विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोवा-रिग्पा (एनआईएसआर), लेह द्वारा पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम लेह स्थित ट्रांस-हिमालयन हर्बल गार्डन, फे में आयोजित किया गया, जहां संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और पर्यावरण प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन लद्दाख के पूर्व सांसद जामयांग त्सेरिंग नामग्याल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोवा-रिग्पा के निदेशक के साथ मिलकर हर्बल गार्डन में सेब का पौधा रोपित किया। यह पौधारोपण केवल एक औपचारिक गतिविधि नहीं था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित वातावरण सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक था।
अपने संबोधन में जामयांग त्सेरिंग नामग्याल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल एक विकल्प नहीं बल्कि मानव अस्तित्व की आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं और ऐसे समय में वृक्षारोपण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने एनआईएसआर द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान न केवल पारंपरिक चिकित्सा पद्धति सोवा-रिग्पा को संरक्षित कर रहा है, बल्कि दुर्लभ औषधीय पौधों के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उद्घाटन समारोह के बाद पूर्व सांसद को ट्रांस-हिमालयन हर्बल गार्डन का विस्तृत भ्रमण कराया गया। इस दौरान उन्हें बगीचे में संरक्षित और विकसित की जा रही विभिन्न औषधीय एवं सुगंधित पौधों की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि यह हर्बल गार्डन लद्दाख क्षेत्र की पारंपरिक औषधीय विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ अनुसंधान और शिक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।
भ्रमण के दौरान नामग्याल ने हर्बल गार्डन में किए जा रहे संरक्षण कार्यों की सराहना की और कहा कि स्थानीय जैव विविधता तथा पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले कई औषधीय पौधे वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इनके संरक्षण के लिए संस्थागत प्रयासों को और मजबूत किया जाना चाहिए।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में वृक्षारोपण के साथ-साथ एक व्यापक स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। संस्थान के विभागाध्यक्षों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और छात्रों ने मिलकर हर्बल गार्डन एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाया। प्रतिभागियों ने प्लास्टिक कचरा और अन्य अपशिष्ट सामग्री को एकत्र कर उचित तरीके से निस्तारित किया। इस दौरान लोगों को स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिनमें फलदार, औषधीय तथा स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल पौधों को प्राथमिकता दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से संस्थान द्वारा लगाए गए पौधों की निगरानी और रखरखाव की विशेष व्यवस्था की गई है।
एनआईएसआर के अधिकारियों ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर योगदान दे।
संस्थान ने इस अवसर पर यह भी संदेश दिया कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। सोवा-रिग्पा चिकित्सा पद्धति मुख्य रूप से प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों पर आधारित है। इसलिए इन पौधों का संरक्षण न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से बल्कि स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली और भविष्य में भी ऐसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी का संकल्प व्यक्त किया। सभी उपस्थित लोगों ने यह संदेश दिया कि स्वच्छ और हरित पर्यावरण के निर्माण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना होगा।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि किस प्रकार संस्थान, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी और स्थानीय समुदाय मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम उठा सकते हैं। वृक्षारोपण, स्वच्छता और औषधीय पौधों के संरक्षण से जुड़ी यह पहल न केवल लद्दाख बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती है।

