• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

उर्वरक संकट से निपटने के लिए रणनीतिक रिजर्व की तैयारी! DAP-MOP पर संसदीय समिति की बड़ी सिफारिश

उर्वरक आपूर्ति को वैश्विक संकट से बचाने के लिए संसदीय समिति ने रणनीतिक उर्वरक रिजर्व, DAP-MOP का स्टॉक, अग्रिम खरीद और रियल-टाइम निगरानी की सिफारिश की है।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
August 8, 2026
in कृषि समाचार
0
रणनीतिक उर्वरक रिजर्व
0
SHARES
2
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

उर्वरक संकट से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधानों को देखते हुए भारत की उर्वरक सुरक्षा को लेकर संसदीय समिति ने महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में सरकार से उर्वरकों के लिए एक मजबूत आकस्मिक योजना तैयार करने और रणनीतिक उर्वरक रिजर्व बनाने की दिशा में कदम उठाने को कहा है।

समिति का मानना है कि पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में पैदा होने वाले संकट का सीधा असर उर्वरकों और उनके कच्चे माल की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में केवल तत्काल आयात और गतिशील आपूर्ति योजना पर निर्भर रहने के बजाय देश को भविष्य के लिए पर्याप्त रणनीतिक भंडार और स्पष्ट आपातकालीन प्रोटोकॉल तैयार करने की जरूरत है।

हर फसल सीजन से पहले न्यूनतम स्टॉक तय करने की सिफारिश

संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि प्रत्येक फसल सीजन शुरू होने से पहले राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रमुख उर्वरकों के लिए न्यूनतम शुरुआती स्टॉकिंग मानदंड तय किए जाएं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बुवाई के महत्वपूर्ण समय पर किसानों को यूरिया, DAP, MOP और NPK जैसे प्रमुख उर्वरकों की कमी का सामना न करना पड़े।

समिति ने इसके साथ ही उर्वरकों की अग्रिम खरीद की व्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश की है। इसके अलावा आपूर्तिकर्ता देशों के साथ गैस आवंटन को लेकर बेहतर समन्वय बनाने और अत्यधिक आयात-निर्भर उर्वरकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने पर भी जोर दिया गया है।

खास तौर पर DAP और MOP के क्षेत्रीय रणनीतिक रिजर्व की व्यवहार्यता की जांच करने की सिफारिश की गई है। इन दोनों उर्वरकों के लिए भारत की आयात पर निर्भरता अधिक है, इसलिए वैश्विक बाजार में किसी बड़े व्यवधान की स्थिति में इनका पर्याप्त भंडार किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

पश्चिम एशिया संकट ने उजागर की कमजोरी

समिति ने कहा है कि हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने भारत की उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को उजागर किया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर केवल तैयार उर्वरकों के आयात तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गैस और अन्य कच्चे माल की उपलब्धता पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

उर्वरक उत्पादन में प्राकृतिक गैस की महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेष रूप से यूरिया के उत्पादन के लिए गैस एक प्रमुख फीडस्टॉक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस की कीमतों और उपलब्धता में बदलाव का सीधा असर घरेलू यूरिया उत्पादन और उर्वरक की लागत पर पड़ सकता है।

समिति के अनुसार, संकट के दौरान आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत को यूरिया और DAP जैसे तैयार उर्वरकों के आयात के स्रोतों में विविधता लानी पड़ी। कुछ मामलों में हाजिर बाजार से ऊंची कीमतों पर उर्वरक खरीदने की जरूरत भी सामने आई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि वैश्विक आपूर्ति संकट की स्थिति में केवल सामान्य आयात व्यवस्था पर्याप्त नहीं हो सकती।

सरकार के समय पर उठाए कदमों की सराहना

हालांकि समिति ने रणनीतिक रिजर्व की जरूरत पर जोर दिया है, लेकिन उसने पश्चिम एशिया संकट के दौरान उर्वरक विभाग द्वारा उठाए गए समयबद्ध कदमों की भी सराहना की है।

रिपोर्ट के अनुसार, अग्रिम आयात योजना, विदेशों में भारतीय मिशनों के साथ समन्वय और गैस आवंटन से जुड़े फैसलों ने मौजूदा खरीफ सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सरकार ने संकट के दौरान संभावित आपूर्ति व्यवधानों को ध्यान में रखते हुए आयात व्यवस्था को पहले से सक्रिय किया। इससे किसानों के लिए मिट्टी के पोषक तत्वों की उपलब्धता में बड़े स्तर पर कमी की स्थिति बनने से रोका जा सका।

हालांकि समिति का मानना है कि भविष्य में किसी बड़े वैश्विक संकट के दौरान केवल ऐसी आपातकालीन कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय पहले से तैयार रणनीतिक रिजर्व और स्पष्ट प्रोटोकॉल अधिक प्रभावी होंगे।

सब्सिडी वाले यूरिया के औद्योगिक इस्तेमाल पर चिंता

संसदीय समिति ने सब्सिडी वाले उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। समिति ने वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर एक संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने की सिफारिश की है, ताकि सब्सिडी वाले उर्वरकों के डायवर्जन पर प्रभावी तरीके से नजर रखी जा सके।

रिपोर्ट में विशेष रूप से सब्सिडी वाले नीम-लेपित यूरिया के औद्योगिक उपयोग का उल्लेख किया गया है। समिति के अनुसार, प्लाइवुड कारखानों, रेजिन निर्माण इकाइयों, डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड बनाने वाली इकाइयों और पशु चारा निर्माताओं जैसे क्षेत्रों में यूरिया के औद्योगिक इस्तेमाल की शिकायतें सामने आई हैं।

सरकार किसानों के लिए यूरिया पर भारी सब्सिडी देती है। ऐसे में यदि यही उर्वरक कृषि के बजाय औद्योगिक इस्तेमाल में चला जाता है, तो इससे सरकारी सब्सिडी का उद्देश्य प्रभावित होता है और किसानों के लिए उपलब्धता पर भी दबाव पड़ सकता है।

FY26 में 70 मिलियन टन से अधिक सब्सिडी वाले उर्वरक

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में सरकार ने किसानों को यूरिया, DAP, MOP और NPK सहित 70 मिलियन टन से अधिक सब्सिडी वाले उर्वरकों की आपूर्ति की।

भारत की उर्वरक जरूरतों और कच्चे माल का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा आयात से जुड़ा है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों, समुद्री परिवहन, गैस की उपलब्धता और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में होने वाला बदलाव भारत की उर्वरक सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

समिति की रणनीतिक रिजर्व की सिफारिश इसी आयात निर्भरता को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बढ़ सकती है उर्वरक सब्सिडी

उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर सरकार के सब्सिडी बिल पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में वास्तविक उर्वरक सब्सिडी 2.17 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि संशोधित अनुमान करीब 1.86 लाख करोड़ रुपये था।

वैश्विक बाजार में मिट्टी के पोषक तत्वों की ऊंची कीमतों को देखते हुए FY27 में भी सरकार पर उर्वरक सब्सिडी का बोझ बढ़ने की संभावना जताई गई है। इससे सरकार के सामने एक तरफ किसानों को सस्ती दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने और दूसरी तरफ राजकोषीय दबाव को नियंत्रित रखने की चुनौती बनी रहेगी।

गैर-सब्सिडी वाले उत्पादों की अलग डिजिटल बिलिंग की मांग

समिति ने किसानों को सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ गैर-सब्सिडी वाले उत्पादों की बिक्री को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया है।

रिपोर्ट में यूरिया बैग के साथ नैनो यूरिया की बोतल जैसे गैर-सब्सिडी वाले उत्पादों की अनिवार्य बंडलिंग पर चिंता जताई गई है। समिति ने सुझाव दिया है कि यदि किसानों को सब्सिडी वाले उर्वरक के साथ कोई गैर-सब्सिडी वाला उत्पाद बेचा जाता है, तो उसकी अलग डिजिटल बिलिंग अनिवार्य की जानी चाहिए।

इससे किसानों को यह स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि उन्होंने किस उत्पाद के लिए कितना भुगतान किया है और सब्सिडी वाले उर्वरक की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी।

DBT से जुड़ी है उर्वरक बिक्री व्यवस्था

भारत में उर्वरक सब्सिडी व्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली से जोड़ा गया है। सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री के समय लाभार्थी या किसान का आधार आधारित सत्यापन किया जाता है। बिक्री का रिकॉर्ड डिजिटल प्रणाली में दर्ज होता है और इसके आधार पर कंपनियों को सब्सिडी का भुगतान किया जाता है।

समिति द्वारा सुझाया गया रियल-टाइम निगरानी तंत्र इस व्यवस्था को और मजबूत कर सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि सब्सिडी वाला उर्वरक कहां पहुंचा, किसे बेचा गया और उसका उपयोग कृषि के लिए हुआ या किसी अन्य क्षेत्र में।

उर्वरक सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक रणनीति जरूरी

संसदीय समिति की सिफारिशों का व्यापक संदेश यही है कि भारत को उर्वरक आपूर्ति के मामले में तत्काल प्रबंधन से आगे बढ़कर दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी होगी। रणनीतिक रिजर्व, न्यूनतम शुरुआती स्टॉक, आयात स्रोतों में विविधता, अग्रिम खरीद और रियल-टाइम निगरानी जैसे कदम भविष्य में वैश्विक संकट के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।

भारत की कृषि व्यवस्था में उर्वरकों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए इनकी समय पर उपलब्धता सीधे किसानों की बुवाई और उत्पादन से जुड़ी है। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति संकट की स्थिति में किसानों को प्रभावित होने से बचाने के लिए मजबूत रणनीतिक भंडार और बेहतर आपूर्ति प्रबंधन आने वाले वर्षों में उर्वरक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

 

Tags: agriculture newsDAP FertilizerFertilizer Crisisfertilizer import indiafertilizer newsFertilizer SubsidyMOP Fertilizerurea fertilizerउर्वरक रिजर्व
Previous Post

Moong Farming: मूंग की खेती कब और कैसे करें? जानें बुवाई, सिंचाई, कीट नियंत्रण और सब्सिडी की जानकारी

Next Post

खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, 49 केंद्रों पर छापेमारी; 28 नमूने जांच के लिए भेजे

Next Post
वाराणसी में उर्वरक की कालाबाजारी और ओवररेटिंग पर प्रशासन

खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, 49 केंद्रों पर छापेमारी; 28 नमूने जांच के लिए भेजे

Recent Posts

  • यूरिया की एक बोरी पर सरकार कितना खर्च करती है? जानिए सस्ती खाद की पूरी कहानी
  • खाद की बोरी पर लिखे NPK नंबर का क्या मतलब है? 46-0-0, 18-46-0 और 10-26-26 को आसान भाषा में समझिए
  • यूरिया ज्यादा डालने से फसल ज्यादा होगी? जानिए कब खाद बनती है वरदान और कब बन जाती है नुकसान
  • DAP की कीमत इतनी क्यों बढ़ती है? फॉस्फेट रॉक से किसान के खेत तक पूरी कहानी
  • खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, 49 केंद्रों पर छापेमारी; 28 नमूने जांच के लिए भेजे

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.