केंद्र सरकार द्वारा मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक और सशक्त बनाने के उद्देश्य से लागू मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) के तहत तमिलनाडु सहित देशभर में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2018-19 से शुरू इस योजना के तहत कुल 7522.48 करोड़ रुपये की निधि निर्धारित की गई है, जिसका उद्देश्य मत्स्य अवसंरचना का निर्माण और सुदृढ़ीकरण करना है।
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एफआईडीएफ के तहत अब तक देशभर में 228 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनकी कुल लागत 5559.54 करोड़ रुपये है। इनमें से ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र परियोजना लागत 4351.86 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
तमिलनाडु इस योजना का प्रमुख लाभार्थी राज्य बनकर उभरा है। राज्य में 108 परियोजनाओं को 2404.03 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिनमें से 60 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि शेष विभिन्न चरणों में कार्यान्वित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं के तहत मत्स्य बंदरगाह, मछली उतारने के केंद्र, शीत भंडारण, बर्फ संयंत्र और आधुनिक मछली बाजार जैसी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
एफआईडीएफ योजना के अंतर्गत पात्र संस्थाओं को नोडल ऋण देने वाली संस्थाओं के माध्यम से 5 प्रतिशत से कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा 3 प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी भी प्रदान की जाती है, जिससे राज्यों और निजी निवेशकों को परियोजनाओं में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
देश के अन्य राज्यों में भी इस योजना के तहत उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। महाराष्ट्र में 42 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जबकि गुजरात, केरल और ओडिशा जैसे राज्यों में भी मत्स्य अवसंरचना के विकास के लिए कई परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
परियोजनाओं के प्रकार पर नजर डालें तो मछली पकड़ने के बंदरगाहों और संबंधित सुविधाओं पर सबसे अधिक निवेश किया गया है, जिसकी लागत 3800 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा मछली प्रसंस्करण इकाइयों, हैचरी, प्रशिक्षण केंद्र, मछली बीज फार्मों के आधुनिकीकरण और शीत श्रृंखला के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार की एक अन्य महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के साथ मिलकर एफआईडीएफ एक पूरक भूमिका निभा रहा है। जहां एफआईडीएफ अवसंरचना के विकास पर केंद्रित है, वहीं पीएमएमएसवाई विकासात्मक सहायता प्रदान करता है। इन दोनों योजनाओं के संयुक्त प्रयासों से मत्स्य क्षेत्र में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, देश में मछली उत्पादन वर्ष 2019-20 के 141.64 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है। इसी प्रकार समुद्री खाद्य निर्यात भी 46,666 करोड़ रुपये से बढ़कर 62,408 करोड़ रुपये हो गया है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य न केवल उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि मछुआरों और मछली पालकों की आय में वृद्धि, रोजगार सृजन और निर्यात को बढ़ावा देना भी है।
उन्होंने यह भी बताया कि एफआईडीएफ के तहत विकसित की जा रही सुविधाएं जैसे बंदरगाह, कोल्ड चेन, हैचरी और प्रशिक्षण केंद्र, मत्स्य क्षेत्र को तकनीकी रूप से सक्षम बनाएंगे और भविष्य में सतत विकास सुनिश्चित करेंगे।
कुल मिलाकर, एफआईडीएफ और पीएमएमएसवाई जैसी योजनाएं देश के मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा दे रही हैं, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत मत्स्य उत्पादक और निर्यातक देश के रूप में उभर रहा है।

