अनिश्चित मौसम और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संभावित प्रभावों को देखते हुए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने किसानों और वैज्ञानिकों को कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क और तैयार रहने का आह्वान किया है। विश्वविद्यालय में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में कृषि अनुसंधान और विस्तार कार्यों की समीक्षा करते हुए विशेषज्ञों ने भविष्य में आने वाली समस्याओं के समाधान पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक की अध्यक्षता डॉ. एम.एस. भुल्लर, निदेशक (विस्तार शिक्षा) ने की, जिसमें क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), फार्म सलाह सेवा केंद्रों के प्रभारी, विभिन्न विभागों के प्रमुख और संकाय सदस्य शामिल हुए।
इस अवसर पर डॉ. सतबीर सिंह गोसल, कुलपति ने किसानों को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें किसी भी परिस्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हर समस्या का समाधान उपलब्ध है। उन्होंने वैज्ञानिकों से अपील की कि वे किसानों के साथ लगातार संपर्क में रहें और विशेष रूप से मौसम से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान प्रदान करें।
वहीं डॉ. ए.एस. धत्त, निदेशक (अनुसंधान) ने जलवायु, जल और आर्थिक दृष्टि से उपयुक्त फसल किस्मों और कृषि तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संघर्षों के कारण आयात-निर्यात प्रभावित हो सकता है और कृषि उत्पादों की कीमतों में वृद्धि की संभावना है। ऐसे में उर्वरकों की संभावित कमी से निपटने के लिए जैव उर्वरकों और वर्मी-कम्पोस्ट जैसे विकल्पों को अपनाना बेहद जरूरी है।
डॉ. धत्त ने जानकारी दी कि PAU ने लगभग 30 प्रमुख फसलों के लिए किफायती जैव उर्वरक विकसित किए हैं, जो लुधियाना परिसर और विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों पर उपलब्ध हैं। ये जैव उर्वरक लंबे समय से मृदा स्वास्थ्य सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अपने स्वागत भाषण में डॉ. भुल्लर ने विस्तार वैज्ञानिकों से किसानों की समस्याओं और जरूरतों पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए उर्वरकों की कमी और कृषि लागत में वृद्धि जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। ऐसे में किसानों को वर्मी-कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित करने और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने की सलाह दी जानी चाहिए।
बैठक में गेहूं की कटाई, खराब मौसम से फसलों को होने वाले नुकसान, कपास की पैदावार, धान के अवशेष प्रबंधन और जल दक्ष किस्मों के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इन विषयों पर समय रहते उचित प्रबंधन रणनीतियां अपनाने की आवश्यकता बताई।
इस दौरान डॉ. जी.एस. मंगत, डॉ. महेश कुमार, डॉ. जी.पी.एस. सोढ़ी और डॉ. पी.एस. संधू सहित अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने भी अपने विचार साझा किए।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय का यह प्रयास दर्शाता है कि बदलते मौसम और वैश्विक परिस्थितियों के बीच वैज्ञानिक सलाह, नवाचार और सतर्कता के माध्यम से कृषि क्षेत्र को सुरक्षित और मजबूत बनाया जा सकता है। किसानों को समय पर जानकारी और सही तकनीक अपनाकर आने वाली चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

