वाराणसी। किसानों को उचित मूल्य पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और खाद की कालाबाजारी, ओवररेटिंग तथा अनियमित बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए गुरुवार को शासन के निर्देश पर जिलेभर में व्यापक चेकिंग और छापेमारी अभियान चलाया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी द्वारा गठित संयुक्त टीमों ने जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में उर्वरक बिक्री केंद्रों, सहकारी समितियों और निजी दुकानों का अचानक निरीक्षण किया।
प्रशासन की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना, दुकानदारों द्वारा की जाने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाना और खाद की उपलब्धता तथा वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाना रहा। अभियान के दौरान अधिकारियों ने स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, अभिलेख, रेट बोर्ड और POS मशीन सहित उर्वरक बिक्री से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की जांच की।
तीन तहसीलों में बनाई गईं संयुक्त टीमें
जिले में अभियान को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए प्रशासन ने क्षेत्र को तीन तहसीलों में बांटकर अलग-अलग संयुक्त टीमें गठित की थीं। इन टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में उर्वरक बिक्री केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण करने और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
तहसील सदर में जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह और जिला उद्यान अधिकारी सुभाष कुमार के नेतृत्व में टीम ने विभिन्न उर्वरक केंद्रों की जांच की।
तहसील पिण्डरा में कृषि रक्षा अधिकारी बृजेश विश्वकर्मा तथा जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी आरपी सिंह को जांच की जिम्मेदारी दी गई थी।
वहीं तहसील राजातालाब में भूमि संरक्षण अधिकारी अशोक कुमार यादव, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (मत्स्य) राजेन्द्र कुमार और वरिष्ठ प्राविधिक सहायक रोहित कुमार सिंह की टीम ने उर्वरक विक्रेताओं और बिक्री केंद्रों का निरीक्षण किया।
इन संयुक्त टीमों ने साधन सहकारी समितियों, पीसीएफ केंद्रों, इफको, आईएफएफडीसी, औद्यानिक समितियों के साथ-साथ निजी उर्वरक विक्रेताओं की दुकानों और गोदामों की जांच की।
49 बिक्री केंद्रों की जांच
अभियान के दौरान जिलेभर में कुल 49 उर्वरक बिक्री केंद्रों का गहन निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने दुकानों और गोदामों में उपलब्ध खाद के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया। इसके अलावा बिक्री से संबंधित अभिलेखों और स्टॉक रजिस्टर की भी जांच की गई।
अधिकारियों ने यह भी देखा कि विक्रेताओं द्वारा किसानों को उर्वरक निर्धारित सरकारी दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं। इसके साथ ही बिक्री प्रक्रिया में POS मशीन का इस्तेमाल, किसानों का सत्यापन और उर्वरक की वास्तविक उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की भी जांच की गई।
अभियान के दौरान नामित उर्वरक निरीक्षकों ने गुणवत्ता परीक्षण के लिए 28 उर्वरक नमूने भी एकत्र किए। इन नमूनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी नमूने की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो संबंधित विक्रेता या प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
तीन दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस
निरीक्षण के दौरान कुछ बिक्री केंद्रों पर अनियमितताएं भी सामने आईं। दो दुकानें निरीक्षण के समय बंद पाई गईं। इनमें मेसर्स पारस बीज भण्डार, बड़ागांव और मेसर्स किसान बीज एवं खाद भण्डार, चकखरावन साधोगंज शामिल हैं।
वहीं मेसर्स न्यू सागर कृषि केन्द्र, करनाडी के यहां स्टॉक और अभिलेख अपूर्ण पाए गए। प्रशासन ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
नोटिस के माध्यम से संबंधित विक्रेताओं से अनियमितताओं के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने या जांच में आरोप सही पाए जाने पर आगे नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
रेट बोर्ड लगाना अनिवार्य
अभियान के दौरान अधिकारियों ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि दुकानों पर रेट बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए। रेट बोर्ड पर संबंधित उर्वरकों की निर्धारित कीमत स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए, ताकि किसान खरीदारी से पहले वास्तविक कीमत की जानकारी प्राप्त कर सकें।
प्रशासन ने विक्रेताओं को चेतावनी दी कि निर्धारित कीमत से अधिक दर पर उर्वरक बेचने या किसानों से अतिरिक्त राशि वसूलने की शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने यह भी निर्देश दिया कि किसानों को खाद खरीदते समय बिल उपलब्ध कराया जाए और बिक्री का रिकॉर्ड नियमानुसार दर्ज किया जाए।
POS मशीन से ही होगी खाद की बिक्री
प्रशासन ने उर्वरक विक्रेताओं को POS मशीन के माध्यम से बिक्री सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। किसानों की खतौनी का सत्यापन करने के बाद POS मशीन पर अंगूठा लगवाकर ही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उर्वरक बेचने को कहा गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकार द्वारा किसानों के लिए उपलब्ध कराई जा रही सब्सिडी का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचे।
POS आधारित बिक्री से यह भी पता लगाया जा सकता है कि किस किसान ने कितना उर्वरक खरीदा है। इससे उर्वरक की अनधिकृत बिक्री और कालाबाजारी पर निगरानी रखने में प्रशासन को मदद मिलती है।
किसानों से अपील, कालाबाजारी की तुरंत करें शिकायत
जिला प्रशासन ने किसानों को आश्वस्त किया है कि जनपद में यूरिया और DAP की पर्याप्त उपलब्धता है। किसानों से अपील की गई है कि वे घबराकर अधिक मात्रा में खाद खरीदने या निर्धारित आवश्यकता से अधिक स्टॉक करने से बचें।
प्रशासन ने किसानों से यह भी कहा है कि यदि कोई दुकानदार निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद बेचता है, खाद उपलब्ध होने के बावजूद कमी बताता है, जबरन किसी अन्य उत्पाद की खरीद के लिए दबाव डालता है या खाद की कालाबाजारी करता है तो इसकी शिकायत तत्काल प्रशासन से की जाए।
शिकायत दर्ज कराने के लिए विकास भवन के चतुर्थ तल स्थित कमरा संख्या 402 के कंट्रोल रूम में संपर्क किया जा सकता है। प्रशासन ने शिकायत के लिए 7007259547 और 9369560120 नंबर जारी किए हैं।
किसानों के हित में लगातार जारी रहेगी निगरानी
प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था पर निगरानी बढ़ा दी गई है। खरीफ सीजन में किसानों को समय पर यूरिया, DAP और अन्य जरूरी उर्वरक उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
अधिकारियों का कहना है कि उर्वरक की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता और निर्धारित मूल्य पर बिक्री सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से बिक्री केंद्रों की जांच, स्टॉक का सत्यापन, नमूने एकत्र करने और POS मशीन के जरिए बिक्री की निगरानी की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उर्वरक की कालाबाजारी और ओवररेटिंग पर समय रहते कार्रवाई की जाए तो किसानों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाया जा सकता है। साथ ही, नियमित निरीक्षण से उर्वरक विक्रेताओं में भी नियमों के पालन को लेकर जवाबदेही बढ़ती है।
जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में भी उर्वरक बिक्री केंद्रों और गोदामों की जांच जारी रह सकती है। किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

