“शासन में सुधार प्रशासनिक परिवर्तन नहीं, बल्कि ऐसे उपकरण हैं जो किसानों और कृषि क्षेत्र तक वास्तविक प्रभाव पहुंचाते हैं।” यह बात डॉ. एम. एल. जाट, सचिव (DARE) एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने मिशन कर्मयोगी – साधना सप्ताह के तहत आयोजित वेबिनार “Reforms in Governance @ ICAR” में कही।
डॉ. जत ने बताया कि ICAR तेजी से एक पारदर्शी, कुशल, प्रौद्योगिकी-चालित और किसान-केंद्रित संस्था के रूप में विकसित हो रहा है। मिशन कर्मयोगी शासन की सोच को “प्रक्रिया आधारित” से “प्रदर्शन आधारित” मॉडल में बदल रहा है, जिसका लक्ष्य है—सुधारों का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुँचना। यह परिवर्तन विकसित भारत 2047 की दृष्टि के अनुरूप है।
उन्होंने बताया कि ICAR में क्षमता निर्माण की दिशा में तेजी से प्रगति हुई है और 10,500 से अधिक कर्मचारी iGOT प्लेटफ़ॉर्म पर निरंतर सीखने के लिए जुड़ चुके हैं। इससे ICAR का मानव संसाधन डिजिटल कृषि, AI, स्वचालन और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली के अनुरूप तैयार हो रहा है।
भारत का कृषि अनुसंधान तंत्र, जिसमें 114 ICAR संस्थान, 151 क्षेत्रीय स्टेशन और 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) शामिल हैं, अब अधिक जवाबदेह और परिणाम-उन्मुख बनाया जा रहा है। डिजिटल डैशबोर्ड, AI उपकरण और डेटा एनालिटिक्स जैसे治理 उपकरण ICAR को तेज, पारदर्शी और वास्तविक समय मॉनिटरिंग सक्षम बना रहे हैं।
वेबिनार में उन्होंने शासन सुधारों के प्रमुख क्षेत्रों को भी रेखांकित किया—
• सतत कृषि उत्पादन,
• फार्म मशीनीकरण,
• पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन,
• एग्रोफॉरेस्ट्री,
• कार्बन-न्यूट्रल कृषि,
• जलवायु-लचीली तकनीकें।
डॉ. जत ने कहा कि दालें, तिलहन और मोटे अनाज (मिलेट्स) देश की पोषण सुरक्षा और आयात निर्भरता कम करने के लिए प्राथमिकता में रहेंगे।
उन्होंने ICAR की प्रमुख पहलों — प्लांट हेल्थ मिशन, SEHAT, भारत विस्तार, MELIA ढांचा और नई डेटा मैनेजमेंट नीति — को भी किसानों तक सेवाओं में पारदर्शिता और प्रभाव बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. जत ने कहा कि ICAR का लक्ष्य है कि शासन सुधारों के माध्यम से संगठन को किसान-केंद्रित, पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभाव-उन्मुख बनाया जाए, ताकि सुधारों का प्रत्यक्ष लाभ किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका पर दिखे।

