प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” विजन को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 9–10 अप्रैल को दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन का आयोजन किया गया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र में चल रही प्रमुख पहलों की समीक्षा करना और उन्हें जिला स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति तय करना है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भुटानी ने स्पष्ट किया कि अब समय केवल लक्ष्यों की घोषणा का नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर ठोस परिणामों में बदलने का है। उन्होंने कहा कि देशभर में अक्टूबर 2024 से आयोजित कार्यशालाओं की यह श्रृंखला सहकारिता क्षेत्र में समन्वय और साझा समझ विकसित करने में सफल रही है, लेकिन अब इन पहलों को समयबद्ध कार्ययोजनाओं के साथ जिलों में लागू करना जरूरी है।
डॉ. भुटानी ने विशेष रूप से दो लाख प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल की शुरुआत जिस गति से हुई थी, उसे बनाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे इस दिशा में समन्वित प्रयास तेज करें और लक्ष्य प्राप्ति के लिए नए उत्साह के साथ काम करें। PACS के विस्तार और सशक्तिकरण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अहम बताया गया।
सम्मेलन में PACS के कंप्यूटरीकरण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। केंद्रीय सचिव ने बताया कि पिछले 6–9 महीनों में इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन इसे स्थायी बनाने की चुनौती अभी बाकी है। उन्होंने राज्यों को सलाह दी कि वे इस प्रणाली को दीर्घकालिक रूप से अपनाएं, ताकि मार्च 2027 के बाद भी इसका लाभ निरंतर मिलता रहे।
सहकारी बैंकिंग सुधारों पर जोर देते हुए डॉ. भुटानी ने ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाने और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सहकारिता संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए समय पर निर्णय, तकनीकी नवाचार और निरंतर प्रतिबद्धता जरूरी है।
सम्मेलन के दौरान सहकारिता क्षेत्र में चल रही विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इस सत्र में भारतीय खाद्य निगम (FCI), नाबार्ड (NABARD), NAFED और अन्य प्रमुख एजेंसियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। इसमें भंडारण क्षमता बढ़ाने, साइट चयन, वित्तपोषण और eNWR आधारित प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
सम्मेलन में निष्क्रिय PACS को पुनर्जीवित करने और उन्हें बहु-सेवा केंद्रों में बदलने की रणनीति पर भी विचार किया गया। इसके तहत बीज वितरण, उर्वरक आपूर्ति, कॉमन सर्विस सेंटर, जन औषधि केंद्र और डिजिटल सेवाओं को शामिल करने की योजना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और सेवाओं की उपलब्धता दोनों बढ़ेंगी।
इसके अलावा, सहकारी बैंकिंग प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए साइबर सुरक्षा, आधार सीडिंग, डोरस्टेप बैंकिंग और डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया गया। DCCBs के माध्यम से ऋण प्रवाह को बेहतर बनाने और वित्तीय सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
अमूल और सारस्वत सहकारी बैंक जैसे सफल मॉडलों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए सम्मेलन में सहकारिता क्षेत्र में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करने की बात कही गई। इन उदाहरणों के आधार पर सुधारों के अगले चरण को तेजी से लागू करने का आह्वान किया गया।
कुल मिलाकर, वाराणसी में आयोजित यह राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है। जिला स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी एकीकरण और संस्थागत मजबूती के जरिए देश में सहकारिता आधारित समावेशी और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था को साकार करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

