देश में किसानों को नकली, घटिया और खराब गुणवत्ता वाले बीजों से राहत दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार प्रस्तावित नए Seed Bill को लेकर व्यापक विचार-विमर्श कर रही है। इसी क्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में देशभर के प्रमुख किसान संगठनों के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत संवाद किया।
बैठक में लगभग सभी राज्यों से आए किसान प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित Seed Act के विभिन्न प्रावधानों पर अपने सुझाव और जमीनी अनुभव साझा किए। केंद्रीय मंत्री ने किसान संगठनों की बातों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि प्राप्त सुझावों का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही नए कानून को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा सहित कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून का प्रमुख उद्देश्य किसानों को Fake Seeds और Substandard Seeds से सुरक्षा देना, बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और कृषि क्षेत्र में एक अधिक प्रभावी Regulatory Framework तैयार करना है।
1966 का Seed Act अब बदलती कृषि व्यवस्था के अनुरूप नहीं
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश का वर्तमान Seeds Act, 1966 में बनाया गया था, जबकि Seeds Control Order वर्ष 1983 में लागू हुआ था। कृषि और बीज क्षेत्र में पिछले कई दशकों में व्यापक बदलाव आए हैं। नई तकनीक, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी, नई फसल किस्मों और बदलते बाजार के कारण बीज व्यवस्था पहले की तुलना में काफी जटिल हो चुकी है।
मंत्री ने कहा कि समय के साथ कृषि क्षेत्र में कई नई चुनौतियां सामने आई हैं। इनमें सबसे बड़ी समस्या किसानों तक खराब गुणवत्ता या नकली बीजों का पहुंचना है। मौजूदा व्यवस्था में कई परिस्थितियों में खराब बीज के लिए जिम्मेदारी तय करना आसान नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब किसान महंगा बीज खरीदकर खेत में बोता है और फसल अपेक्षित रूप से नहीं आती, तो उसका नुकसान केवल बीज की कीमत तक सीमित नहीं रहता। किसान की पूरी Crop Cycle, खाद, पानी, मजदूरी और अन्य कृषि निवेश भी प्रभावित होते हैं।
ऐसे में एक मजबूत Seed Regulation System की आवश्यकता है, जो किसान को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ खराब बीज के लिए जिम्मेदारी तय करने में भी सक्षम हो।
70 प्रतिशत बीज मौजूदा कानून के दायरे से बाहर
श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण चिंता सामने रखी। उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में करीब 70 प्रतिशत बीज मौजूदा Seeds Act के दायरे से बाहर हैं।
इसके कारण देश के अलग-अलग राज्यों में बीजों के संबंध में अलग-अलग प्रक्रियाएं देखने को मिलती हैं। इसके अलावा मौजूदा कानून में दंड के प्रावधान भी पर्याप्त प्रभावी नहीं माने जा रहे हैं।
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था में Seed Quality, Accountability, Certification, Registration और Traceability को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए, ताकि किसान को बाजार से खरीदे गए बीज के बारे में सही और विश्वसनीय जानकारी मिल सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नकली बीजों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कानून को मजबूत बनाना जरूरी है। हालांकि सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि कानून बनाते समय किसानों के मौजूदा अधिकारों पर कोई अनावश्यक प्रतिबंध न लगे।
18 हजार से ज्यादा सुझाव पहले ही मिल चुके हैं
प्रस्तावित Seed Bill को लेकर सरकार पहले ही Public Consultation की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि नवंबर-दिसंबर 2025 में प्रस्तावित मसौदे पर किसानों और किसान संगठनों से सुझाव मांगे गए थे।
इस प्रक्रिया में करीब 18,000 सुझाव प्राप्त हुए। सरकार ने इन सुझावों का अध्ययन किया है। इसके बाद अब सीधे किसान संगठनों के साथ संवाद का सिलसिला शुरू किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसान संगठनों के प्रतिनिधि गांव और खेत के स्तर पर किसानों के साथ काम करते हैं और उन्हें किसानों की वास्तविक समस्याओं की जानकारी होती है। इसलिए प्रस्तावित कानून को अंतिम रूप देने से पहले उनके साथ सीधा संवाद जरूरी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में समाप्त नहीं करेगी। किसान, किसान संगठन या कोई भी अन्य संबंधित पक्ष यदि कोई सुझाव देना चाहता है तो उसका स्वागत किया जाएगा।
नए कानून के लिए कोई जल्दबाजी नहीं
Seed Bill को लेकर सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी कोई निश्चित Deadline तय नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग किसान संगठनों की ओर से अलग-अलग प्रकार के सुझाव और विचार सामने आए हैं। इन सभी मुद्दों का गहराई से अध्ययन करने की जरूरत है। इसलिए नया कानून सोच-समझकर और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य केवल नया कानून बनाना नहीं बल्कि ऐसा Effective और Strong Regulatory Framework तैयार करना है, जिससे किसानों को वास्तविक सुरक्षा मिल सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कानून ऐसा होना चाहिए जो नकली बीजों पर प्रभावी कार्रवाई कर सके और साथ ही किसानों की पारंपरिक बीज व्यवस्था को सुरक्षित रखे।
किसानों के पारंपरिक बीजों पर नहीं लगेगा अनावश्यक प्रतिबंध
प्रस्तावित Seed Bill को लेकर किसानों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल उनके पारंपरिक बीजों और कृषक किस्मों को लेकर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि नए कानून में किसानों के Farmers’ Rights की पूरी सुरक्षा की जाएगी।
किसान अपने पारंपरिक और कृषक किस्मों के बीजों का इस्तेमाल कर सकेंगे। वे इन बीजों को आपस में साझा कर सकेंगे और उनका विक्रय भी कर सकेंगे।
पारंपरिक बीजों के लिए Mandatory Registration की व्यवस्था नहीं होगी। यदि कोई किसान अपनी विकसित की गई किस्म को पंजीकृत कराना चाहता है तो उसके लिए स्वैच्छिक पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध होगी।
इसका मतलब यह है कि किसान को अपनी पारंपरिक किस्म या अपने उपयोग के लिए उत्पादित बीज के लिए अनिवार्य रूप से किसी Digital Registration प्रक्रिया से गुजरना नहीं पड़ेगा।
किसान अपने उपयोग के लिए बीज रख सकेंगे
श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि किसान यदि बीज का उत्पादन अपने Personal Use के लिए करता है तो उसके लिए अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी।
इसी प्रकार किसान अपने गांव या समुदाय में बीज साझा कर सकता है। यदि कोई किसान किसी कंपनी के लिए बीज का उत्पादन करता है, तो भी प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किसानों के पारंपरिक अधिकारों को ध्यान में रखा जाएगा।
यह प्रावधान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान सदियों से अपनी पसंद की स्थानीय और पारंपरिक किस्मों के बीजों को संरक्षित करते और अगली फसल के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं।
Traceability System से बीज की पहचान होगी आसान
प्रस्तावित Seed Bill में Traceability System को महत्वपूर्ण भूमिका दी जा रही है। इसका उद्देश्य बीज की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को अधिक पारदर्शी बनाना है।
Traceability के माध्यम से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कोई बीज किस स्रोत से आया, उसका उत्पादन कहां हुआ, उसकी गुणवत्ता क्या है और वह किस माध्यम से किसान तक पहुंचा।
किसानों के लिए इसका सबसे बड़ा लाभ यह हो सकता है कि वे बाजार में उपलब्ध बीज की Authenticity और Quality की पहचान अधिक आसानी से कर सकें।
यदि किसी बीज के कारण किसानों को नुकसान होता है तो उसकी Supply Chain को ट्रैक करके संबंधित जिम्मेदारी तय करने में भी मदद मिल सकती है।
नकली बीजों पर बढ़ेगी जवाबदेही
किसानों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक नकली बीजों का बाजार में उपलब्ध होना है। नकली बीजों की वजह से किसान को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ पूरी फसल खराब होने का खतरा रहता है।
प्रस्तावित कानून में Accountability Mechanism को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बीज की गुणवत्ता के लिए संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी स्पष्ट करना है।
नई व्यवस्था में यदि खराब या गलत बीज बाजार में पहुंचता है तो उसके स्रोत तक पहुंचने और जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था पर कार्रवाई करने की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
अपराधों को तीन श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव
प्रस्तावित नए कानून में अपराधों को तीन श्रेणियों में बांटने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग स्तर के उल्लंघनों के लिए उचित कार्रवाई तय करना है।
छोटी चूक के मामलों में पहली बार चेतावनी और सुधार का अवसर दिया जा सकता है। वहीं दोबारा गलती होने पर अधिक Penalty और Fine का प्रावधान किया जा सकता है।
गंभीर उल्लंघनों के लिए अधिक कठोर कार्रवाई की व्यवस्था प्रस्तावित है। इस तरह कानून में Proportionate Penalty System विकसित करने की कोशिश की जा रही है।
इससे एक ओर छोटी तकनीकी गलतियों के लिए अनावश्यक कठोरता से बचा जा सकेगा, वहीं जानबूझकर किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में कड़ी कार्रवाई संभव होगी।
किसान संगठनों ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव
कृषि भवन में हुई बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से आए किसान संगठनों ने प्रस्तावित कानून के संबंध में अपनी राय रखी।
बैठक में भारतीय किसान संघ, BKU के विभिन्न घटक, अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति (AIKCC), किसान महापंचायत, भारतीय कृषक समाज, गांव किसान उन्नयन, Society for Independent Farmers Association (SIFA), कर्नाटक रैयत संघ, तेलंगाना रैयत संघ, महाराष्ट्र का शेतकारी संगठन, गुजरात का खेदुत समाज सहित कई किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इसके अलावा राजस्थान, बिहार, तमिलनाडु, झारखंड और केरल सहित विभिन्न राज्यों के किसान प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव साझा किए।
इस व्यापक भागीदारी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए कानून में केवल प्रशासनिक या regulatory दृष्टिकोण ही नहीं बल्कि किसान के खेत और बाजार के वास्तविक अनुभवों को भी शामिल किया जाए।
किसान होंगे नीति निर्माण के केंद्र में
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों से संवाद और सहमति के आधार पर नीतियां बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि कृषि का आधार किसान है और किसी भी कृषि नीति को तैयार करते समय किसान को सबसे प्रमुख Stakeholder के रूप में देखा जाना चाहिए।
प्रस्तावित Seed Bill को लेकर भी सरकार का यही दृष्टिकोण है। किसान संगठनों से मिलने वाले सुझावों का अध्ययन किया जाएगा और जो सुझाव किसानों के हित में और व्यावहारिक होंगे, उन्हें अंतिम मसौदे में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।
अन्य Stakeholders से भी जारी है चर्चा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल किसान संगठनों के साथ ही नहीं बल्कि बीज क्षेत्र से जुड़े अन्य Stakeholders के साथ भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।
इसमें कृषि वैज्ञानिक, बीज उद्योग, शोध संस्थान, राज्य सरकारें और अन्य संबंधित पक्ष शामिल हैं।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया में Farmer Interest को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। क्योंकि बीज कृषि उत्पादन की बुनियादी जरूरत है और बीज की गुणवत्ता सीधे किसान की फसल और आय से जुड़ी होती है।
बीज बाजार में Quality Assurance की जरूरत
भारत में कृषि क्षेत्र के विस्तार के साथ Seed Market भी तेजी से बदल रहा है। नई किस्मों, Hybrid Seeds, improved varieties और निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी ने किसानों के सामने विकल्प बढ़ाए हैं।
लेकिन विकल्प बढ़ने के साथ Quality Assurance की आवश्यकता भी बढ़ी है। किसान के पास यह सुनिश्चित करने का पर्याप्त साधन होना चाहिए कि वह जिस बीज को खरीद रहा है वह वास्तव में उसी गुणवत्ता का है जिसका दावा पैकेट या बाजार में किया गया है।
यही कारण है कि नए कानून में Quality Control, Seed Testing, Certification और Traceability जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
किसानों की आय और कृषि जोखिम से भी जुड़ा है बीज कानून
बीज की गुणवत्ता केवल उत्पादन से जुड़ा विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध किसान की Farm Income और Agricultural Risk से भी है।
यदि किसान को अच्छी गुणवत्ता वाला बीज मिलता है तो बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ती है। वहीं खराब बीज की स्थिति में किसान का पूरा निवेश जोखिम में पड़ सकता है।
इसलिए प्रभावी Seed Regulation किसानों के लिए एक प्रकार का Risk Management Tool भी बन सकता है।
यदि बीज की गुणवत्ता की निगरानी, उसकी Traceability और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था मजबूत होती है तो किसानों का भरोसा भी बढ़ेगा और Seed Market में पारदर्शिता आएगी।
आत्मनिर्भर किसान के विजन से जुड़ा कदम
केंद्रीय मंत्री ने प्रस्तावित कानून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समृद्ध और आत्मनिर्भर किसान के विजन से जोड़ते हुए कहा कि किसानों को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
कृषि में आत्मनिर्भरता केवल उत्पादन बढ़ाने से हासिल नहीं होगी। इसके लिए किसानों को गुणवत्तापूर्ण Input, बेहतर Technology, उचित बाजार और मजबूत Regulatory Support की जरूरत होगी।
बीज कृषि का सबसे महत्वपूर्ण Input है। इसलिए बीज की गुणवत्ता और उपलब्धता सुनिश्चित करना कृषि विकास की बुनियादी जरूरतों में शामिल है।
नया Seed Bill किसानों के लिए क्या बदल सकता है?
यदि प्रस्तावित कानून को किसान हितों के अनुरूप प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
पहला, नकली और घटिया बीजों के खिलाफ कार्रवाई का तंत्र मजबूत हो सकता है। दूसरा, बीजों की Traceability बढ़ने से किसान को उनकी पहचान और स्रोत के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकती है। तीसरा, खराब गुणवत्ता वाले बीज के मामले में Accountability तय करना आसान हो सकता है।
इसके साथ ही किसानों के पारंपरिक बीजों और कृषक किस्मों के अधिकारों को सुरक्षित रखने का प्रावधान ग्रामीण कृषि व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
आगे भी जारी रहेगा किसानों से संवाद
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित Seed Bill पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है। किसानों और किसान संगठनों से आगे भी सुझाव लिए जाएंगे।
सरकार का रुख है कि कानून को अंतिम रूप देने से पहले सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया जाए। इसके लिए Consultation, Feedback और Stakeholder Engagement की प्रक्रिया जारी रहेगी।
इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार कानून को जल्दबाजी में लागू करने के बजाय व्यापक विचार-विमर्श और किसानों के अनुभवों के आधार पर तैयार करना चाहती है।
भारत में बीज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित Seed Bill आने वाले समय में कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम साबित हो सकता है। मौजूदा Seeds Act, 1966 के कई दशक पुराने होने और बीज बाजार में आए बदलावों के बीच नई परिस्थितियों के अनुरूप Modern Seed Regulation Framework की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
केंद्र सरकार की ओर से अब तक प्राप्त करीब 18,000 सुझाव और देशभर के किसान संगठनों के साथ किया जा रहा संवाद इस प्रक्रिया को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित कानून में एक तरफ Fake Seeds और Substandard Seeds पर सख्त कार्रवाई की तैयारी दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी तरफ किसानों के पारंपरिक बीजों और उनके Farmers’ Rights को सुरक्षित रखने की बात स्पष्ट रूप से कही गई है।
यदि नए कानून में किसान हित, वैज्ञानिक गुणवत्ता, पारदर्शी Seed Certification, प्रभावी Traceability System, मजबूत Penalty और स्पष्ट Accountability का संतुलन बनाया जाता है, तो यह देश के Seed Market में भरोसा बढ़ाने और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सरकार और किसान संगठनों के बीच जारी यह संवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बीज केवल एक कृषि Input नहीं, बल्कि किसान की पूरी फसल और उसकी आय की नींव है। ऐसे में एक मजबूत, पारदर्शी और किसान-केंद्रित Seed Law देश की कृषि व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकता है।

