भारत में कृषि उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन लंबे समय तक किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती Post Harvest Loss (फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान), भंडारण की कमी और कृषि उत्पादों को उचित बाजार नहीं मिल पाना रही है। इन समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PM Kisan Sampada Yojana – PMKSY) देश में आधुनिक Food Processing Infrastructure विकसित करने का कार्य कर रही है। इस योजना के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मजबूत करने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने और कृषि उत्पादों के Value Addition को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017-18 से लागू की गई यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना आज देश के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लोकसभा में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने लिखित उत्तर में योजना की उपलब्धियों और वर्तमान स्थिति की विस्तृत जानकारी साझा की।
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना का उद्देश्य
PM Kisan Sampada Yojana का मुख्य उद्देश्य खेत से लेकर उपभोक्ता तक पूरी Value Chain को मजबूत बनाना है। इसके तहत कृषि उत्पादों के उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन के लिए आधुनिक अवसंरचना तैयार की जाती है ताकि किसानों को बेहतर दाम मिल सकें और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता भी बनी रहे।
सरकार का मानना है कि यदि कृषि उत्पादों का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाए तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। यही कारण है कि योजना में आधुनिक Food Processing Units, Cold Chain, Warehousing, Packaging Facilities और Food Testing Laboratories जैसी सुविधाओं के निर्माण पर जोर दिया गया है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिनका उद्देश्य कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई दिशा देना है।
योजना की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं—
- खेत से खुदरा बाजार तक संपूर्ण Integrated Food Processing Infrastructure का विकास।
- कृषि उत्पादों का Value Addition बढ़ाना।
- Post Harvest Loss को कम करना।
- आधुनिक Cold Chain Infrastructure का निर्माण।
- खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता परीक्षण की सुविधाओं को मजबूत बनाना।
- निजी निवेश को प्रोत्साहित करना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन।
- किसानों की आय में वृद्धि।
- भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की Export Competitiveness को बढ़ाना।
आधुनिक Food Processing Infrastructure से किसानों को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों के पास अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और प्रसंस्करण कराने की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो उन्हें फसल बेचने की जल्दबाजी नहीं करनी पड़ेगी। इससे किसान बाजार में उचित समय पर अपनी उपज बेच सकेंगे और बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकेंगे।
योजना के अंतर्गत विकसित होने वाली Cold Storage, Processing Plants, Pack Houses, Food Parks, Testing Labs और Logistics Facilities कृषि उत्पादों के नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
1,735 परियोजनाओं को मिली मंजूरी
सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2026 तक प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत कुल 1,735 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से 1,256 परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं।
इन परियोजनाओं के माध्यम से देश में प्रति वर्ष लगभग 294.21 लाख मीट्रिक टन Food Processing एवं Preservation Capacity का निर्माण हुआ है।
योजना के अंतर्गत अब तक—
- कुल परियोजना लागत लगभग 33,163.34 करोड़ रुपये
- स्वीकृत अनुदान 9,258.58 करोड़ रुपये
- जारी अनुदान 6,914.93 करोड़ रुपये
रहा है।
37.76 लाख किसानों को मिला लाभ
खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के अनुसार 30 जून 2026 तक प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के माध्यम से लगभग 37.76 लाख किसानों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ है।
इन किसानों को अपनी कृषि उपज के लिए बेहतर बाजार, आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाएं, मूल्य संवर्धन तथा मजबूत Supply Chain का लाभ मिला है।
FPO को मिल रही विशेष रियायत
सरकार ने Farmer Producer Organizations (FPOs) को योजना में विशेष प्राथमिकता दी है।
सामान्य आवेदकों की तुलना में FPO को—
- अधिक वित्तीय सहायता
- ऋण संबंधी सुविधाओं में रियायत
- कुल संपत्ति संबंधी शर्तों में छूट
जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं ताकि किसान समूह स्वयं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना कर सकें।
PMFME Scheme के तहत अतिरिक्त सहायता
खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की PMFME Scheme (Pradhan Mantri Formalisation of Micro Food Processing Enterprises Scheme) के अंतर्गत भी किसान उत्पादक संगठनों को महत्वपूर्ण सहायता दी जा रही है।
इस योजना के तहत—
- 10 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर 35 प्रतिशत Credit Linked Subsidy
- 3 करोड़ रुपये तक की Common Infrastructure पर 35 प्रतिशत Grant
- राज्य एवं क्षेत्रीय स्तर पर FPO समूहों को Branding एवं Marketing Support के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान
प्रदान किया जाता है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है।
रोजगार सृजन में भी बड़ी भूमिका
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है।
पिछले तीन वर्षों में स्वीकृत परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 2.44 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। इससे गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और कृषि आधारित उद्योगों को नई गति मिली है।
किन राज्यों में हुआ अधिक निवेश
पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों के अनुसार कई राज्यों में Food Processing Infrastructure के क्षेत्र में उल्लेखनीय निवेश आकर्षित हुआ है।
प्रमुख राज्यों में—
- महाराष्ट्र
- तमिलनाडु
- तेलंगाना
- गुजरात
- कर्नाटक
- हरियाणा
- उत्तर प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
- ओडिशा
- पंजाब
शामिल हैं।
इन राज्यों में Food Processing Units की स्थापना से कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और निर्यात को नई गति मिलने की उम्मीद है।
योजना पूरी तरह Demand Driven
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह Demand Driven Scheme है।
इसके अंतर्गत किसी भी राज्य के लिए अलग से धनराशि निर्धारित नहीं की जाती।
मंत्रालय समय-समय पर Expression of Interest (EOI) जारी करता है, जिसके माध्यम से पात्र कंपनियां, किसान उत्पादक संगठन, सहकारी संस्थाएं, निजी उद्यमी तथा अन्य योग्य संस्थाएं आवेदन कर सकती हैं।
प्राप्त प्रस्तावों का तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन किया जाता है और योग्यता के आधार पर परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की जाती है।
आधुनिक Supply Chain से कम होगा Post Harvest Loss
भारत में हर वर्ष बड़ी मात्रा में फल, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद उचित भंडारण व्यवस्था के अभाव में खराब हो जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार Cold Chain, Processing, Packaging और Transportation Infrastructure के विकास से इन नुकसानों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना इसी दिशा में काम कर रही है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और देश में खाद्य अपव्यय भी घटे।
Export Competitiveness को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार का लक्ष्य केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है।
योजना के माध्यम से भारतीय Processed Food Products की गुणवत्ता में सुधार कर उन्हें वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना भी प्रमुख उद्देश्य है।
आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के विकास से भारत के कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जित होगी और किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों का भी लाभ मिलेगा।
सरकार कर रही नियमित निगरानी
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी कर रहा है। परियोजनाओं की प्रगति, अनुदान वितरण, क्षमता निर्माण तथा रोजगार सृजन की लगातार समीक्षा की जाती है ताकि योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों और उद्यमियों तक पहुंच सके।
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना भारत के कृषि क्षेत्र को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर Value Addition, Food Processing, Cold Chain Development, Supply Chain Management और Agri Business की दिशा में ले जाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण अवसंरचना के विकास से किसानों को बेहतर बाजार, उचित मूल्य और अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, निजी निवेश और कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार भी तेज़ी से हो रहा है। आने वाले वर्षों में यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहता है, तो यह भारत को वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के सरकार के लक्ष्य को भी नई गति प्रदान कर सकती है।

