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Home कृषि समाचार

प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान को शिवराज सिंह चौहान ने बताया “राष्ट्र पुनर्निर्माण का महायज्ञ”, कृषि मंत्रालय में बड़े बदलावों की शुरुआत

Shivraj Singh Chouhan described Prime Minister Modi's call as a "great yagya for nation-building," initiating major changes in the Agriculture Ministry.

Emran Khan by Emran Khan
May 15, 2026
in कृषि समाचार
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प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान को शिवराज सिंह चौहान ने बताया “राष्ट्र पुनर्निर्माण का महायज्ञ”, कृषि मंत्रालय में बड़े बदलावों की शुरुआत
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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और स्वदेशी को बढ़ावा देने के आह्वान को “राष्ट्र के पुनर्निर्माण का महायज्ञ” बताया है। कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने मंत्रालय, आईसीएआर, ग्रामीण विकास मंत्रालय और भूमि संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए, जिनका उद्देश्य संसाधनों की बचत, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा और टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत करना है।

बैठक के दौरान श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे राष्ट्रभक्त नेता हैं जो पहले स्वयं को कसौटी पर कसते हैं और उसके बाद देशवासियों से कोई आह्वान करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का हर संदेश राष्ट्रहित और भविष्य के भारत को मजबूत बनाने की दिशा में होता है, इसलिए सभी अधिकारियों और नागरिकों का कर्तव्य है कि वे इन संकल्पों को जनआंदोलन का रूप दें।

केंद्रीय मंत्री ने मंत्रालय स्तर पर सादगी और संसाधनों के संतुलित उपयोग की शुरुआत खुद से करते हुए अपने वाहनों के काफिले को कम करने का निर्णय लिया है। अब उनके काफिले में केवल तीन वाहन शामिल रहेंगे। उन्होंने अधिकारियों से भी अनावश्यक खर्चों को कम करने और सरकारी संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की अपील की।

बैठक में “वोकल फॉर लोकल” और “स्वदेशी अभियान” को नई गति देने पर विशेष जोर दिया गया। श्री चौहान ने निर्देश दिए कि मंत्रालय के सभी अधिकारी और कर्मचारी स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करें और कम से कम पांच अन्य परिवारों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और छोटे उद्योगों तथा ग्रामीण उद्यमों को नई ताकत मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री ने अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने की सलाह देते हुए कहा कि केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही विदेश यात्राएं की जाएं। अधिकतर बैठकों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-ऑफिस प्रणाली को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही उन्होंने “वर्क फ्रॉम होम” और हाइब्रिड कार्य प्रणाली की संभावनाओं का आकलन करने को कहा, लेकिन स्पष्ट किया कि इससे सरकारी कार्यों की गुणवत्ता और गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

श्री चौहान ने देशवासियों से गर्मियों की छुट्टियों में विदेशी पर्यटन के बजाय भारत के भीतर पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध देश है और स्वदेशी पर्यटन को बढ़ावा देना भी राष्ट्र निर्माण में योगदान है।

बैठक में सार्वजनिक परिवहन और ई-वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। मंत्रालय स्तर पर मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों और बैठकों में स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को प्राथमिकता देने तथा मोटे अनाज और देश में उत्पादित खाद्य तेलों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई।

कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार “खेत बचाओ अभियान” शुरू करेगी, जिसके माध्यम से किसानों को संतुलित और विवेकपूर्ण उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक किया जाएगा।

श्री चौहान ने बताया कि देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, लेकिन आवश्यकता इस बात की है कि उनका वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग हो। उन्होंने कहा कि आईसीएआर के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में 1657 विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो गांव-गांव जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और संतुलित पोषण प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षण देंगी। इसके साथ ही “खेत बचाओ समितियों” का भी गठन किया जाएगा।

प्राकृतिक खेती को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सही तकनीक और वैज्ञानिक तरीके अपनाने पर उत्पादन में कमी नहीं आती। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस विषय पर बड़े स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में देश में लगभग 18 लाख किसान 8 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और सरकार का लक्ष्य है कि देश की कम से कम 25 प्रतिशत कृषि भूमि पर प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए।

उन्होंने यह भी बताया कि वे देशभर के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखेंगे और उनसे अपनी कम से कम 25 प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक या जैविक खेती अपनाने का आग्रह करेंगे।

बैठक के अंत में श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राष्ट्रहित में उठाया गया हर छोटा कदम देश के भविष्य को मजबूत बनाता है। उन्होंने अधिकारियों से जल्द से जल्द विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा ताकि कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय देश के सामने एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत कर सके।

 

Tags: AgricultureFarmingShivraj Singh
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