भारतीय सूक्ष्म उर्वरक निर्माता संघ (IMMA) 2 अगस्त 2025 को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में ‘आईएमएमए बी2जी राउंडटेबल 2025’ का आयोजन करने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण आयोजन का थीम है – “इनोवेट, रेगुलेट, एलिवेट: भारत के उर्वरक भविष्य को आकार देना”, जो देश के गैर-सब्सिडी वाले उर्वरक क्षेत्र के लिए नीतिगत व नियामक सुधारों पर एक निर्णायक संवाद को दिशा देगा।
इस कार्यक्रम में केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान मंत्ररालय के वरिष्ठ अधिकारी, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य स्तर के नियामक, आईएमएमए से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ और शोध संस्थानों के सदस्य हिस्सा लेंगे।
राउंडटेबल में छह प्रमुख विषयों पर गहन चर्चा होगी:
- नवाचार आधारित उर्वरक और गैर-सब्सिडी सूक्ष्म पोषक तत्वों की गुणवत्ता
- नकली उत्पादों पर लगाम के लिए आईएमएमए कंपनियों द्वारा स्वैच्छिक उपाय
- केंद्रीय लाइसेंस पोर्टल और व्यापार सुगमता में सुधार
- जैव-उत्तेजकों के नियमन को जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप बनाना
- गैर-सब्सिडी उर्वरकों से जुड़े कानूनों का अपराधीकरण समाप्त करना
- आयात-निर्यात नीति में उदारीकरण
इस दौरान आईएमएमए अध्यक्ष डॉ. राहुल मिरचंदानी ने कहा, “यह राउंडटेबल केवल संवाद नहीं बल्कि ठोस नीति सुधारों की ओर एक निर्णायक कदम है। अब समय आ गया है कि हम पुराने अनुपालन ढांचे को छोड़कर डिजिटल और किसान-हितैषी नवाचार आधारित नीति को अपनाएं। इससे भारत वैश्विक पोषक समाधान का केंद्र बन सकता है।”
आईएमएमए उपाध्यक्ष समीर पथारे ने कहा,
“हमारा उद्देश्य है कि असली निर्माताओं को मजबूती मिले और किसान गुणवत्तापूर्ण व प्रमाणिक उत्पादों तक पहुंच सकें। इसके लिए पारदर्शी और ट्रेस करने योग्य व्यवस्था जरूरी है। भारत की निर्यात क्षमता को unlock करने के लिए अब नीति-निर्माताओं को तेजी से कदम उठाने होंगे।”
IMMA के अध्यक्ष डॉ. राहुल मिरचंदानी ने कुछ विशेष बिंदुओं पर ज़ोर देते हुए बताया कि
- मिट्टी के अनुसार उर्वरक: “राज्य द्वारा अधिसूचित स्थिर ग्रेड अब अप्रासंगिक हो चुके हैं। किसानों को अब रियल-टाइम मिट्टी परीक्षण पर आधारित मल्टी-न्यूट्रिएंट ब्लेंड्स की जरूरत है।”
- नकली उर्वरकों पर रोक: “स्मार्ट लेबलिंग और QR-कोड आधारित ट्रेसिंग से ब्रांड की विश्वसनीयता और किसानों का विश्वास बचाया जा सकता है।”
- डिजिटल लाइसेंसिंग पोर्टल: “एकीकृत और फेसलेस डिजिटल पोर्टल से नवाचार उत्पाद तेजी से बाजार में आ सकेंगे और करोड़ों रुपये की बचत होगी।”
इस मौके पर समीर पथारे ने कहा, “गैर-सब्सिडी उर्वरकों को अब आवश्यक वस्तु की तरह न देखा जाए। अब समय है कि हम दंडात्मक कार्रवाई की जगह जोखिम आधारित अनुपालन व्यवस्था अपनाएं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत को वैश्विक मांग को ध्यान में रखते हुए अपने उच्च गुणवत्ता वाले माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और स्पेशलिटी उर्वरकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए तेजी से कदम उठाने चाहिए।
यह दिनभर चलने वाला राउंडटेबल कार्यक्रम एक खुले मंच के साथ समाप्त होगा, जिसमें सरकार को नीति सुझावों का एक साझा रोडमैप प्रस्तुत किया जाएगा।

