कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने और युवाओं व स्टार्टअप उद्यमियों को तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को अनाज, दालों और तिलहनों के प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन से जुड़े आधुनिक तरीकों और व्यवसायिक अवसरों के बारे में विस्तृत जानकारी देना था।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में इनक्यूबेटीज़ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को अनाज आधारित खाद्य प्रसंस्करण के पूरे वैल्यू चेन की जानकारी दी गई। इसमें कच्चे माल के चयन और सफाई से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धित उत्पादों की तैयारी, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षित भंडारण तक के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि किस प्रकार उचित प्रसंस्करण, पैकेजिंग और प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उत्पादों की पोषण गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है, उनकी शेल्फ लाइफ को बेहतर बनाया जा सकता है और बाजार में उनकी मांग को बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों का संचालन फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. बलजीत सिंह के मार्गदर्शन में उनकी टीम द्वारा किया गया। टीम में डॉ. पूनम ए. सचदेव, डॉ. जसप्रीत कौर, डॉ. बोबड़े हनुमान पांडुरंगराव और डॉ. अंतिम अग्रवाल शामिल थे। विशेषज्ञों ने व्यावहारिक प्रदर्शनों और विस्तृत व्याख्यानों के माध्यम से प्रतिभागियों को उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने, नमी नियंत्रण, स्वाद और बनावट में सुधार तथा व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन के दौरान खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान फूड एंड न्यूट्रिशन विभाग की वैज्ञानिक डॉ. अमरजीत कौर ने अनाज, दालों और तिलहनों के पोषण महत्व पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि इन फसलों से स्वास्थ्यवर्धक और कार्यात्मक खाद्य उत्पाद विकसित करने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। वहीं पीएफई विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संध्या ने प्रसंस्करण तकनीकों से संबंधित सत्र आयोजित किया, जिसमें आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया।
इसके अतिरिक्त वैज्ञानिक डॉ. किरणदीप ने प्रतिभागियों को एग्रो प्रोसेसिंग सेंटर का भ्रमण करवाया, जहां उन्हें अनाज आधारित उत्पादों के प्रसंस्करण में उपयोग होने वाले आधुनिक उपकरणों और तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला। विशेषज्ञों ने पैकेजिंग सामग्री, लेबलिंग मानकों और सुरक्षित भंडारण के तरीकों पर भी विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में प्रमुख अन्वेषक और निदेशक डॉ. रामनदीप सिंह ने कहा कि अनाज, दालों और तिलहनों के प्रसंस्करण में अपार संभावनाएं हैं। इन फसलों में मूल्य संवर्धन करके किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है, फसल की बर्बादी को कम किया जा सकता है और खाद्य क्षेत्र में नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन मिल सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक प्रसंस्करण तकनीकों को अपनाने और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
सह-प्रमुख अन्वेषक डॉ. पूनम ए. सचदेव ने प्रतिभागियों को उत्पाद नवाचार, पोषण संवर्धन और आकर्षक पैकेजिंग पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बाजार में सफलता प्राप्त करने के लिए उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखना, नियामक मानकों का पालन करना और मजबूत ब्रांड पहचान विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मूल्य संवर्धित अनाज और दाल आधारित उत्पादों की तैयारी से जुड़े व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराए गए। इसके साथ ही लागत विश्लेषण, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और उत्पादों के वितरण के उपयुक्त माध्यमों की पहचान जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक टीम की ओर से सभी विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया गया और प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की गई। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने और कृषि आधारित स्टार्टअप्स को मजबूत बनाने के उद्देश्य से नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत कुल आठ प्रशिक्षण सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुए, जो कृषि-खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में तकनीक आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुए।

