सिविल सेवा दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन में आयोजित कृषि विषयक पैनल चर्चा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने किसानों की आर्थिक स्थिति, कृषि वित्त व्यवस्था और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट और व्यावहारिक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल कर्ज नहीं, बल्कि भरोसेमंद और सरल व्यवस्था की आवश्यकता है, जिससे वे बिना किसी जटिलता के अपने कृषि कार्यों को आगे बढ़ा सकें।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी योजनाओं ने किसानों को साहूकारों के चंगुल से निकालने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन आज भी बैंकिंग प्रक्रिया पूरी तरह सहज नहीं हो पाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऋण लेने की प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी और मानवीय बनाया जाना चाहिए। कई बार किसानों को कागजी औपचारिकताओं, तहसील और राजस्व रिकॉर्ड जैसी प्रक्रियाओं में उलझना पड़ता है, जिससे उनका समय और संसाधन दोनों प्रभावित होते हैं।
श्री चौहान ने व्यवस्था में संवेदनशीलता की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसान किसी भी तरह से याचक नहीं है, बल्कि वह अपने अधिकार और सम्मान के साथ व्यवस्था के पास आता है। ऐसे में अधिकारियों और बैंकिंग तंत्र को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक किसान ब्याज के बोझ तले दबकर मूल राशि से कई गुना अधिक कर्ज में फंस गया, जिसे व्यावहारिक समाधान जैसे वन टाइम सेटलमेंट के जरिए राहत दी जा सकती है।
तकनीक के उपयोग पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी है, लेकिन उसकी सीमाओं को समझना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने गेहूं खरीद के दौरान सैटेलाइट सत्यापन में आई समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीकी खामियों के कारण किसानों को परेशान नहीं होना चाहिए। इसके लिए विभिन्न संस्थाओं को मिलकर संतुलित और व्यावहारिक समाधान विकसित करना होगा।
ग्रामीण बैंकों में स्टाफ की कमी को एक बड़ी चुनौती बताते हुए श्री चौहान ने कहा कि योजनाओं के बढ़ते दायरे और डिजिटल भुगतान के विस्तार के बावजूद कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त नहीं है। किसान कई किलोमीटर दूर से बैंक पहुंचता है, लेकिन लंबी कतारों और सीमित संसाधनों के कारण उसे निराश होकर लौटना पड़ता है। ऐसे में मानव संसाधन का उचित आकलन और तैनाती बेहद जरूरी है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल KCC सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। यदि किसान उच्च मूल्य वाली फसलों या उन्नत तकनीकों जैसे पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई या बागवानी की ओर बढ़ना चाहता है, तो उसे अधिक निवेश की जरूरत होती है। ऐसे प्रगतिशील किसानों को अतिरिक्त वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्री ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को सबसे प्रभावी समाधान बताया। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के लिए केवल अनाज उत्पादन पर्याप्त नहीं है। उन्हें पशुपालन, मछली पालन, बकरी पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को अपनाना होगा, जिससे आय के कई स्रोत विकसित हो सकें।
वेयरहाउस रसीद आधारित ऋण योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों को मजबूरी में फसल बेचने से बचा सकती है, बशर्ते इसकी प्रक्रिया सरल और सुलभ हो। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे केवल आंकड़ों पर निर्भर न रहें, बल्कि योजनाओं के वास्तविक प्रभाव और जमीनी हकीकत पर ध्यान दें।
अपने संबोधन के अंत में श्री चौहान ने सिविल सेवा अधिकारियों से आत्मविश्लेषण, नवाचार और बेहतर क्रियान्वयन की अपील करते हुए कहा कि देश की सेवा के लिए उपलब्ध संसाधनों और क्षमताओं का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि किसानों तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंच सके।

