आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के दौर में खेती-किसानी भी डिजिटल हो रही है। अब फसलों की जुताई, बुआई और कटाई जैसे कामों में स्वचालित मशीनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसी कड़ी में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने एक नई तकनीक विकसित की है, जो किसानों की मेहनत कम करने के साथ-साथ खेती को और भी किफायती बनाएगी।
क्या है यह नई तकनीक?
PAU ने ड्राइवर-असिस्टेड ट्रैक्टर सिस्टम तैयार किया है, जो सेटेलाइट नेविगेशन की मदद से खुद ही खेतों में जुताई कर सकता है। इसे GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम) तकनीक पर आधारित बनाया गया है, जिसमें GPS, आईपैड और सेंसर्स का इस्तेमाल होता है।
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
मैपिंग: किसान को सबसे पहले अपने खेत की मैपिंग टैबलेट या आईपैड पर करनी होगी।
ऑटो-स्टीयरिंग: एक बार मैपिंग हो जाने के बाद, ट्रैक्टर खुद ही खेत में चलकर जुताई करेगा।
मैनुअल/ऑटोमैटिक मोड: किसान चाहे तो इसे मैनुअल मोड में भी चला सकता है।
क्या हैं इसके फायदे?
✔ कम मेहनत: किसानों को घंटों ट्रैक्टर चलाने की जरूरत नहीं होगी।
✔ ईंधन की बचत: सिस्टम फिक्स स्पीड पर काम करता है, जिससे डीजल की खपत कम होती है।
✔ पर्यावरण अनुकूल: कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
✔ सटीक खेती: खेत की जुताई एक समान होगी, जिससे उपज बेहतर होगी।
कितनी आएगी लागत?
फिलहाल इस सिस्टम की कीमत 3-4 लाख रुपये है, क्योंकि इसके कुछ पार्ट्स विदेश से आयात किए जाते हैं। हालांकि, भविष्य में स्थानीय उत्पादन शुरू होने पर इसकी कीमत कम हो सकती है।
किस तरह के ट्रैक्टर में लगेगा?
यह सिस्टम हर प्रकार के ट्रैक्टर में लगाया जा सकता है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा। इसे रोटावेटर, हल, सीड ड्रिल, स्प्रेयर जैसे कृषि उपकरणों के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
PAU के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसल के मुताबिक, “यह तकनीक किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। इससे न केवल समय और पैसा बचेगा, बल्कि खेती की दक्षता भी बढ़ेगी।”

