वैश्विक कृषि विज्ञान कंपनी Corteva Agriscience ने भारतीय किसानों के लिए धान की फसल सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया कदम उठाते हुए अपना लेटेस्ट इनोवेशन “मैविलॉन®” लॉन्च किया है। यह प्रोडक्ट खासतौर पर ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH) के प्रभावी और लंबे समय तक नियंत्रण के लिए विकसित किया गया है। BPH धान की खेती में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले कीटों में से एक माना जाता है, जो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादक देशों में शामिल है और करोड़ों किसानों की आजीविका धान की खेती पर निर्भर करती है। ऐसे में BPH जैसे कीट किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। यह कीट पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है, जिससे पौधों में “हॉपर बर्न” की स्थिति पैदा होती है और पूरी फसल सूखने लगती है। इसके कारण किसानों को उत्पादन में भारी गिरावट का सामना करना पड़ता है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कॉर्टेवा एग्रीसाइंस ने मैविलॉन® को भारतीय बाजार में पेश किया है। कंपनी के अनुसार, यह BPH मैनेजमेंट के लिए अपनी तरह का पहला एडवांस्ड दानेदार (Granular) फॉर्मूलेशन है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसान इसे आसानी से खेतों में उपयोग कर सकें और बार-बार स्प्रे करने की आवश्यकता कम हो।
मैविलॉन® की सबसे बड़ी खासियत इसका डुअल एक्टिव फॉर्मूला है। इसमें ट्राइफ्लुमेज़ोपाइरिम 0.45% w/w और क्लोरेंट्रानिलिप्रोएल 0.5% w/w GR का संयोजन शामिल है। यह कॉम्बिनेशन न केवल BPH पर तेजी से असर करता है, बल्कि लंबे समय तक फसल की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। कंपनी का दावा है कि यह समाधान धान की फसल को पूरे बढ़ते मौसम में बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में किसानों को ऐसे समाधान की आवश्यकता है जो केवल कीट नियंत्रण तक सीमित न हों, बल्कि फसल की समग्र सेहत को भी बेहतर बनाएँ। मैविलॉन® इसी सोच के साथ विकसित किया गया है। यह प्रोडक्ट डेड हार्ट्स को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है। इसके साथ ही यह हेल्दी टिलर डेवलपमेंट को बढ़ावा देता है, जो अधिक बालियों और बेहतर उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
धान की खेती में मजबूत पौध संरचना और बेहतर पोषण बेहद जरूरी होते हैं। मैविलॉन® पौधों की मजबूती बढ़ाने में भी मदद करता है, जिससे फसल प्रतिकूल परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाती है। इसका सकारात्मक असर अंततः उत्पादन और क्वालिटी दोनों पर दिखाई देता है। किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाला धान प्राप्त होने की संभावना बढ़ती है, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलने में भी मदद मिल सकती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बदलते मौसम, बढ़ते कीट प्रकोप और उत्पादन लागत में वृद्धि के बीच किसानों को आधुनिक और टिकाऊ तकनीकों की जरूरत है। ऐसे में एडवांस्ड फॉर्मूलेशन वाले उत्पाद खेती को अधिक सुरक्षित और लाभदायक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कॉर्टेवा एग्रीसाइंस का यह नया इनोवेशन भारतीय धान किसानों के लिए एक उपयोगी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। यदि इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह न केवल कीट प्रबंधन को आसान बना सकता है, बल्कि किसानों की लागत कम करने और बेहतर उत्पादन हासिल करने में भी सहायक साबित हो सकता है।


