किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन करने और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने महाराष्ट्र के परभणी स्थित वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ (वीएनएमकेवी) में अत्याधुनिक कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर (सीआईसी) का उद्घाटन किया। यह केंद्र भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की वित्तीय सहायता से स्थापित किया गया है और इसका उद्देश्य किसानों, स्टार्टअप्स, युवाओं तथा उद्यमियों को आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देना है।
इस परियोजना का क्रियान्वयन वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ और महाराष्ट्र सरकार के कृषि विभाग की राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी के सहयोग से किया गया है। उद्घाटन के बाद विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती दीक्षांत समारोह हॉल में छात्रों, किसानों और उद्यमियों के साथ एक विशेष संवाद एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें केंद्रीय मंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की संभावनाओं और सरकार की विभिन्न योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
खाद्य प्रसंस्करण से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और आज भी करोड़ों लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है। ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कृषि उत्पादों का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन करना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और आज कई कृषि उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। अब आवश्यकता इस बात की है कि किसानों की उपज को सीधे कच्चे रूप में बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण कर अधिक मूल्य वाले उत्पाद तैयार किए जाएं, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल सकें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर बनेगा नवाचार और उद्यमिता का केंद्र
चिराग पासवान ने कहा कि परभणी में स्थापित यह आधुनिक कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर युवाओं, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों और किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। यहां खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी आधुनिक मशीनें, परीक्षण सुविधाएं और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे नए उद्यम शुरू करने में आसानी होगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे केंद्र किसानों को अपनी उपज का मूल्य बढ़ाने, नए उत्पाद विकसित करने और उन्हें बाजार तक पहुंचाने में मदद करेंगे। इससे कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
भंडारण और प्रसंस्करण से मिलेगी बेहतर कीमत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश के अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत है और सीमित संसाधनों के कारण उन्हें अपनी उपज तुरंत बेचनी पड़ती है। पर्याप्त भंडारण सुविधाओं के अभाव में कई बार किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा कि यदि किसानों के पास भंडारण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों तो वे अपनी उपज का मूल्य कई गुना बढ़ा सकते हैं। इसलिए सरकार किसानों की क्षमता बढ़ाने और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मजबूत बनाने के लिए लगातार योजनाएं लागू कर रही है।
खाद्य अपशिष्ट कम करने का सबसे प्रभावी उपाय
अपने संबोधन में चिराग पासवान ने खाद्य अपशिष्ट को देश के सामने एक गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बड़ी मात्रा में फल, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद उचित प्रसंस्करण एवं भंडारण सुविधाओं के अभाव में खराब हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है। यदि कृषि उत्पादों का समय पर प्रसंस्करण किया जाए तो उनकी उपयोगिता बढ़ती है, किसानों को अधिक आय मिलती है और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध होते हैं।
युवाओं से रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने की अपील
केंद्रीय मंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का समय उद्यमिता का है। उन्होंने युवाओं से नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में अपार संभावनाएं हैं और सरकार उत्पादन से लेकर ब्रांडिंग, पैकेजिंग तथा विपणन तक विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उद्यमियों को सहयोग प्रदान कर रही है। ऐसे में युवा आधुनिक तकनीक और नवाचार का उपयोग कर सफल उद्योग स्थापित कर सकते हैं।
महाराष्ट्र की उपलब्धियों की सराहना
चिराग पासवान ने महाराष्ट्र सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारीकरण योजना (PMFME) के क्रियान्वयन में महाराष्ट्र ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कई नई पहलें शुरू हुई हैं, जिनका लाभ किसानों और छोटे उद्यमियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस क्षेत्र को और मजबूत बनाएंगे।
जैविक खेती और गुणवत्ता पर दिया विशेष बल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करनी होगी और जैविक एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना होगा।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में वही उत्पाद लंबे समय तक टिकते हैं जो गुणवत्ता के उच्च मानकों पर खरे उतरते हैं। इसलिए किसानों, उद्योगों और उद्यमियों को गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहिए।
छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी सफल ब्रांड की सबसे बड़ी पहचान उसकी गुणवत्ता होती है। वर्षों की मेहनत से बनाई गई प्रतिष्ठा कुछ समय के लाभ के लिए गुणवत्ता से समझौता करने पर क्षणभर में समाप्त हो सकती है। इसलिए प्रत्येक उत्पाद को उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ बाजार में उतारना आवश्यक है।
“मेड इन इंडिया” उत्पादों को बनाना होगा वैश्विक पहचान
चिराग पासवान ने कहा कि “मेड इन इंडिया” केवल एक लेबल नहीं बल्कि गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उत्कृष्टता का प्रतीक बनना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय किसान और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मिलकर देश को विश्व का प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक बना सकते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को दोहराया कि भारत में दुनिया का खाद्य भंडार बनने की क्षमता मौजूद है और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कृषि शिक्षा और अनुसंधान की भूमिका महत्वपूर्ण
अपने संबोधन के अंत में केंद्रीय मंत्री ने वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और कृषि विस्तार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
उन्होंने विश्वविद्यालय, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और कृषि विभाग से आह्वान किया कि वे नवाचार, अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों को अधिक सक्षम बनाएं तथा कृषि क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत करें। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर किसानों, युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा तथा कृषि आधारित उद्योगों को नई गति प्रदान करेगा।

