मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018-19 से मत्स्य और जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ) लागू की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में मत्स्य और जलीय कृषि से जुड़ी आधारभूत संरचना का निर्माण और सुदृढ़ीकरण करना है, ताकि उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन व्यवस्था को मजबूती मिल सके।
सरकार के अनुसार, एफआईडीएफ का कुल कोष आकार 7,522.48 करोड़ रुपये है। इस निधि के माध्यम से राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, राज्य स्तरीय संस्थाओं और अन्य पात्र हितधारकों को मत्स्य अवसंरचना परियोजनाओं के विकास के लिए रियायती वित्त उपलब्ध कराया जाता है। योजना के तहत भारत सरकार नोडल ऋणदात्री संस्थाओं के माध्यम से दिए जाने वाले ऋण पर प्रति वर्ष अधिकतम 3 प्रतिशत तक ब्याज सहायता प्रदान करती है। इसके साथ यह व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है कि रियायती वित्त की ब्याज दर 5 प्रतिशत प्रतिवर्ष से कम न हो।
अब तक एफआईडीएफ के अंतर्गत देशभर में 228 परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। इन परियोजनाओं की कुल लागत 5,559.54 करोड़ रुपये है, जबकि ब्याज सहायता के लिए अनुमन्य परियोजना लागत 4,351.86 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। सरकार का कहना है कि इस योजना के तहत विकसित हो रही मत्स्य अवसंरचनाएं कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने, मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने, मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन देने, विपणन दक्षता सुधारने और मत्स्य मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने में मदद कर रही हैं।
मध्य प्रदेश में भी इस योजना के अंतर्गत परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। राज्य के लिए एफआईडीएफ के तहत भोपाल में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी प्रसार केंद्र की स्थापना हेतु 5 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है। इसके अलावा निजी उद्यमियों की 4 अन्य परियोजनाएं भी 1.90 करोड़ रुपये की कुल लागत से मंजूर की गई हैं। इससे स्पष्ट है कि राज्य में मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण और तकनीकी विस्तार की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने एफआईडीएफ के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को भी राज्य में विभिन्न हितधारकों, विशेषकर मछुआरों और मत्स्य पालकों के बीच बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की हैं। इसका असर स्थानीय स्तर पर दिखाई भी दे रहा है।
रतलाम लोकसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत 26.43 हेक्टेयर नए तालाब क्षेत्र का विकास, 3 फिन-फिश हैचरी, 4 फीड मिल और 2 आइस प्लांट तथा कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने की कार्यवाही शुरू की गई है। इन पहलों से क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन क्षमता बढ़ने, रोजगार सृजन होने और किसानों तथा मछुआरों की आय में सुधार की संभावना है।
कुल मिलाकर, एफआईडीएफ देश में मत्स्य क्षेत्र की आधारभूत संरचना को नई दिशा देने वाली एक महत्त्वपूर्ण योजना के रूप में उभर रही है। विशेष रूप से उन राज्यों के लिए, जहां मत्स्य क्षेत्र में विकास की काफी संभावनाएं मौजूद हैं, यह योजना उत्पादन से विपणन तक पूरी श्रृंखला को मजबूत करने का माध्यम बन रही है।

