि मशरूम ऐसा एकमात्र शाकाहारी खाद्य पदार्थ है जिसमें प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी पाया जाता है। यदि मशरूम को पराबैंगनी (यूवी) किरणों या सूर्य के प्रकाश में रखा जाए तो इसमें विटामिन-डी की मात्रा काफी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के बाद मशरूम में विटामिन-डी की मात्रा लगभग 400 गुना तक बढ़ सकती है।
उन्होंने आगे बताया कि यूवी उपचारित बटन और ऑयस्टर मशरूम से तैयार पाउडर प्रोटीन, फाइबर और आयरन, कॉपर, फॉस्फोरस, पोटैशियम, जिंक तथा सेलेनियम जैसे खनिज तत्वों से भरपूर होता है। इस प्रकार का मशरूम पाउडर विटामिन-डी की कमी से जूझ रही आबादी के लिए एक उपयोगी खाद्य विकल्प बन सकता है और शरीर में विटामिन-डी स्तर बढ़ाने में मदद कर सकता है।
डॉ. शर्मा के अनुसार सर्दियों के मौसम में मशरूम का उत्पादन अधिक होता है, लेकिन यह जल्दी खराब होने वाली फसल है। ऐसे में इसके प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की आवश्यकता होती है, ताकि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके और पूरे वर्ष उपयोग में लाया जा सके। इससे किसानों को भी बेहतर आय प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
टेक्नोलॉजी मार्केटिंग एवं आईपीआर सेल के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. खुशदीप धरनी ने कहा कि यह तकनीक स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक को पहले भी कई बार व्यावसायिक स्तर पर अपनाया जा चुका है और इसकी उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मशरूम आधारित ऐसे नवाचार न केवल पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक होंगे, बल्कि कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

