भारत में मक्का (Maize) क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं, चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा के लिए आयोजित “12th India Maize Summit 2026” में कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और किसानों ने एक मंच पर आकर मक्का मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने पर व्यापक मंथन किया। नई दिल्ली स्थित एफआईसीसीआई (FICCI) में आयोजित इस शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय था – “Transforming Maize Value Chain: Productivity, Innovation and Technology for Farmers”।
कार्यक्रम की शुरुआत पंजीकरण और चाय सत्र के साथ हुई, जिसके बाद उद्घाटन सत्र में मक्का क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। एफआईसीसीआई कृषि समिति के सह-अध्यक्ष एवं कॉर्टेवा एग्रीसाइंस के अध्यक्ष (दक्षिण एशिया) सुब्रतो गीद ने स्वागत संबोधन में कहा कि भारत में मक्का केवल खाद्यान्न नहीं बल्कि पशु आहार, एथेनॉल, स्टार्च उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण के लिए भी तेजी से उभरती फसल बन चुका है। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और मजबूत बाजार प्रणाली पर जोर दिया।
सम्मेलन के दौरान “Maize Sector in India – Navigating Transformation in Demand-Supply Dynamics” विषय पर एक महत्वपूर्ण ज्ञान रिपोर्ट भी जारी की गई। यस बैंक के राष्ट्रीय प्रमुख (FASAR) श्री संजय वुप्पुलुरी ने रिपोर्ट के मुख्य बिंदु प्रस्तुत करते हुए बताया कि भारत में मक्का की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन और आपूर्ति तंत्र में कई चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। उन्होंने बेहतर पूर्वानुमान प्रणाली, डिजिटल कृषि और मूल्य श्रृंखला में निजी निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
आईसीएआर-भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (IIMR) के निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवाले ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में मक्का की उत्पादकता बनाए रखने के लिए अनुसंधान आधारित खेती, उन्नत किस्में और टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाना बेहद जरूरी है। वहीं कृषि आयुक्त डॉ. पी. के. सिंह ने सरकार की योजनाओं और मक्का उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी।
सम्मेलन में प्रगतिशील मक्का किसानों को सम्मानित भी किया गया तथा एफआईसीसीआई और आईआईएमआर के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि सरकार किसानों को तकनीक, बाजार और बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने मक्का को भविष्य की रणनीतिक फसल बताते हुए कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम और पशु आहार उद्योग में बढ़ती मांग किसानों के लिए नए अवसर पैदा करेगी।
शिखर सम्मेलन में आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों में मक्का क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। पहले सत्र “From Volatility to Visibility” में मांग और आपूर्ति के बेहतर पूर्वानुमान, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली और जोखिम प्रबंधन पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि मौसम और बाजार की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए आधुनिक डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाना होगा।
दूसरे सत्र “Strengthening the Maize Seed Supply Chain” में गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, जलवायु अनुकूल हाइब्रिड बीजों के विकास और बीज वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाने पर विचार साझा किए गए। विशेषज्ञों ने माना कि किसानों तक समय पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज पहुंचाना उत्पादन बढ़ाने की सबसे बड़ी कुंजी है।
तीसरे सत्र “Innovation to Bridge the Gap Between Crop Yield Potential and Reality” में खेत स्तर पर उत्पादकता बढ़ाने के लिए नवाचार आधारित समाधानों पर चर्चा हुई। इसमें प्रिसिजन फार्मिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आधुनिक मशीनरी, उन्नत पोषण प्रबंधन और रोग नियंत्रण उपायों को अपनाने की आवश्यकता बताई गई। वक्ताओं ने कहा कि भारत में मक्का की संभावित उत्पादकता और वास्तविक उत्पादन के बीच बड़ा अंतर है, जिसे तकनीक आधारित खेती से कम किया जा सकता है।
इसके बाद “Post Harvest Management for Maize Value Chain” विषय पर आयोजित सत्र में भंडारण, ड्राइंग, ग्रेडिंग और प्रसंस्करण अवसंरचना को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए आधुनिक वेयरहाउसिंग और विकेंद्रीकृत सप्लाई चेन की जरूरत है। इससे किसानों को बेहतर दाम और उद्योगों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकेगा।
सम्मेलन में देश-विदेश की कई प्रमुख कंपनियों, कृषि संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने माना कि भारत में मक्का क्षेत्र तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और यदि अनुसंधान, तकनीक, बाजार एवं नीति स्तर पर समन्वित प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक मक्का बाजार में मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
कार्यक्रम के अंत में किसानों की आवाज और खुली चर्चा के माध्यम से जमीनी चुनौतियों को सामने रखा गया। सम्मेलन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि मक्का क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और जलवायु-स्मार्ट बनाकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सामूहिक प्रयास जारी रखे जाएंगे।

