खरीफ 2026 सीजन की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार ने किसानों के लिए राहत भरी खबर दी है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहे दबाव के बावजूद सरकार का कहना है कि देश में उर्वरकों (फर्टिलाइजर) की पर्याप्त उपलब्धता है और खरीफ फसलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उत्पादन, समय पर आयात और लगातार निगरानी के कारण खाद की आपूर्ति को लेकर किसी तरह की चिंता की आवश्यकता नहीं है।
पश्चिम एशिया की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने कहा कि देश में उर्वरकों का कुल स्टॉक संतोषजनक स्तर पर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
अतिरिक्त सचिव के अनुसार, कृषि मंत्रालय ने खरीफ 2026 सीजन के लिए कुल 390.54 लाख टन उर्वरकों की आवश्यकता का अनुमान लगाया है। इसके मुकाबले वर्तमान में देश में 200.12 लाख टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। यह अनुमानित मांग का 50 प्रतिशत से अधिक है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में इस समय तक लगभग 33 प्रतिशत स्टॉक को पर्याप्त माना जाता है। इस तरह मौजूदा भंडार सामान्य स्तर से काफी अधिक है और यह खरीफ सीजन की तैयारियों को मजबूत बनाता है।
उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बाद भी भारत में उर्वरकों का घरेलू उत्पादन मजबूत बना हुआ है। साथ ही, सरकार ने समय रहते आयात व्यवस्था को भी सक्रिय रखा है। अब तक लगभग 95 लाख टन उर्वरकों का घरेलू उत्पादन हो चुका है, जबकि 22.60 लाख टन उर्वरकों का आयात भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुका है। इस प्रकार कुल मिलाकर 117.6 लाख टन अतिरिक्त उर्वरक स्टॉक में शामिल हो चुके हैं, जिससे आपूर्ति की स्थिति और मजबूत हुई है।
सरकार ने विशेष रूप से फॉस्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया है। अतिरिक्त सचिव ने बताया कि देश ने पहले ही 13.5 लाख टन डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और लगभग 9 लाख टन NPK कॉम्प्लेक्स उर्वरक की व्यवस्था कर ली है। इन उर्वरकों की समय पर उपलब्धता से खरीफ सीजन के चरम समय में किसानों को पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि उर्वरकों के उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता भी संतोषजनक बनी हुई है। सरकार तैयार उर्वरकों के साथ-साथ उनके उत्पादन में उपयोग होने वाले कच्चे माल की भी नियमित समीक्षा कर रही है। उर्वरक सचिव की अध्यक्षता वाले एम्पावर्ड ग्रुप ने अब तक नौ बैठकें आयोजित की हैं, जिनमें घरेलू उत्पादन, आयात, लॉजिस्टिक्स और स्टॉक की स्थिति का आकलन किया गया है।
सरकार के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह नियंत्रित और स्थिर है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कुछ अनिश्चितताएं जरूर बनी हुई हैं, लेकिन भारत ने समय रहते आवश्यक कदम उठाकर संभावित जोखिमों को काफी हद तक कम कर लिया है।
भारत में उर्वरक उत्पादन के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। वर्ष 2021 में देश का कुल उर्वरक उत्पादन 433.29 लाख टन था, जो बढ़कर 2025 में रिकॉर्ड 524.62 लाख टन तक पहुंच गया। इस अवधि में यूरिया, DAP, NPK और SSP जैसे प्रमुख उर्वरकों के उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि सरकार की आत्मनिर्भरता बढ़ाने की नीति और नई उत्पादन क्षमताओं के विकास का परिणाम मानी जा रही है।
यूरिया उत्पादन के क्षेत्र में भी भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2014-15 में देश का यूरिया उत्पादन लगभग 225 लाख टन था, जो बढ़कर 2024-25 में 306.67 लाख टन तक पहुंच गया। इसके बावजूद भारत को अपनी कुल आवश्यकता पूरी करने के लिए आयात पर भी निर्भर रहना पड़ता है। पिछले वित्तीय वर्ष में देश ने 100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात किया, ताकि घरेलू मांग को पूरा किया जा सके।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश की कुल उर्वरक आवश्यकता का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा किया गया। यह दर्शाता है कि भारत उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है, हालांकि कुछ प्रमुख कच्चे माल और उर्वरकों के लिए आयात अभी भी आवश्यक बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक उर्वरक बाजार पर पड़ने की आशंका बनी हुई है। इस क्षेत्र के कई देश फॉस्फेट, प्राकृतिक गैस और अन्य उर्वरक कच्चे माल के प्रमुख उत्पादक और निर्यातक हैं। ऐसे में किसी भी तरह की आपूर्ति बाधा अंतरराष्ट्रीय कीमतों को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि केंद्र सरकार स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है और आवश्यकतानुसार आयात अनुबंधों तथा आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने पर भी काम कर रही है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हालांकि वैश्विक बाजार में कीमतों में संभावित वृद्धि के कारण सरकार का आयात बिल बढ़ सकता है, लेकिन सरकार ने किसानों पर इसका बोझ न पड़ने देने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
वर्तमान में किसानों को नीम-कोटेड यूरिया 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम बैग की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) पर उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं DAP की कीमत 1,350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बैग निर्धारित है। सरकार का कहना है कि सब्सिडी व्यवस्था के माध्यम से किसानों को नियंत्रित दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराए जाते रहेंगे।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का दावा है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है। मजबूत घरेलू उत्पादन, समय पर आयात, पर्याप्त स्टॉक और लगातार निगरानी के कारण देश में खाद की आपूर्ति को लेकर फिलहाल कोई संकट नहीं है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को बुवाई और फसल वृद्धि के महत्वपूर्ण चरणों में उर्वरकों की कमी का सामना न करना पड़े और कृषि उत्पादन प्रभावित न हो।


