केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के माध्यम से मछली उत्पादन और मत्स्य पालन क्षेत्र में व्यापक सुधार कर मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में कदम उठा रही है। यह योजना उत्पादन, उत्पादकता, गुणवत्ता, तकनीक, पश्च-उत्पादन अवसंरचना, मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और मछुआरों के कल्याण पर केंद्रित है।
बीते पांच वर्षों (2020-21 से 2024-25) में मछली उत्पादन 141.64 लाख टन (2019-20) से बढ़कर 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है। इसी अवधि में मत्स्य निर्यात भी बढ़कर Rs.46,666 करोड़ (2019-20) से Rs.62,408 करोड़ (2024-25) हो गया है। यह वृद्धि सीधे तौर पर मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय में इजाफे में योगदान दे रही है।
जलवायु परिवर्तन के अनुकूल मत्स्य पालन
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत मत्स्य अनुसंधान संस्थान नियमित रूप से जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और टिकाऊ, जलवायु-प्रतिरोधी मत्स्य पालन रणनीतियों पर शोध कर रहे हैं। ICAR-सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टिट्यूट (CMFRI) की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार भारत के 91.1% समुद्री मत्स्य भंडार स्वस्थ स्थिति में हैं।
केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग ने क्लाइमेट रेसिलिएंट कोस्टल फिशरमेन विलेज (CRCFV) प्रोग्राम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य तटीय मछुआरों के लिए टिकाऊ आर्थिक और आजीविका के अवसर पैदा करना है। इस कार्यक्रम के तहत मछली सुखाने के यार्ड, प्रसंस्करण केंद्र, मछली बाजार, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, फिशिंग जेट्टी और तटीय सुरक्षा कार्य जैसी अवसंरचनाएं विकसित की जा रही हैं। साथ ही सीवीड (समुद्री शैवाल) उत्पादन, आर्टिफिशियल रीफ और हरित ईंधन का उपयोग जैसी जलवायु-प्रतिरोधी मत्स्य गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
नदी और समुद्री मछली भंडार बढ़ाने के उपाय
मछली भंडार को बढ़ाने के लिए सरकार रिवर रैंचिंग और सी रैंचिंग का समर्थन भी कर रही है। इससे मत्स्य संसाधनों का स्थायी प्रबंधन और उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित होगी।
पशुपालन में राज्य सहयोग और पशु कल्याण
पशुपालन राज्य का विषय है और दूरदराज तथा जनजातीय क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न दिशानिर्देश और सहायता प्रदान कर रही है।
- पशु चिकित्सा अवसंरचना के न्यूनतम मानक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को लागू करने के लिए भेजे गए हैं।
- चार प्रमुख बीमारियों (FMD, Brucellosis, PPR, CSF) के लिए टीकाकरण SOP जारी की गई है।
- पशुओं के पंजीकरण और ईयर टैगिंग, वैक्सीन प्रशासन और डेटा अपलोडिंग के SOP भी राज्यों को भेजे गए हैं।
- योजना के तहत इन चार बीमारियों के टीकाकरण के लिए 100% केंद्रीय सहायता दी जाती है, जिसमें गुणवत्ता वाले टीके की केंद्रीय खरीद और वितरण भी शामिल है।
- ASCAD योजना के तहत राज्य-प्राथमिकता वाले पशु रोगों के नियंत्रण और रोकथाम के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान किया जाता है।
- 4019 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां (MVUs) 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में किसानों के द्वार पर सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
इन व्यापक पहलों से मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मछुआरों और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण और तटीय समुदायों की जीवन गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

