भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने 30 अप्रैल 2026 को हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित ICAR-डायरेक्टरेट ऑफ मशरूम रिसर्च का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में चल रहे अनुसंधान कार्यों, उत्पादन प्रणालियों और तकनीकी सुविधाओं का गहन निरीक्षण किया तथा वैज्ञानिकों और हितधारकों के साथ संवाद स्थापित कर मशरूम क्षेत्र के विकास को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
अपने दौरे के दौरान डॉ. जाट ने मशरूम क्रॉपिंग रूम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और स्पॉन (बीज) उत्पादन इकाई का निरीक्षण किया। उन्होंने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की जा रही नई तकनीकों, उन्नत किस्मों और उत्पादन पद्धतियों की प्रगति का मूल्यांकन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान को वास्तविक प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है कि वह किसानों की जरूरतों और जमीनी चुनौतियों के अनुरूप हो।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “विज्ञान को खेत का नेतृत्व करने से पहले उसकी आवाज को समझना होगा। जब तक अनुसंधान किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखकर नहीं किया जाएगा, तब तक उसका वास्तविक लाभ खेतों तक नहीं पहुंच पाएगा।”
दौरे के दौरान मशरूम उत्पादकों और अन्य हितधारकों के साथ एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन भी किया गया। इस बैठक में किसानों, उद्यमियों और विशेषज्ञों ने उत्पादन, कटाई के बाद प्रबंधन, प्रोसेसिंग और विपणन से जुड़ी समस्याओं और संभावनाओं पर खुलकर चर्चा की। किसानों ने विशेष रूप से बाजार तक पहुंच, भंडारण सुविधाओं की कमी और मूल्य संवर्धन की जरूरतों को प्रमुख मुद्दों के रूप में रखा।
डॉ. जाट ने इन सुझावों को गंभीरता से लेते हुए वैज्ञानिकों को निर्देश दिए कि वे मांग-आधारित अनुसंधान (Demand-driven research) पर अधिक ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से मशरूम क्षेत्र की समस्याओं का समाधान खोजा जा सकता है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
इसके बाद उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों, तकनीकी स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के साथ भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अनुसंधान को और अधिक व्यावहारिक, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दिया। उन्होंने संस्थान को निर्देशित किया कि वह नवाचार, सहयोग और विस्तार सेवाओं को मजबूत करे ताकि विकसित तकनीकों का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे।
डॉ. जाट ने कहा कि मशरूम उत्पादन एक तेजी से उभरता हुआ कृषि क्षेत्र है, जो कम जमीन और कम संसाधनों में अधिक आय देने की क्षमता रखता है। ऐसे में इस क्षेत्र में अनुसंधान और तकनीकी विकास को और अधिक गति देने की आवश्यकता है, ताकि इसे ग्रामीण आजीविका का सशक्त माध्यम बनाया जा सके।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ICAR का मुख्य उद्देश्य केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है। इसके लिए अनुसंधान, नवाचार और तकनीक को खेतों तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
यह दौरा ICAR की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें जरूरत-आधारित अनुसंधान और सतत कृषि विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। डॉ. जाट के इस संदेश से यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में कृषि अनुसंधान को और अधिक किसान-केंद्रित और व्यावहारिक बनाया जाएगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
इस प्रकार, सोलन स्थित मशरूम अनुसंधान निदेशालय का यह दौरा न केवल संस्थान के कार्यों की समीक्षा तक सीमित रहा, बल्कि इसने कृषि अनुसंधान के भविष्य की दिशा को भी स्पष्ट किया, जहां विज्ञान और खेत के बीच सीधा संवाद ही विकास की कुंजी बनेगा।

