भारत में संतुलित पोषण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वैश्विक स्पेशियलिटी मिनरल कंपनी ICL ने इंडिया पोटाश लिमिटेड (IPL) के साथ पॉलीसल्फेट (Polyhalite) की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक बड़ा समझौता किया है। इस समझौते के तहत अगले पांच वर्षों में भारत को कुल 10 लाख (1 मिलियन) मीट्रिक टन पॉलीसल्फेट की आपूर्ति की जाएगी। यह साझेदारी भारत में मल्टी-न्यूट्रिएंट उर्वरकों की बढ़ती मांग और टिकाऊ कृषि की दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाती है।
हर साल बढ़ेगी सप्लाई
ICL और इंडिया पोटाश लिमिटेड के बीच हुए इस पांच वर्षीय समझौते में हर वर्ष पॉलीसल्फेट की सप्लाई का वॉल्यूम बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य किसानों को नियमित रूप से उच्च गुणवत्ता वाला मल्टी-न्यूट्रिएंट उर्वरक उपलब्ध कराना है।
समझौते के अनुसार, प्रत्येक शिपमेंट में कम से कम 25,000 मीट्रिक टन पॉलीसल्फेट भेजा जाएगा। पूरी सालभर की आपूर्ति को अलग-अलग चरणों में समान रूप से वितरित किया जाएगा ताकि किसानों और उर्वरक कंपनियों को लगातार उपलब्धता मिलती रहे। उत्पाद की कीमत और भुगतान से जुड़ी शर्तें बाजार की स्थिति के अनुसार समय-समय पर ICL और IPL द्वारा तय की जाएंगी।
भारत में क्यों बढ़ रही है पॉलीसल्फेट की मांग?
भारतीय कृषि धीरे-धीरे केवल नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित पोषण की ओर बढ़ रही है। मिट्टी में सल्फर, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे द्वितीयक पोषक तत्वों की कमी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पॉलीसल्फेट किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है।
यह उर्वरक एक साथ चार आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराता है—
- सल्फर (Sulphur)
- पोटैशियम (Potassium)
- मैग्नीशियम (Magnesium)
- कैल्शियम (Calcium)
इन सभी पोषक तत्वों का संतुलित मिश्रण फसल की बेहतर वृद्धि, गुणवत्ता और उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्राकृतिक रूप में तैयार होता है पॉलीसल्फेट
पॉलीसल्फेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक खनिज (Natural Mineral Fertilizer) है। इसे भूमिगत खदानों से निकाला जाता है और उसके बाद केवल क्रशिंग, स्क्रीनिंग तथा बैगिंग जैसी साधारण प्रक्रियाओं से तैयार किया जाता है।
इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का केमिकल सेपरेशन, सिंथेटिक निर्माण या जटिल औद्योगिक प्रोसेसिंग नहीं की जाती। यही कारण है कि इसे दुनिया के सबसे कम कार्बन फुटप्रिंट वाले उर्वरकों में शामिल किया जाता है।
बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों और जलवायु परिवर्तन के दौर में कम कार्बन उत्सर्जन वाले उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में पॉलीसल्फेट भारत के टिकाऊ कृषि मिशन को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
धीरे–धीरे रिलीज़ होते हैं पोषक तत्व
पॉलीसल्फेट का एक और महत्वपूर्ण लाभ इसका धीमी गति से पोषक तत्व छोड़ने (Slow Release) वाला गुण है। इसमें मौजूद सल्फर, पोटाश, मैग्नीशियम और कैल्शियम मिट्टी में धीरे-धीरे घुलते हैं और फसल की पूरी वृद्धि अवधि के दौरान पौधों को लगातार पोषण प्रदान करते रहते हैं।
इससे पोषक तत्वों का नुकसान कम होता है, उर्वरक उपयोग दक्षता (Nutrient Use Efficiency) बढ़ती है और पौधों को लंबे समय तक संतुलित पोषण मिलता है। परिणामस्वरूप फसल की गुणवत्ता और उपज दोनों में सुधार देखा जाता है।
किसानों को क्या होगा फायदा?
इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय किसानों को मिलने की उम्मीद है। नियमित सप्लाई से बाजार में पॉलीसल्फेट की उपलब्धता बेहतर होगी और किसानों को समय पर मल्टी-न्यूट्रिएंट उर्वरक मिल सकेगा।
पॉलीसल्फेट विशेष रूप से उन फसलों के लिए लाभकारी माना जाता है जिनमें सल्फर और पोटाश की अधिक आवश्यकता होती है, जैसे तिलहन, दलहन, आलू, गन्ना, फल, सब्जियां और बागवानी फसलें। संतुलित पोषण मिलने से फसल की गुणवत्ता, रंग, आकार और उत्पादन क्षमता में सुधार हो सकता है।
सस्टेनेबल खेती को मिलेगा बढ़ावा
भारत सरकार भी पिछले कुछ वर्षों से संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। ऐसे में प्राकृतिक मल्टी-न्यूट्रिएंट उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ना इस दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
ICL और इंडिया पोटाश लिमिटेड के बीच हुआ यह दीर्घकालिक समझौता न केवल भारत में पॉलीसल्फेट की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि किसानों को पर्यावरण-अनुकूल और संतुलित पोषण आधारित खेती अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा।
निष्कर्ष
ICL और इंडिया पोटाश लिमिटेड के बीच हुआ यह पांच वर्षीय समझौता भारतीय उर्वरक क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अगले पांच वर्षों में 10 लाख मीट्रिक टन पॉलीसल्फेट की नियमित आपूर्ति से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला प्राकृतिक मल्टी-न्यूट्रिएंट उर्वरक उपलब्ध होगा। साथ ही, यह पहल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने और कम कार्बन उत्सर्जन वाली टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले वर्षों में भारत में पॉलीसल्फेट का उपयोग बढ़ने के साथ संतुलित पोषण आधारित खेती को नई गति मिलने की उम्मीद है।

