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Home कृषि समाचार

धमतारी में वाटरशेड विकास परियोजनाओं की समीक्षा, किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

Watershed development projects in Dhamtari reviewed, focus on increasing farmers' income

Emran Khan by Emran Khan
May 16, 2026
in कृषि समाचार
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धमतारी में वाटरशेड विकास परियोजनाओं की समीक्षा, किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
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छत्तीसगढ़ के धमतारी जिले में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत चल रही वाटरशेड विकास परियोजनाओं की समीक्षा के लिए भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव Narendra Bhushan ने उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान सुरक्षात्मक सिंचाई, मृदा एवं जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं का निरीक्षण किया गया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के इस प्रतिनिधिमंडल में संयुक्त सचिव Nitin Khade और जिला अधिकारी Abinash Mishra भी शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने धमतारी जिले के मगरलोड ब्लॉक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY 2.0) के वाटरशेड विकास घटक के तहत किए जा रहे कार्यों का विस्तृत जायजा लिया।

स्टॉप डैम से किसानों को बड़ी राहत

प्रतिनिधिमंडल ने सांकरा गांव में वाटरशेड विकास घटक और मनरेगा के संयुक्त प्रयासों से निर्मित स्टॉप डैम का निरीक्षण किया। लगभग 40.34 लाख रुपये की लागत से बने इस डैम ने क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया है।

अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना से लगभग 80 से 85 एकड़ कृषि भूमि सिंचित हो रही है और 50 से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिला है। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी सुधार देखने को मिला है।

सिंचाई नहर से बढ़ी खेती की क्षमता

बेलाउदी गांव में प्रतिनिधिमंडल ने 430 मीटर लंबी सिंचाई नहर की समीक्षा की, जिसे करीब 20.20 लाख रुपये की लागत से विकसित किया गया है। यह नहर वर्तमान में लगभग 150 एकड़ भूमि को सिंचित कर रही है।

इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे न केवल खेतों तक पानी पहुंच रहा है, बल्कि मृदा अपरदन यानी मिट्टी के कटाव को भी काफी हद तक नियंत्रित किया गया है। किसानों ने बताया कि पहले बारिश के समय मिट्टी बहने से खेती प्रभावित होती थी, लेकिन अब स्थिति बेहतर हुई है।

वृक्षारोपण और जल संरक्षण पर विशेष ध्यान

सौंगा गांव में प्रतिनिधिमंडल ने पांच एकड़ क्षेत्र में विकसित वृक्षारोपण परियोजना का निरीक्षण किया। यहां नदी के बीच स्थित द्वीप पर 1,050 अमरूद और नींबू के पौधे लगाए गए हैं। अधिकारियों ने इसे आजीविका बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

हालांकि क्षेत्र में जल संकट की समस्या को देखते हुए सचिव नरेंद्र भूषण ने छोटे-छोटे तालाब विकसित करने की सलाह दी, ताकि सिंचाई और पौधों के लिए पानी की स्थायी व्यवस्था हो सके।

अमृत सरोवर परियोजनाओं की भी हुई समीक्षा

प्रतिनिधिमंडल ने बोदरा और गदाडीह गांवों में “अमृत सरोवर” परियोजनाओं का भी निरीक्षण किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमृत सरोवर जैसी परियोजनाएं ग्रामीण जल संकट को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इससे वर्षा जल का संरक्षण होगा और किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर संसाधन मिलेंगे।

महानदी आधारित लिफ्ट सिंचाई परियोजना बनी मॉडल

इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण गदाडीह गांव की लिफ्ट सिंचाई परियोजना रही। यह परियोजना महानदी के जल का उपयोग कर लगभग 85 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई कर रही है और करीब 250 किसानों को लाभ पहुंचा रही है।

सचिव नरेंद्र भूषण ने इस पहल को “सफल मॉडल” बताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसी परियोजनाओं का दस्तावेजीकरण किया जाए ताकि भविष्य में इन्हें राज्य स्तर पर मॉडल के रूप में अपनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि जल संसाधनों का वैज्ञानिक और सामुदायिक उपयोग किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

सब्जी खेती और बागवानी को मिला प्रोत्साहन

दौरे के अंतिम चरण में प्रतिनिधिमंडल ने बेलाउदी गांव में सब्जी उत्पादन करने वाले खेतों का निरीक्षण किया। यहां किसानों द्वारा अपनाई गई आधुनिक बागवानी तकनीकों और सब्जी खेती की सराहना की गई।

अधिकारियों ने कहा कि परंपरागत खेती के साथ बागवानी और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने से किसानों की आय में तेजी से वृद्धि हो सकती है। इससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।

जल संरक्षण से बदलेगी ग्रामीण तस्वीर

धमतारी जिले में चल रही वाटरशेड विकास परियोजनाएं यह दिखाती हैं कि यदि जल संरक्षण, सिंचाई और सामुदायिक भागीदारी को साथ लेकर योजनाएं लागू की जाएं तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।

स्टॉप डैम, सिंचाई नहर, अमृत सरोवर और लिफ्ट सिंचाई जैसी परियोजनाएं किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मॉडल देश के अन्य जल संकट वाले क्षेत्रों में भी लागू किए जाएं तो कृषि उत्पादन और किसानों की आय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

 

Tags: #PunjabFarming #CropDiversification #MaizeFarming #PaddyToMaize #FarmersScheme #AgricultureNews #WaterCrisis #PunjabGovernment #FarmersIncome #SustainableFarming
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