ֆ:विश्व मृदा दिवस अभियान का उद्देश्य लोगों को मिट्टी से जोड़ना और हमारे जीवन में उनके महत्व के बारे में जागरूक करना है। इसलिए हर वर्ष 05 दिसम्बर को दुनिया भर में विश्व मृदा दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2024 में विश्व मृदा दिवस ’’मिट्टी की देखभाल: मापना, निगरानी एवं प्रबंधन’’ विषय पर रखा गया।
इस कार्यक्रम के आरम्भ में डॉ. डी. के. राणा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष ने सभी उपस्थित किसान भाईयों का स्वागत किया साथ ही विश्व मृदा दिवस के महत्व एवं एकीकृत नाशी जीव प्रबन्धन के बारे में बताया। केन्द्र के बागवानी विशेषज्ञ राकेश कुमार ने सब्जियों में एकीकृत पोषक प्रबन्धन में मृदा की जांच के लाभ, उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि के बारे में बताया।
उन्होंने बताया कि खासकर सब्जियों एवं फलों में मामूली सूक्ष्म तत्वों के अभाव में भारी नुकसान हो जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि मृदा जांच के बाद पोषक तत्वों का प्रबन्धन हो।
मृदा विशेषज्ञ श्री बृजेश यादव ने मृदा एवं जल के नमूने लेने के तरीके, उसका परीक्षण व रिपोर्ट के आधार पर खाद एवं उर्वरकों का प्रबन्धन कैसे करें विस्तार पूर्वक जानकारी दी। साथ उन्होनें मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए फसल चक्र में दलहनी फसलों के समावेश की महत्ता व भोजन, चारा, ईंधन और फाइबर उत्पादन और पारिस्थितिक तंत्र और मानव कल्याण में मिट्टी के स्वास्थ्य के योगदान पर भी प्रकाश डाला।
इसी क्रम में पशु पालन विशेषज्ञ डॉ. जे. पी. गौदारा ने पशु स्वास्थ्य पर अनावश्यक प्रयोग में लिए जाने वाले रसायनों के दुष्प्रभाव पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में श्री कैलाश, विशेषज्ञ (कृषि प्रसार) ने किसानों को खेती में रसायनों के उपयोग से दूर हटकर जैविक खेती को अपनाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के अन्त में डॉ. रितु सिंह, विशेषज्ञ (गृह विज्ञान) ने कार्यक्रम में शामिल किसानों का हार्दिक आभार प्रकट किया। इस अवसर पर दिल्ली क्षेत्र के लगभग 50 किसानों एवं महिला किसानों ने भाग लिया, जिनको मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया गया।
§कृषि विज्ञान केन्द्र, उजवा, नई दिल्ली में विश्व मृदा दिवस 2024 मनाया गया। वर्ष 2002 में इंटरनेशनल यूनियन ऑफ सॉयल साइंस ने 5 दिसंबर को ‘विश्व मृदा दिवस‘ के रूप में प्रस्तावित करने का प्रस्ताव दिया, ताकि मिट्टी के महत्व को प्राकृतिक प्रणाली के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में और मानव कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में मनाया जा सके।

