देश के कई राज्यों में गेहूं की कटाई पूरी होने के बाद अब किसान खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की तैयारी में जुट गए हैं। धान भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसलों में से एक है और इसकी अच्छी पैदावार किसानों की आय से सीधे जुड़ी होती है। लेकिन अक्सर यह देखा जाता है कि धान की नर्सरी तैयार होने के कुछ समय बाद ही फसल में विभिन्न प्रकार की बीमारियां लगने लगती हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है और किसानों की लागत बढ़ जाती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान की अच्छी और रोगमुक्त फसल के लिए बुवाई से पहले बीज शोधन करना बेहद जरूरी है। यदि किसान बीज बोने से पहले उसका सही तरीके से उपचार कर लें, तो फसल को कई प्रकार की खतरनाक बीमारियों से बचाया जा सकता है। खास बात यह है कि इसके लिए किसानों को अधिक खर्च करने की जरूरत नहीं होती, बल्कि साधारण नमक और कुछ फफूंदनाशी दवाओं की मदद से ही बीज शोधन आसानी से किया जा सकता है।
क्यों जरूरी है बीज शोधन
धान की फसल में लगने वाली कई बीमारियां बीज और मिट्टी के माध्यम से फैलती हैं। यदि संक्रमित या कमजोर बीज खेत में बो दिए जाएं, तो पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बीज शोधन करने से कमजोर और खराब बीज अलग हो जाते हैं, जबकि स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण बीज ही बुवाई के लिए बचते हैं। इससे अंकुरण अच्छा होता है, पौधे मजबूत बनते हैं और फसल की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है।
सहारनपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान बीज शोधन का एक बेहद आसान और सस्ता तरीका बताया है, जो छोटे और बड़े सभी किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
नमक के पानी से करें बीज शोधन
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान बीज शोधन के लिए नमक का पानी सबसे आसान और प्रभावी तरीका माना जाता है। इसके लिए किसान साधारण नमक, डली वाला नमक या सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं।
यदि किसान के पास 10 किलो धान का बीज है, तो वह लगभग 10 लीटर पानी में करीब 200 ग्राम नमक घोल लें। इसके बाद धान के बीज को इस पानी में डालकर कुछ देर तक अच्छी तरह हिलाएं।
इस प्रक्रिया के दौरान खराब और हल्के बीज पानी के ऊपर तैरने लगते हैं, जबकि स्वस्थ और भारी बीज नीचे बैठ जाते हैं। ऊपर तैरने वाले बीजों को निकालकर अलग कर देना चाहिए, क्योंकि ये कमजोर या रोगग्रस्त हो सकते हैं। वहीं नीचे बैठा हुआ बीज बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार तैयार किए गए नमक के घोल में लगभग 30 किलो तक बीज का शोधन किया जा सकता है। इसके बाद नया घोल तैयार करना चाहिए।
डेढ़ क्विंटल बीज का भी हो सकता है उपचार
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, किसान मात्र 1 किलो नमक की मदद से लगभग डेढ़ क्विंटल धान बीज का शोधन कर सकते हैं। इसके लिए बीज को नमक वाले पानी में करीब 24 घंटे तक रखा जाता है।
24 घंटे बाद ऊपर तैरने वाले बीजों को हटाकर नीचे बैठे स्वस्थ बीज को अलग निकाल लिया जाता है। यही बीज नर्सरी या खेत में बुवाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
इस प्रक्रिया से न केवल बीज की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि फसल में रोग लगने की संभावना भी काफी कम हो जाती है।
फफूंदनाशी दवाओं का भी करें उपयोग
विशेषज्ञों का कहना है कि धान की कई बीमारियां मिट्टी के माध्यम से फैलती हैं। इनसे बचाव के लिए नमक के पानी के साथ कुछ फफूंदनाशी दवाओं का उपयोग भी किया जा सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा के अनुसार, किसान नमक वाले पानी में प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम की दर से कार्बेंडाजिम और मैनकोजेब मिला सकते हैं।
इसके बाद बीज को इस घोल में लगभग 24 घंटे तक रखने के बाद बुवाई करनी चाहिए। ऐसा करने से बीज और पौधे कई प्रकार की फफूंद जनित बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं।
कार्बेंडाजिम और मैनकोजेब दोनों ही प्रभावी फफूंदनाशी दवाएं हैं, जिनका उपयोग लंबे समय से कृषि क्षेत्र में किया जा रहा है।
इन बीमारियों से मिलता है बचाव
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बीज शोधन से धान में लगने वाली कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है। इनमें बकानी रोग, लीफ स्पॉट और मिट्टी जनित रोग प्रमुख हैं।
यदि बीज का उपचार नहीं किया जाए, तो ये बीमारियां शुरुआती अवस्था में ही पौधों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे उत्पादन घट जाता है।
बीज शोधन के बाद पौधे अधिक स्वस्थ और मजबूत बनते हैं। उनकी जड़ें अच्छी विकसित होती हैं और पौधे मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को भी बेहतर तरीके से सहन कर पाते हैं।
किसानों की लागत भी होगी कम
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान शुरुआत में ही बीज शोधन कर लें, तो बाद में फसल पर रोग नियंत्रण के लिए अधिक दवाइयों का उपयोग करने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे खेती की लागत कम होती है और उत्पादन बेहतर मिलता है।
आज के समय में खेती की बढ़ती लागत किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में कम खर्च में फसल सुरक्षा का यह तरीका किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकता है।
वैज्ञानिक तरीके से करें खेती
कृषि विभाग और वैज्ञानिक लगातार किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। धान की खेती में बीज शोधन एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
यदि किसान बुवाई से पहले बीज का सही तरीके से उपचार करें और संतुलित पोषण व समय पर सिंचाई का ध्यान रखें, तो धान की बेहतर और रोगमुक्त फसल प्राप्त की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सलाह अपनाकर किसान न केवल उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि खेती को अधिक लाभकारी भी बना सकते हैं।


