भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu 13 से 16 अप्रैल 2026 तक गुजरात और महाराष्ट्र के चार दिवसीय दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वे शिक्षा, सामाजिक समरसता और प्रशासनिक प्रशिक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेंगी। राष्ट्रपति का यह दौरा विभिन्न संस्थानों के दीक्षांत समारोहों और राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों पर केंद्रित रहेगा।
अपने दौरे की शुरुआत 13 अप्रैल को गुजरात के राजकोट से होगी, जहां राष्ट्रपति अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में वे नवस्नातक डॉक्टरों को संबोधित करेंगी और उन्हें देश की स्वास्थ्य सेवा में योगदान देने के लिए प्रेरित करेंगी। एम्स जैसे संस्थानों का विस्तार देश में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
14 अप्रैल को राष्ट्रपति गांधीनगर में आयोजित ‘सामाजिक समरसता महोत्सव’ में भाग लेंगी। यह आयोजन B. R. Ambedkar की जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में समानता, भाईचारा और सामाजिक न्याय के मूल्यों को बढ़ावा देना है। राष्ट्रपति का इस आयोजन में शामिल होना इन मूल्यों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उसी दिन राष्ट्रपति गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में भी शिरकत करेंगी। यहां वे सुरक्षा और रणनीतिक अध्ययन के क्षेत्र में प्रशिक्षित हो रहे छात्रों को संबोधित करेंगी। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ तैयार करने वाला प्रमुख संस्थान है।
15 अप्रैल को राष्ट्रपति महाराष्ट्र के नागपुर पहुंचेंगी, जहां वे एम्स नागपुर के द्वितीय दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। इस अवसर पर वे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व पर अपने विचार रखेंगी। इसके बाद वे नागपुर स्थित राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी में भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के प्रशिक्षु अधिकारियों के 78वें बैच के विदाई समारोह में भी उपस्थित रहेंगी। यहां वे नए अधिकारियों को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ देश की सेवा करने का संदेश देंगी।
अपने दौरे के अंतिम दिन, 16 अप्रैल को राष्ट्रपति वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में वे हिंदी भाषा के प्रसार और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डालेंगी।
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह दौरा शिक्षा, सामाजिक समरसता और प्रशासनिक सुदृढ़ता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभिन्न दीक्षांत समारोहों में उनकी उपस्थिति न केवल छात्रों और प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए प्रेरणादायक होगी, बल्कि देश के विकास में इन संस्थानों की भूमिका को भी मजबूती प्रदान करेगी।

