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Home योजना

DEDS Scheme: डेयरी उद्यमिता विकास योजना: किसानों के लिए कमाई बढ़ाने का बड़ा मौका

Dairy Entrepreneurship Development Scheme: A great opportunity for farmers to increase their income

Fiza by Fiza
May 15, 2026
in योजना
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DEDS Scheme

DEDS Scheme

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DEDS Scheme : भारत में खेती के साथ पशुपालन हमेशा से किसानों की आय का मजबूत सहारा रहा है। खासकर डेयरी सेक्टर ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। दूध उत्पादन के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है और इसी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू कीं। इनमें से एक महत्वपूर्ण योजना है डेयरी उद्यमिता विकास योजना (Dairy Entrepreneurship Development Scheme – DEDS)।

यह योजना किसानों, युवाओं, महिला समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने में मदद देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। योजना के तहत डेयरी फार्म, मिल्क कूलिंग यूनिट, डेयरी प्रोसेसिंग, डेयरी पार्लर और पशु क्लीनिक जैसी सुविधाओं के लिए सब्सिडी और बैंक लोन उपलब्ध कराया जाता है।

डेयरी उद्यमिता विकास योजना क्या है?

डेयरी उद्यमिता विकास योजना केंद्र सरकार और NABARD द्वारा संचालित एक ऐसी योजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना है। इस योजना की शुरुआत छोटे डेयरी फार्म और आधुनिक डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए की गई थी।

इस योजना के तहत किसानों को डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए बैंक ऋण के साथ सब्सिडी भी दी जाती है। योजना का मुख्य फोकस रोजगार बढ़ाना, दूध उत्पादन में सुधार करना और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार देना है।

योजना की शुरुआत कैसे हुई?

भारत सरकार ने डेयरी DEDS Scheme और पोल्ट्री क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पहले Venture Capital Fund जैसी योजनाएं चलाई थीं। बाद में 2010 में डेयरी सेक्टर को आधुनिक बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से डेयरी उद्यमिता विकास योजना शुरू की गई।

योजना को लागू करने में NABARD की अहम भूमिका रही। बैंक किसानों को ऋण देते हैं और सरकार सब्सिडी उपलब्ध कराती है। इससे किसानों को कम पूंजी में डेयरी व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला।

योजना का मुख्य उद्देश्य

डेयरी उद्यमिता विकास योजना के पीछे सरकार के कई महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना
  • छोटे डेयरी फार्म की स्थापना को बढ़ावा देना
  • स्वच्छ दूध उत्पादन बढ़ाना
  • आधुनिक डेयरी तकनीकों को अपनाना
  • महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करना
  • डेयरी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा देना
  • पशुपालन के जरिए किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित करना

किसान इस योजना का फायदा कैसे उठा सकते हैं?

यदि कोई किसान या ग्रामीण युवा डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहता है तो वह इस योजना के तहत आवेदन कर सकता है। किसान निम्न कार्यों के लिए योजना का लाभ ले सकते हैं:

  • गाय या भैंस खरीदना
  • छोटा डेयरी फार्म बनाना
  • दूध संग्रहण केंद्र स्थापित करना
  • Bulk Milk Cooling Unit लगाना
  • डेयरी पार्लर खोलना
  • वर्मी कम्पोस्ट यूनिट बनाना
  • पशु क्लीनिक शुरू करना
  • दूध प्रोसेसिंग यूनिट लगाना

योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी

योजना में सामान्य वर्ग और SC/ST वर्ग के लिए अलग-अलग सब्सिडी का प्रावधान है।

श्रेणी सब्सिडी
सामान्य वर्ग परियोजना लागत का 25%
SC/ST वर्ग परियोजना लागत का 33.33%

कुछ प्रमुख गतिविधियों पर मिलने वाली सहायता:

गतिविधि अनुमानित परियोजना लागत
डेयरी फार्म पशुओं की संख्या के अनुसार
मिल्क कूलिंग यूनिट ₹18 लाख तक
डेयरी प्रोसेसिंग यूनिट ₹12 लाख तक
कोल्ड स्टोरेज ₹30 लाख तक
डेयरी पार्लर ₹56,000 तक

डेयरी उद्यमिता विकास योजना की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया

किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए निम्न प्रक्रिया अपनाते हैं:

1. परियोजना तैयार करें

सबसे पहले किसान को तय करना होता है कि वह कितने पशुओं का डेयरी फार्म शुरू करना चाहता है।

2. बैंक से संपर्क करें

किसान किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक, ग्रामीण बैंक या सहकारी बैंक में आवेदन कर सकता है।

3. आवेदन फॉर्म भरें

बैंक में योजना का आवेदन फॉर्म भरना होता है।

4. दस्तावेज जमा करें

आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद बैंक परियोजना को मंजूरी देता है।

5. ऋण स्वीकृति

बैंक लोन पास करता है और NABARD के माध्यम से सब्सिडी जुड़ती है।

6. डेयरी यूनिट शुरू करें

लोन मिलने के बाद किसान पशु खरीदकर डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकता है।

योजना के लिए जरूरी दस्तावेज

किसानों को आवेदन के समय निम्न दस्तावेज देने होते हैं:

  • आधार कार्ड
  • पैन कार्ड
  • बैंक पासबुक
  • निवास प्रमाण पत्र
  • भूमि दस्तावेज या लीज एग्रीमेंट
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • मोबाइल नंबर
  • परियोजना रिपोर्ट
  • जाति प्रमाण पत्र (SC/ST के लिए)
  • पशुपालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (यदि उपलब्ध हो)

किन किसानों को योजना का लाभ मिलता है?

इस योजना का लाभ निम्न लोग उठा सकते हैं:

  • छोटे और सीमांत किसान
  • महिला किसान
  • स्वयं सहायता समूह (SHG)
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO)
  • युवा उद्यमी
  • डेयरी सहकारी समितियां

किन राज्यों में किसान योजना का फायदा उठा सकते हैं?

डेयरी उद्यमिता विकास योजना पूरे भारत में लागू की गई थी। विशेष रूप से निम्न राज्यों में किसानों ने इस योजना का अधिक लाभ लिया:

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • राजस्थान
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • गुजरात
  • महाराष्ट्र
  • मध्य प्रदेश
  • कर्नाटक
  • तमिलनाडु
  • आंध्र प्रदेश
  • पश्चिम बंगाल

इन राज्यों में दूध उत्पादन पहले से मजबूत रहा है, इसलिए डेयरी व्यवसाय तेजी से बढ़ा।

पिछले 5 वर्षों में किसानों को कितना फायदा मिला?

पिछले कुछ वर्षों में डेयरी सेक्टर में तेजी से वृद्धि हुई है। सरकार और NABARD की विभिन्न योजनाओं के कारण हजारों किसानों ने डेयरी व्यवसाय शुरू किया। कई किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ा।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • डेयरी सेक्टर ग्रामीण परिवारों की नियमित आय का बड़ा स्रोत बना
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मजबूती मिली
  • छोटे किसानों ने खेती के साथ डेयरी को जोड़कर अतिरिक्त कमाई शुरू की
  • दूध उत्पादन और डेयरी प्रोसेसिंग में निवेश बढ़ा

भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और इसमें डेयरी योजनाओं की बड़ी भूमिका रही है।

महिला किसानों के लिए बड़ा अवसर

आज बड़ी संख्या में महिलाएं डेयरी व्यवसाय से जुड़ रही हैं। गांवों में महिला स्वयं सहायता समूह दूध उत्पादन और डेयरी उत्पाद बनाने का काम कर रहे हैं।

इस योजना से महिलाओं को:

  • स्वरोजगार मिला
  • परिवार की आय बढ़ी
  • बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली से जुड़ने का मौका मिला
  • ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली

डेयरी व्यवसाय क्यों बन रहा है किसानों की पहली पसंद?

खेती में मौसम का जोखिम लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पशुपालन किसानों को रोजाना नकद आय देता है। डेयरी व्यवसाय के कई फायदे हैं:

  • रोजाना कमाई
  • कम जमीन में व्यवसाय संभव
  • गोबर से जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट
  • दूध की लगातार मांग
  • सरकार से लोन और सब्सिडी सहायता

इसी वजह से अब कई किसान फसल उत्पादन के साथ डेयरी व्यवसाय को जोड़ रहे हैं।

डेयरी व्यवसाय शुरू करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

अच्छी नस्ल का चयन करें

उच्च दूध उत्पादन वाली गाय या भैंस चुनें।

पशुओं के स्वास्थ्य पर ध्यान दें

समय-समय पर टीकाकरण जरूरी है।

चारे की व्यवस्था करें

हरा चारा और संतुलित आहार उत्पादन बढ़ाता है।

साफ-सफाई रखें

स्वच्छ डेयरी फार्म से दूध की गुणवत्ता बेहतर रहती है।

बाजार से जुड़ें

डेयरी सहकारी समितियों और दूध कंपनियों से संपर्क करें।

सरकार की दूसरी डेयरी योजनाएं

डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार अन्य योजनाएं भी चला रही है:

  • पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (AHIDF)
  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन
  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)
  • मुद्रा लोन योजना
  • राष्ट्रीय डेयरी योजना

इन योजनाओं से किसानों को आधुनिक डेयरी व्यवसाय स्थापित करने में मदद मिलती है।

डेयरी सेक्टर में भविष्य की संभावनाएं

भारत में दूध और डेयरी DEDS Scheme उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। शहरों में दूध, दही, पनीर, घी और अन्य डेयरी उत्पादों की खपत लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि डेयरी सेक्टर आने वाले वर्षों में किसानों के लिए बड़ा अवसर बन सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि:

  • आधुनिक डेयरी फार्मिंग बढ़ेगी
  • प्रोसेस्ड डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ेगी
  • ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे
  • महिला डेयरी उद्यमियों की संख्या बढ़ेगी

निष्कर्ष

डेयरी उद्यमिता विकास योजना DEDS Scheme किसानों के लिए केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा माध्यम है। यह योजना किसानों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता, सब्सिडी और प्रशिक्षण का अवसर देती है। खेती के साथ डेयरी व्यवसाय जोड़कर किसान अपनी आय को स्थिर और मजबूत बना सकते हैं।

आज जब कृषि क्षेत्र में लागत बढ़ रही है और मौसम का जोखिम भी बढ़ा है, तब डेयरी सेक्टर किसानों के लिए भरोसेमंद आय का जरिया बनकर उभरा है। यदि किसान सही योजना, अच्छी नस्ल और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें तो डेयरी व्यवसाय बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।

Tags: Dairy Entrepreneurship Development SchemeDEDS Scheme
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