देश में सरकारी गोदामों में अनाज का स्टॉक तेजी से बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बड़ा निर्देश दिया है। सरकार ने कहा है कि वे मुफ्त अनाज योजना के तहत सेंट्रल पूल से जून 2026 तक का चावल और गेहूं अभी से ही उठा लें और उसे तुरंत लाभार्थियों में वितरित कर दें। इस फैसले का मुख्य कारण सरकारी गोदामों में जगह की कमी और जल्द शुरू होने वाली गेहूं खरीद को बताया जा रहा है।
खाद्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सचिवों को पत्र भेजकर कहा है कि आने वाले खरीद सीजन को देखते हुए लॉजिस्टिक्स और भंडारण से जुड़ी दिक्कतों से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत जून 2026 तक आवंटित अनाज को पहले ही उठा लिया जाए और उसे लाभार्थियों तक तुरंत पहुंचाया जाए।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि राज्यों को अनाज के उठाव और वितरण की प्रक्रिया में तेजी लानी होगी ताकि सरकारी भंडारों में नई खरीद के लिए पर्याप्त जगह बनाई जा सके।
इस बीच सरकार ने Food Corporation of India (FCI) को भी जरूरी निर्देश दिए हैं। एफसीआई से कहा गया है कि वह अपने गोदामों में अनाज की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखे और राज्यों के साथ समन्वय कर अनाज के समय से पहले उठाव की प्रक्रिया को आसान बनाए।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार तक एफसीआई के पास 372 लाख टन चावल और 235 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद था। यानी कुल मिलाकर लगभग 607 लाख टन अनाज सरकारी गोदामों में रखा हुआ है। यह मात्रा 1 अप्रैल के लिए तय किए गए 21 मिलियन टन के बफर स्टॉक से करीब 185 प्रतिशत ज्यादा है।
अधिकारियों के अनुसार इस स्टॉक में लगभग 39 मिलियन टन चावल शामिल नहीं है, जो अभी मिल मालिकों से मिलना बाकी है। यदि वह भी शामिल हो जाए तो सरकारी भंडार में अनाज की मात्रा और ज्यादा बढ़ जाएगी।
सरकार का मानना है कि 80 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को एक बार में एडवांस अनाज वितरण करने से दो बड़े फायदे होंगे। पहला, नई खरीदी जाने वाली गेहूं की फसल को रखने के लिए गोदामों में जगह बन जाएगी। दूसरा, सप्लाई चेन पर दबाव भी कम होगा।
दरअसल आने वाले कुछ हफ्तों में देश के कई राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने वाली है। ऐसे में अगर पुराने स्टॉक को जल्दी खाली नहीं किया गया तो नई फसल के भंडारण में मुश्किलें आ सकती हैं।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से भी सरकार सप्लाई चेन को लेकर सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि अगर पेट्रोल-डीजल की सप्लाई या परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है तो अनाज के वितरण पर असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार पहले से ही स्टॉक को निकालकर वितरण करने की रणनीति पर काम कर रही है।
सरकार का यह कदम न सिर्फ गोदामों में जगह बनाने के लिए अहम माना जा रहा है, बल्कि इससे करोड़ों गरीब परिवारों तक समय से पहले अनाज पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

