पंजाब में जल संरक्षण, कृषि विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में Punjab Agricultural University (PAU), Ludhiana ने एक बार फिर महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय में आयोजित Research and Extension Review Committee की मासिक बैठक में PAU के कुलपति Dr. Satbir Singh Gosal ने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे पानी की अधिक खपत करने वाली Paddy की जगह Oilseed Crops जैसे Soybean, Sunflower और Groundnut को वैकल्पिक फसलों के रूप में बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि कृषि में नवाचार, फसल विविधीकरण और आधुनिक बागवानी फसलों को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
बैठक में पंजाब के विभिन्न Regional Research Stations, Krishi Vigyan Kendras (KVKs) तथा Farm Advisory Service Centres से जुड़े अनुसंधान एवं कृषि विस्तार वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस दौरान खरीफ मौसम की प्रमुख फसलों की वर्तमान स्थिति, उत्पादन लक्ष्य, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा किसानों के समक्ष आ रही चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
खरीफ फसलों की स्थिति पर वैज्ञानिकों ने प्रस्तुत की रिपोर्ट
बैठक में विशेषज्ञों ने Paddy, Basmati, Cotton, Maize, फलों एवं सब्जियों की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। वैज्ञानिकों ने धान में रोग प्रबंधन, बासमती में Foot Rot Disease Management, कपास में Pink Bollworm और Whitefly Management, जबकि मक्का में Fall Armyworm Management पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं।
विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर निगरानी, वैज्ञानिक सलाह और समन्वित कीट एवं रोग प्रबंधन (Integrated Pest and Disease Management) के माध्यम से किसानों को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है। उन्होंने कृषि विस्तार अधिकारियों से किसानों तक नवीनतम वैज्ञानिक सिफारिशें तेजी से पहुंचाने का भी आग्रह किया।
Paddy के विकल्प के रूप में Oilseed Crops अपनाने पर जोर
बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि पंजाब में लगातार घटता भूजल स्तर भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से धान आधारित खेती के कारण भूजल पर अत्यधिक दबाव बढ़ा है, इसलिए अब फसल विविधीकरण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों को Soybean, Sunflower और Groundnut जैसी Oilseed Crops की खेती के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उनके अनुसार ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी की मांग करती हैं और किसानों के लिए बेहतर आर्थिक विकल्प बन सकती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसानों को उचित तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तायुक्त बीज और बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए तो पंजाब में तिलहनी फसलों का क्षेत्रफल तेजी से बढ़ सकता है।
Dragon Fruit की बढ़ती लोकप्रियता पर जताई खुशी
डॉ. गोसल ने Dragon Fruit की खेती को लेकर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब सहित कई राज्यों में किसान अब Dragon Fruit की व्यावसायिक खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
उन्होंने इसे कृषि विविधीकरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलें किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
नई Horticulture Crops बदल सकती हैं कृषि की तस्वीर
बैठक में कुलपति ने भविष्य की कृषि को ध्यान में रखते हुए कई नई Horticulture Crops का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि Blueberry, Blackberry, Almond, Avocado, Tulip और Orchid जैसी फसलें आने वाले वर्षों में कृषि को आर्थिक और व्यावसायिक रूप से नई दिशा दे सकती हैं।
उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु, उपभोक्ताओं की बदलती मांग और वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों की ओर भी ध्यान देना चाहिए जिनमें अधिक लाभ की संभावना हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलें कृषि क्षेत्र में रोजगार, निर्यात और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
Climate Smart Agriculture की आवश्यकता
डॉ. गोसल ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र जल संकट, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और वायु प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।
उन्होंने कहा कि Climate Smart Agriculture, Crop Diversification, Resource Conservation और Sustainable Farming ही इन समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान हैं। कृषि में नवाचार और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर ही भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।
PAU की नई किस्मों और तकनीकों को बढ़ावा देने की अपील
बैठक के दौरान Director of Research, PAU Dr. A. S. Dhatt ने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित Water Saving Varieties, Climate Smart Crop Varieties तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि PAU लगातार ऐसी फसल किस्मों और तकनीकों पर कार्य कर रहा है जो कम पानी में बेहतर उत्पादन दें और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल हों। इन तकनीकों को अपनाकर पंजाब को खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा और किसानों की आय के मामले में और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
पराली प्रबंधन में वैज्ञानिकों की सराहना
बैठक में Director of Extension Education, PAU Dr. M. S. Bhullar ने वैज्ञानिकों द्वारा पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिकों और कृषि विस्तार अधिकारियों की सक्रिय भूमिका के कारण किसानों में जागरूकता बढ़ी है और पराली प्रबंधन के आधुनिक उपायों को अपनाने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।
उन्होंने वैज्ञानिकों से इस अभियान को और तेज करने का आह्वान करते हुए किसानों को विश्वविद्यालय द्वारा विकसित आधुनिक मशीनों के उपयोग के लिए प्रेरित करने की अपील की।
Happy Seeder सहित आधुनिक मशीनों को अपनाने पर जोर
डॉ. एम. एस. भुल्लर ने किसानों के बीच Happy Seeder, Surface Seeder, Smart Seeder, Super Seeder, Super SMS, Baler तथा Mulcher जैसी आधुनिक Crop Residue Management Technologies को अधिक से अधिक अपनाने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि इन मशीनों के माध्यम से पराली को जलाने की आवश्यकता नहीं रहती और खेत की उर्वरता भी बनी रहती है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की लागत में भी कमी आती है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन तकनीकों का व्यापक उपयोग वायु प्रदूषण कम करने और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
ICT Tools के माध्यम से किसानों तक पहुंचे वैज्ञानिक सलाह
डॉ. भुल्लर ने कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि वे किसानों के साथ अपने संपर्क को और अधिक मजबूत करें। उन्होंने ICT Tools, Digital Advisory, Mobile Communication, Farmer Training Programmes तथा विभिन्न कृषि विस्तार माध्यमों के जरिए किसानों तक समय पर वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर किसानों को मौसम, रोग प्रबंधन, कीट नियंत्रण और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराई जा सकती है।
कृषि विस्तार कार्यक्रमों पर भी हुई चर्चा
बैठक का संचालन Dr. T. S. Dhillon और Dr. P. S. Sandhu, अतिरिक्त निदेशक (कृषि विस्तार शिक्षा) ने किया। उन्होंने विभिन्न अनुसंधान केंद्रों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन भी प्रस्तुत किया गया।
किसानों के लिए क्या है संदेश?
बैठक में दिए गए सुझावों से स्पष्ट है कि भविष्य की कृषि केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी। जल संरक्षण, कम पानी वाली फसलें, आधुनिक बागवानी, पराली प्रबंधन, जलवायु अनुकूल किस्में और डिजिटल कृषि तकनीकें आने वाले समय में खेती की दिशा तय करेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान धान पर अत्यधिक निर्भरता कम कर तिलहनी एवं बागवानी फसलों को अपनाते हैं, तो उनकी आय में वृद्धि के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी संभव होगा।
Punjab Agricultural University की यह समीक्षा बैठक केवल फसलों की प्रगति का आकलन भर नहीं थी, बल्कि भविष्य की टिकाऊ कृषि के लिए स्पष्ट रोडमैप भी प्रस्तुत करती है। Dragon Fruit जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा, Soybean, Sunflower और Groundnut जैसी Oilseed Crops का विस्तार, Climate Smart Agriculture, Crop Diversification तथा Crop Residue Management Technologies को अपनाने की अपील इस बात का संकेत है कि पंजाब की कृषि अब नई दिशा की ओर बढ़ रही है।
यदि विश्वविद्यालय के सुझावों को बड़े पैमाने पर लागू किया जाता है, तो इससे न केवल भूजल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को मजबूती मिलेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।

