देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई को लेकर ताज़ा आंकड़े सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि इस वर्ष किसानों ने कई फसलों में बेहतर प्रगति दर्ज की है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 17 अप्रैल 2026 तक कुल 69.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 66.14 लाख हेक्टेयर की तुलना में 2.92 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह वृद्धि किसानों के बढ़ते उत्साह और अनुकूल कृषि परिस्थितियों का संकेत देती है।
हालांकि धान की बुवाई में इस बार हल्की गिरावट देखने को मिली है। चालू वर्ष में 30.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 32.31 लाख हेक्टेयर था। यानी करीब 1.66 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल की उपलब्धता और मौसम की अनिश्चितताओं के कारण किसानों ने धान की बजाय अन्य फसलों की ओर रुख किया है।
इसके विपरीत दलहन फसलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वर्ष अब तक 15.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष के 13.49 लाख हेक्टेयर से लगभग 1.99 लाख हेक्टेयर अधिक है। हरा चना और काला चना दोनों ही फसलों में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली है। हरे चने का क्षेत्र 11.73 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि काले चने की बुवाई 3.45 लाख हेक्टेयर में हुई है।
श्री अन्न (मोटे अनाज) के अंतर्गत भी किसानों का रुझान बढ़ता दिखाई दे रहा है। कुल 13.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इन फसलों की बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 1.10 लाख हेक्टेयर अधिक है। खासकर मक्का की खेती में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो 8.46 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। इसके अलावा बाजरा, ज्वार और रागी जैसी फसलों में भी हल्की बढ़त देखी गई है।
तिलहन फसलों ने इस वर्ष सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। कुल 9.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन की बुवाई की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.49 लाख हेक्टेयर अधिक है। मूंगफली की खेती में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है, जो 5.51 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। इसके अलावा सूरजमुखी और तिल की बुवाई में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई में इस वर्ष सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है। धान को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख फसल समूहों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नीतियां, बेहतर बीज उपलब्धता, और किसानों की जागरूकता इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।
आगे आने वाले दिनों में यदि मौसम अनुकूल रहता है और सिंचाई सुविधाएं सुचारु बनी रहती हैं, तो उत्पादन में भी अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती प्रदान करेगा।

