केंद्र सरकार ने बताया है कि आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक कुल 22,654.305 लाख रुपये जारी किए गए हैं। इस अवधि में 2024-25 तक जारी अधिकांश धनराशि का उपयोग भी किया गया, जबकि वर्ष 2025-26 में अब तक 1,500 लाख रुपये जारी हुए हैं, जिनका उपयोग अभी शून्य दर्ज किया गया है।
लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत वर्ष 2014-15 में 600 लाख रुपये जारी किए गए और पूरी राशि खर्च हुई। वर्ष 2015-16 में कोई धनराशि जारी नहीं हुई। इसके बाद 2016-17 में 675 लाख रुपये, 2017-18 में 437.45 लाख रुपये, 2018-19 में 1,899.81 लाख रुपये, 2019-20 में 439.74 लाख रुपये, 2020-21 में 3,181.38 लाख रुपये, 2021-22 में 5,652.385 लाख रुपये, 2022-23 में 1,546 लाख रुपये, 2023-24 में 3,538.38 लाख रुपये तथा 2024-25 में 3,184.16 लाख रुपये जारी किए गए। इन सभी वर्षों में जारी राशि के बराबर ही उपयोग भी दर्ज किया गया। वर्ष 2025-26 में अब तक 1,500 लाख रुपये जारी हुए हैं, लेकिन खर्च का आंकड़ा फिलहाल शून्य है।
सरकार ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत आंध्र प्रदेश में 16 गोकुल ग्राम स्थापित किए गए हैं। हालांकि, संशोधित और पुनर्संरेखित राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अवधि में इस घटक को बंद कर दिया गया है।
स्वदेशी गोवंश संरक्षण और संवर्धन के मोर्चे पर भी आंध्र प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। केंद्र सरकार के अनुसार, देश में स्वदेशी शुद्ध गोवंश नस्लों की आबादी में वर्ष 2013 के नस्ल सर्वेक्षण और 2022 के नस्ल सर्वेक्षण के बीच 29.99 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं आंध्र प्रदेश में इसी अवधि के दौरान स्वदेशी शुद्ध गोवंश आबादी में 62.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार का कहना है कि यह वृद्धि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए अनेक कदमों, विशेषकर राष्ट्रीय गोकुल मिशन जैसी पहलों का परिणाम है।
यह जानकारी लोकसभा में मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। आंकड़े यह संकेत देते हैं कि आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय गोकुल मिशन के माध्यम से नस्ल सुधार, स्वदेशी गोवंश संरक्षण और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में लगातार निवेश किया गया है।

