• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

ICAR के 98वें स्थापना दिवस पर कृषि क्षेत्र को मिली नई ऊर्जा: एक वर्ष में 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित, 94% जलवायु अनुकूल; विज्ञान आधारित खेती से बनेगा विकसित भारत 2047

Agriculture sector gets new energy on ICAR's 98th Foundation Day

Emran Khan by Emran Khan
July 17, 2026
in कृषि समाचार
0
विकसित भारत 2047 की दिशा में मजबूत कदम

विकसित भारत 2047 की दिशा में मजबूत कदम

0
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने अपने 98वें स्थापना दिवस पर विज्ञान आधारित, जलवायु अनुकूल और किसान-केंद्रित कृषि विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए देश के कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां और भविष्य की रणनीति प्रस्तुत की। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “आईसीएआर भारत की कृषि क्रांति का अग्रदूत है। यदि किसान कृषि की आत्मा हैं तो वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क हैं।” उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान और नवाचार ही विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने की सबसे मजबूत नींव साबित होंगे।

नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, नीति आयोग के सदस्य के.वी. राजू, मत्स्य पालन विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (DARE) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, किसान संगठनों और विद्यार्थियों सहित बड़ी संख्या में विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

98 वर्षों से भारतीय कृषि की रीढ़ बना हुआ है ICAR

हर वर्ष 16 जुलाई को मनाया जाने वाला आईसीएआर स्थापना दिवस वर्ष 1928 में परिषद की स्थापना की याद दिलाता है। पिछले लगभग एक शताब्दी में आईसीएआर ने भारतीय कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार सेवाओं को नई दिशा दी है। हरित क्रांति से लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, पशुधन सुधार, मत्स्य विकास और जलवायु अनुकूल खेती तक आईसीएआर की भूमिका देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

आज भारत खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है, जिसमें आईसीएआर के वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचारों का बड़ा योगदान माना जाता है।

एक वर्ष में 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित

अपने संबोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान आईसीएआर ने 44 विभिन्न फसलों की कुल 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 94 प्रतिशत किस्में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई हैं, जबकि 29 किस्में जैव-संपोषित (Biofortified) हैं, जिनमें पोषण तत्वों की मात्रा सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक है।

उन्होंने कहा कि बदलते मौसम, बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा को देखते हुए जलवायु अनुकूल किस्मों का विकास भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इससे किसानों को उत्पादन जोखिम कम करने और स्थिर आय प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

“किसान आत्मा हैं, वैज्ञानिक मस्तिष्क”

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था तभी मजबूत होगी जब किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों का ज्ञान और सरकार की नीतियां एक साथ काम करें। उन्होंने कहा,

“किसान कृषि की आत्मा हैं, जबकि वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क हैं। दोनों के समन्वय से ही खेतों में समृद्धि आएगी और विकसित भारत का सपना पूरा होगा।”

उन्होंने वैज्ञानिकों से मांग आधारित अनुसंधान (Demand-driven Research) को प्राथमिकता देने की अपील की, ताकि किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने वाली तकनीकें विकसित की जा सकें।

दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत को खाद्य तेल और दलहन के आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। इसके लिए उन्नत किस्मों, आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर अनुसंधान के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कृषि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, अनुसंधान को उद्योगों से जोड़ने, कृषि तकनीकों के व्यवसायीकरण (Commercialization) तथा कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के माध्यम से नई तकनीकों को अंतिम किसान तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया।

कृषि विज्ञान केंद्रों को मिलेगा और मजबूत दायित्व

कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों का नेटवर्क देश के लाखों किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों को पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक तभी सफल मानी जाएगी जब उसका लाभ खेतों तक पहुंचे।

उन्होंने यह भी कहा कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग और आईसीएआर के बीच हुए समझौते से अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी हस्तांतरण को नई गति मिलेगी, जिससे किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि होगी।

विज्ञान आधारित खेती से होगा विकसित भारत का निर्माण

कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि कृषि और डेयरी क्षेत्र में पिछले वर्षों में हुई उल्लेखनीय प्रगति सरकार की किसान कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईसीएआर आने वाले वर्षों में अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में और बड़ी भूमिका निभाएगा।

वहीं कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि भारत का खाद्यान्न संकट से आत्मनिर्भर बनने तक का सफर कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, मृदा स्वास्थ्य सुधार तथा दलहन एवं तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए विज्ञान आधारित अनुसंधान को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।

आधुनिक तकनीकों से बढ़ेगी किसानों की आय

राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य विज्ञान आधारित कृषि, अत्याधुनिक तकनीकों और नवाचारों के बिना संभव नहीं है। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, कृत्रिम गर्भाधान, भ्रूण प्रत्यारोपण, मत्स्य पालन, प्राकृतिक खेती, माइक्रो इरिगेशन और नैनो उर्वरकों जैसी तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कृषि अनुसंधान से 55 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक योगदान

कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव तथा आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि फसल, बागवानी, पशुधन और मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि के कारण देश को लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य प्राप्त हुआ।

उन्होंने कहा कि केवल कृषि अनुसंधान के माध्यम से ही लगभग 55 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक योगदान मिला है, जो यह साबित करता है कि कृषि विज्ञान में किया गया निवेश किसानों और देश की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी है।

एक करोड़ किसानों तक सीधे पहुंचीं वैज्ञानिक तकनीकें

डॉ. जाट ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान आईसीएआर की वैज्ञानिक तकनीकें सीधे लगभग एक करोड़ किसानों तक पहुंचीं, जबकि मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से पांच करोड़ से अधिक किसानों को कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई गई।

उन्होंने बताया कि वर्ष के दौरान 18 अंतरराष्ट्रीय समझौते (MoUs) किए गए, जिनसे वैश्विक कृषि अनुसंधान सहयोग को मजबूती मिली और भारतीय कृषि अनुसंधान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।

43 नई किस्में, 17 तकनीकें और 14 प्रकाशनों का लोकार्पण

स्थापना दिवस समारोह के दौरान किसानों के लिए 43 उन्नत फसल किस्मों, 17 अत्याधुनिक कृषि तकनीकों एवं उत्पादों तथा 14 महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया।

इन नई तकनीकों में बासमती धान की नई किस्में, लवणीय एवं क्षारीय भूमि के लिए जलवायु अनुकूल धान, निर्यात उन्मुख आम उत्पादन तकनीक, भारत की पहली स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) वैक्सीन, डिजिटल स्वाइन डिजीज एटलस तथा छोटे किसानों के लिए कम लागत वाली कसावा हार्वेस्टर मशीन प्रमुख रूप से शामिल हैं।

इन तकनीकों का उद्देश्य किसानों की उत्पादन लागत कम करना, रोग प्रबंधन को बेहतर बनाना और कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाना है।

72 समझौतों से तेज होगा तकनीकी हस्तांतरण

आईसीएआर द्वारा विकसित तकनीकों को तेजी से किसानों तक पहुंचाने के लिए समारोह के दौरान 51 उद्योग साझेदारों के साथ 72 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों के माध्यम से नई कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, मशीनों और वैज्ञानिक नवाचारों का व्यवसायीकरण तेज होगा तथा किसानों को इनका लाभ कम समय में मिल सकेगा।

150 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को मिली नियमित नियुक्ति

कार्यक्रम के दौरान आईसीएआर के 150 अस्थायी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए। इस कदम का कर्मचारियों ने स्वागत किया और इसे संस्थान के मानव संसाधन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया गया।

विकसित भारत 2047 की दिशा में मजबूत कदम

समारोह के समापन पर आईसीएआर ने दोहराया कि आने वाले वर्षों में संगठन विज्ञान आधारित अनुसंधान, जलवायु अनुकूल कृषि, डिजिटल नवाचार, रणनीतिक साझेदारियों और किसान-केंद्रित तकनीकों के माध्यम से भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों के बीच आईसीएआर द्वारा विकसित नई किस्में, आधुनिक तकनीकें और अनुसंधान आधारित समाधान भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ, प्रतिस्पर्धी और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि वैज्ञानिकों का ज्ञान, किसानों का अनुभव और सरकार की दूरदर्शी नीतियां इसी प्रकार एक साथ आगे बढ़ती रहीं, तो “विकसित कृषि, समृद्ध किसान और विकसित भारत 2047″ का लक्ष्य निश्चित रूप से साकार होगा।

 

Tags: agriculture newsFarming. ICAR
Previous Post

REWARD कार्यक्रम के तहत जलग्रहण विकास में आएगी नई तकनीकी क्रांति, सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे से होगी सटीक योजना एवं निगरानी

Next Post

ICAR CSR कॉन्क्लेव 2026: कृषि नवाचारों को मिलेगा कॉर्पोरेट सहयोग, 75 से अधिक उद्योगों ने किसानों के लिए तकनीक पहुंचाने का लिया संकल्प

Next Post
ICAR CSR कॉन्क्लेव 2026

ICAR CSR कॉन्क्लेव 2026: कृषि नवाचारों को मिलेगा कॉर्पोरेट सहयोग, 75 से अधिक उद्योगों ने किसानों के लिए तकनीक पहुंचाने का लिया संकल्प

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • Desertification Control Programme: कैसे बचाई जा रही है धरती की उर्वरता और किसानों का भविष्य
  • Drought Prone Areas Programme: जल संकट से जूझते किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण
  • ‘6 करोड़ लखपति दीदी’ मिशन को मिली नई रफ्तार: गया में बनी राष्ट्रीय रणनीति, ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए तैयार हुआ एक्शन प्लान
  • मसाला निर्यात को मिली बड़ी वैश्विक पहचान: भारत की पहल पर बड़ी इलायची, धनिया और वैनिला के लिए बने अंतरराष्ट्रीय कोडेक्स मानक, वैश्विक बाजार में बढ़ेगी भारतीय मसालों की प्रतिस्पर्धा
  • ICAR CSR कॉन्क्लेव 2026: कृषि नवाचारों को मिलेगा कॉर्पोरेट सहयोग, 75 से अधिक उद्योगों ने किसानों के लिए तकनीक पहुंचाने का लिया संकल्प

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.