भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारत-कोरिया व्यापार मंच में दोनों देशों के नेताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में 16 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 1.4 अरब की आबादी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, जो वैश्विक विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि भारत और कोरिया के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं, खासकर तब जब व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को और मजबूत किया जा रहा है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने इस मंच को संबोधित करते हुए भारत-कोरिया औद्योगिक सहयोग समिति के गठन को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह समिति व्यापार, उद्योग, रणनीतिक संसाधन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे चार प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देगी।
श्री गोयल ने बताया कि दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 27 अरब डॉलर से बढ़ाकर 54 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसके लिए करीब 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर आवश्यक होगी। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य दोनों देशों की वास्तविक क्षमता का केवल एक हिस्सा दर्शाता है और आने वाले समय में सहयोग के और बड़े अवसर सामने आएंगे।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और राष्ट्रपति ली जे म्युंग के बीच भारत में कोरियाई कंपनियों के लिए एक विशेष औद्योगिक टाउनशिप (कोरियन एन्क्लेव) स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। इस टाउनशिप को ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिसमें अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा होगा और निवेशकों को तुरंत काम शुरू करने की सुविधा मिलेगी। इससे भारत में कोरियाई निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
श्री गोयल ने यह भी बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में 38 विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ नौ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिससे वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान हुई है। कोरियाई कंपनियां इन समझौतों का लाभ उठाकर भारत के जरिए वैश्विक बाजारों तक अपनी पहुंच मजबूत कर सकती हैं।
दोनों देशों ने यह भी सहमति जताई कि CEPA को और उन्नत किया जाएगा, जिसमें गैर-शुल्क बाधाओं को कम करना, बाजार पहुंच बढ़ाना और व्यापार करने में सुगमता लाना शामिल होगा। इससे व्यापार संतुलन बेहतर होगा और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिलेगा।
तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में भी बड़ी संभावनाएं सामने आई हैं। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, उन्नत विनिर्माण, ई-मोबिलिटी, हरित ऊर्जा, जहाज निर्माण और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं। दोनों देश सह-उत्पादन, सह-डिजाइन और सह-नवाचार के माध्यम से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी उत्पाद और सेवाएं देने की दिशा में काम करेंगे।
भारत की आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए श्री गोयल ने कहा कि वर्तमान में 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने इसे वैश्विक निवेशकों के लिए एक सुनहरा अवसर बताया।
इस पूरे आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह सहयोग दोनों देशों की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

