भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को नई मजबूती देते हुए प्रसार भारती के अंतर्गत दूरदर्शन ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। 7 अप्रैल को दूरदर्शन भवन, नई दिल्ली में हुए इस समझौते का उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक सामग्री की वैश्विक पहुंच को बढ़ाना और उसे आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से दुनिया भर तक पहुंचाना है।
इस एमओयू पर दूरदर्शन के महानिदेशक के. सतीश नंबूदिरीपाद और आईसीसीआर की महानिदेशक के. नंदिनी सिंगला ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दोनों संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह साझेदारी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
समझौते के तहत, आईसीसीआर देश-विदेश में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रस्तुतियों और आयोजनों से संबंधित सामग्री उपलब्ध कराएगा। इसमें भारतीय दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों और विभिन्न देशों में स्थित भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों द्वारा आयोजित कार्यक्रम भी शामिल होंगे। वहीं, दूरदर्शन इस सामग्री का प्रसारण अपने व्यापक टेलीविजन चैनलों, रेडियो नेटवर्क, ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए करेगा।
इस सहयोग का एक प्रमुख पहलू यह है कि दोनों संस्थाएं सामग्री के डिजिटल अधिकारों सहित संयुक्त स्वामित्व रखेंगी। इससे न केवल सामग्री के दीर्घकालिक उपयोग और संग्रहण में सुविधा होगी, बल्कि भविष्य में इसके पुनः प्रसारण और व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। यह व्यवस्था सांस्कृतिक कार्यक्रमों को अधिक व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में सहायक होगी।
दूरदर्शन इस सामग्री के प्रसारण से पहले और बाद में व्यापक प्रचार-प्रसार भी करेगा, जिससे दर्शकों की सहभागिता बढ़ाई जा सके। खासतौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ध्यान केंद्रित करते हुए, युवा दर्शकों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
यह समझौता तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इस अवधि के दौरान, दोनों संस्थाएं मिलकर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेंगी, जिससे भारत की विविध परंपराएं, कला रूप और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां दुनिया भर में नई पहचान हासिल कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की “सॉफ्ट पावर” को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आधुनिक मीडिया और डिजिटल तकनीकों के जरिए सांस्कृतिक कूटनीति को नई दिशा मिलेगी, जिससे भारत की छवि एक समृद्ध सांस्कृतिक राष्ट्र के रूप में और सुदृढ़ होगी।
कुल मिलाकर, दूरदर्शन और आईसीसीआर के बीच यह सहयोग भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक दूरगामी और प्रभावी कदम साबित होगा, जो आने वाले वर्षों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

