आंध्र प्रदेश सरकार ने किसानों तक उर्वरकों की पारदर्शी और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि 9 जून से पूरे प्रदेश में एक नया डिजिटल फर्टिलाइज़र वितरण सिस्टम लागू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत यूरिया और डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) जैसे प्रमुख उर्वरकों की बिक्री और वितरण APAIMS (Andhra Pradesh Agriculture Information Management System) ऐप के माध्यम से किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस प्रणाली से उर्वरकों का दुरुपयोग रोका जा सकेगा और वास्तविक किसानों को समय पर आवश्यक खाद उपलब्ध होगी।
राज्य के कृषि निदेशक डॉ. मनाज़िर जिलानी सामून ने बताया कि यह नई व्यवस्था राज्य के 24 जिलों में लागू होगी। हालांकि कृष्णा और काकीनाडा जिलों को फिलहाल इससे बाहर रखा गया है क्योंकि ये जिले केंद्र सरकार के फर्टिलाइज़र ऐप पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। इन जिलों में केंद्र की व्यवस्था लागू रहने के कारण फिलहाल राज्य की नई प्रणाली को लागू नहीं किया जाएगा।
नई व्यवस्था के अनुसार किसानों को पहले APAIMS प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद वे अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपनी पसंद के अधिकृत उर्वरक विक्रेता का चयन कर सकें। इससे खरीद प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी। सरकार का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से यह पता लगाना आसान होगा कि कौन किसान कितना उर्वरक खरीद रहा है और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है।
इस नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सभी फर्टिलाइज़र रिटेलर्स को रायथू सेवा केंद्रों (RSKs) से जोड़ना है। रायथू सेवा केंद्र पहले से ही किसानों को कृषि सेवाएं और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अब उर्वरक वितरण को भी इन केंद्रों से जोड़कर सरकार एकीकृत कृषि सेवा प्रणाली विकसित करना चाहती है। इससे उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार लंबे समय से यह शिकायत मिलती रही है कि सब्सिडी वाले उर्वरकों का कुछ हिस्सा खेती के अलावा अन्य कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। विशेष रूप से यूरिया का उपयोग कई गैर-कृषि गतिविधियों में भी होने की खबरें सामने आती रही हैं। इससे वास्तविक किसानों को कई बार पर्याप्त मात्रा में उर्वरक नहीं मिल पाता। नई डिजिटल प्रणाली के माध्यम से सरकार इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना चाहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उर्वरकों के वितरण में डिजिटल तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता बढ़ेगी। प्रत्येक लेनदेन का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा, जिससे निगरानी आसान होगी। साथ ही जरूरत के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में उर्वरकों की मांग और आपूर्ति का विश्लेषण भी किया जा सकेगा। इससे भविष्य में उर्वरकों की योजना बनाने और वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक जागरूकता अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। 6 जून को आयोजित एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में जिला और क्षेत्रीय कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे किसानों, किसान संगठनों, प्रगतिशील किसानों, कृषि विशेषज्ञों, कृषि चैनलों और उर्वरक विक्रेताओं के बीच जागरूकता कार्यक्रम चलाएं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे किसानों को APAIMS ऐप के उपयोग, पंजीकरण प्रक्रिया और इसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दें।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कृषि विभाग ने उर्वरकों की बिक्री और वितरण पर कड़ी निगरानी रखने का निर्णय लिया है। यदि कोई डीलर, कर्मचारी या अधिकारी उर्वरकों के दुरुपयोग में शामिल पाया जाता है या नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। इससे वितरण प्रणाली में जवाबदेही और अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
यह पहल ऐसे समय में लागू की जा रही है जब वैश्विक स्तर पर उर्वरकों और ईंधन की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ऐसे हालात में सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उपलब्ध उर्वरकों का उपयोग पूरी जिम्मेदारी के साथ हो और किसानों को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।
कृषि क्षेत्र में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह प्रणाली सफल रहती है तो भविष्य में अन्य कृषि आदानों के वितरण में भी इसी तरह की डिजिटल व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे न केवल सरकारी सब्सिडी का सही उपयोग सुनिश्चित होगा बल्कि किसानों को भी पारदर्शी और सुविधाजनक सेवाएं प्राप्त होंगी।
आंध्र प्रदेश सरकार का यह प्रयास कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे उर्वरकों की उपलब्धता बेहतर होने, दुरुपयोग पर रोक लगाने और किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में इस नई व्यवस्था का प्रभाव राज्य की कृषि उत्पादकता और उर्वरक प्रबंधन पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।
