देश की अग्रणी एकीकृत चीनी निर्माण कंपनियों में शामिल Balrampur Chini Mills Limited (BCML) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही एवं पूरे वित्तीय वर्ष के वित्तीय परिणाम घोषित किए हैं। कंपनी ने चीनी बिक्री में वृद्धि, उत्पादन क्षमता विस्तार और भविष्य की हरित परियोजनाओं के दम पर स्थिर प्रदर्शन दर्ज किया है। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य में लगभग 8 प्रतिशत वृद्धि और एथेनॉल खरीद मूल्य में लगातार तीसरे वर्ष भी कोई बढ़ोतरी न होने से कंपनी के मार्जिन पर दबाव देखने को मिला।
कंपनी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कुल राजस्व 6,271.15 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 5,415.38 करोड़ रुपये की तुलना में 15.80 प्रतिशत अधिक है। वहीं EBITDA 741.28 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.26 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। हालांकि कुल व्यापक आय (Total Comprehensive Income) 380.35 करोड़ रुपये रही, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट दर्ज की गई।
चौथी तिमाही के दौरान कंपनी का राजस्व 1,603.99 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 1,503.68 करोड़ रुपये था। हालांकि EBITDA और कुल व्यापक आय में कुछ कमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उत्पादन लागत और एथेनॉल नीति से जुड़े मुद्दों का प्रभाव कंपनी की लाभप्रदता पर पड़ा है।
कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक Vivek Saraogi ने कहा कि चीनी क्षेत्र ने इस तिमाही में स्थिर प्रदर्शन किया है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ने का मूल्य 370 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया। इससे उत्पादन लागत में वृद्धि हुई और मार्जिन प्रभावित हुए। हालांकि बेहतर चीनी बिक्री और कीमतों में मामूली सुधार से स्थिति को कुछ हद तक संतुलित किया जा सका।
उन्होंने बताया कि चौथी तिमाही के दौरान कंपनी ने लगभग 622.2 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1.6 प्रतिशत अधिक रही। पूरे सीजन में कंपनी ने 1043 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की, जो पिछले सीजन से लगभग 5.2 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि चीनी रिकवरी में हल्की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी की ग्रॉस शुगर रिकवरी 11.24 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष यह 11.28 प्रतिशत थी।
एथेनॉल क्षेत्र को लेकर कंपनी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने लगातार तीन वर्षों से जूस एवं बी-हैवी रूट से बनने वाले एथेनॉल की खरीद कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की है। इसका असर डिस्टिलरी कारोबार के प्रदर्शन पर पड़ा है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एथेनॉल मूल्य में संशोधन नहीं किया गया तो चीनी मिलों के लिए एथेनॉल उत्पादन की लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है।
कंपनी ने देश में चीनी उत्पादन एवं निर्यात की स्थिति पर भी जानकारी साझा की। BCML के अनुसार भारत में एथेनॉल डायवर्जन के बाद शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 28 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। घरेलू खपत लगभग 28 मिलियन मीट्रिक टन रहने के साथ-साथ करीब 0.7 मिलियन मीट्रिक टन चीनी निर्यात होने की संभावना है। कंपनी ने बताया कि सरकार ने 30 सितंबर 2026 तक चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, जिसके चलते आवंटित निर्यात कोटे का केवल सीमित हिस्सा ही निर्यात हो सकेगा।
BCML ने अपनी महत्वाकांक्षी पॉली लैक्टिक एसिड (PLA) परियोजना की प्रगति की भी जानकारी दी। कंपनी भारत का पहला 80,000 टन क्षमता वाला PLA प्लांट स्थापित कर रही है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 3,080 करोड़ रुपये है। कंपनी के अनुसार इस परियोजना का कार्य तेजी से जारी है और इसके वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है। यह परियोजना पर्यावरण-अनुकूल और बायोडिग्रेडेबल उत्पादों के निर्माण की दिशा में देश की बड़ी पहल मानी जा रही है।
कंपनी के बोर्ड ने हाल ही में 450 करोड़ रुपये की प्रेफरेंशियल इक्विटी शेयर जारी करने की भी मंजूरी दी है। यह राशि मुख्य रूप से PLA परियोजना के पूंजीगत व्यय और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए उपयोग की जाएगी। खास बात यह है कि कंपनी के प्रमोटर भी इसमें लगभग 193 करोड़ रुपये का योगदान देंगे, जिससे कंपनी में उनकी मजबूत भागीदारी और विश्वास स्पष्ट होता है।
BCML ने कहा कि उसका एकीकृत व्यवसाय मॉडल बदलती परिस्थितियों और उद्योग की चुनौतियों के बीच लगातार मजबूत बना हुआ है। कंपनी चीनी, डिस्टिलरी, को-जनरेशन और अब PLA जैसे विविध क्षेत्रों में विस्तार कर रही है, जिससे भविष्य में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी।
कंपनी के अनुसार वह “हर गन्ने से अधिकतम मूल्य सृजन” की रणनीति पर कार्य कर रही है और आने वाले वर्षों में हरित तकनीकों, जैव-आधारित उत्पादों तथा ऊर्जा दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। BCML का मानना है कि टिकाऊ कृषि और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक विकास ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

