एग्रोकेमिकल उद्योग में अब ऐसी तकनीकों पर तेजी से काम हो रहा है, जिनसे फसल सुरक्षा उत्पादों की प्रभावशीलता बढ़ाने के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम किया जा सके। इसी क्रम में सस्पेंशन कॉन्सन्ट्रेट यानी SC फॉर्मुलेशन तकनीक को लेकर शोध और औद्योगिक स्तर पर नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। खासतौर पर कम गलनांक वाले सक्रिय तत्वों, अधिक मात्रा में सक्रिय पदार्थ और कई सक्रिय तत्वों वाले फॉर्मुलेशन को स्थिर बनाए रखना उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इन्हीं महत्वपूर्ण मुद्दों पर चीन के हांगझोउ में होने वाली 7वीं Ag Formulation & Application Technology Congress यानी FAT2026 में विस्तार से चर्चा की जाएगी। यह आयोजन 29 और 30 अक्टूबर 2026 को आयोजित होगा। सम्मेलन में भारत के विशेषज्ञ और कुमुद कंसल्टेंसी के संस्थापक डॉ. हृषीकेश जे. मिरगल को विशेष प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया गया है।
डॉ. मिरगल सम्मेलन में “Systematic Breakthroughs in Low Melting Point, High Load & Multi-Ingredient SC Formulations: Mechanism Research, System Construction and Process Control” विषय पर प्रस्तुति देंगे। इसमें प्रयोगशाला स्तर पर तैयार किए गए फॉर्मुलेशन को औद्योगिक उत्पादन तक स्थिर और एक समान तरीके से पहुंचाने की तकनीकों पर चर्चा होगी।
SC फॉर्मुलेशन में क्यों आती है चुनौती
सस्पेंशन कॉन्सन्ट्रेट एग्रोकेमिकल फॉर्मुलेशन का एक महत्वपूर्ण रूप है। इसमें सक्रिय पदार्थ को एक तरल माध्यम में बारीक कणों के रूप में स्थिर रखा जाता है। इसका उद्देश्य ऐसा उत्पाद तैयार करना होता है जो भंडारण के दौरान अलग न हो, कणों का आकार न बदले और खेत में इस्तेमाल के समय समान रूप से फैल सके।
लेकिन कम गलनांक वाले सक्रिय तत्वों के मामले में चुनौती बढ़ जाती है। तापमान में मामूली बदलाव भी ऐसे पदार्थों में क्रिस्टलीकरण या कणों के आपस में चिपकने जैसी समस्या पैदा कर सकता है। यदि एक ही फॉर्मुलेशन में दो या उससे अधिक सक्रिय तत्व शामिल हों तो उनके बीच अनुकूलता बनाए रखना और मुश्किल हो जाता है।
कई बार प्रयोगशाला में तैयार फॉर्मुलेशन पूरी तरह सफल दिखाई देता है, लेकिन जब उसी फॉर्मुलेशन को बड़े औद्योगिक संयंत्र में तैयार किया जाता है तो उसकी गाढ़ापन, कणों का आकार और भंडारण स्थिरता बदल जाती है। यही कारण है कि फॉर्मुलेशन उद्योग में प्रयोगशाला से उत्पादन संयंत्र तक तकनीक को सफलतापूर्वक पहुंचाना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
क्रिस्टलीकरण रोकने पर रहेगा जोर
डॉ. मिरगल की प्रस्तुति में सबसे पहले यह समझने पर जोर दिया जाएगा कि किसी सक्रिय तत्व में क्रिस्टलीकरण की प्रवृत्ति क्यों पैदा होती है। इसके लिए थर्मोडायनामिक और काइनेटिक प्रक्रियाओं को समझना जरूरी है।
किसी सक्रिय पदार्थ की स्थिरता केवल उसके रासायनिक गुणों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि तापमान, कणों की स्थिति, तरल माध्यम और अन्य घटकों के साथ उसकी प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस वैज्ञानिक समझ के आधार पर ऐसे फॉर्मुलेशन सिस्टम विकसित किए जा सकते हैं जिनमें क्रिस्टलीकरण और कणों के अस्थिर होने की संभावना कम हो।
सर्फैक्टेंट की भूमिका महत्वपूर्ण
SC फॉर्मुलेशन में सर्फैक्टेंट का इस्तेमाल सक्रिय पदार्थ के कणों और तरल माध्यम के बीच बेहतर संपर्क बनाने के लिए किया जाता है। अलग-अलग सक्रिय तत्वों वाले फॉर्मुलेशन में एक ही सर्फैक्टेंट हर परिस्थिति में प्रभावी नहीं हो सकता।
ऐसे में अलग-अलग सर्फैक्टेंट का उपयुक्त मिश्रण तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य सक्रिय तत्वों और अन्य घटकों के बीच बेहतर अनुकूलता बनाना और लंबे समय तक फॉर्मुलेशन को स्थिर रखना है।
इंटरफेसियल साइंस यानी सतह और अंतरफलक विज्ञान इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके जरिए यह समझने में मदद मिलती है कि सर्फैक्टेंट और ठोस कणों के बीच किस तरह की परस्पर क्रिया हो रही है और इसका फॉर्मुलेशन की गुणवत्ता पर क्या असर पड़ता है।
अधिक मात्रा में सक्रिय तत्व वाले फॉर्मुलेशन
कृषि क्षेत्र में ऐसे उत्पादों की मांग बढ़ रही है जिनमें कम मात्रा में उत्पाद इस्तेमाल करके प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकें। इसके लिए फॉर्मुलेशन में सक्रिय तत्व की मात्रा बढ़ाना एक महत्वपूर्ण दिशा है।
FAT2026 में प्रस्तुत किए जाने वाले शोध के अनुसार कुछ मामलों में SC फॉर्मुलेशन में सक्रिय तत्व की मात्रा 50 से 60 प्रतिशत तक पहुंचाने की दिशा में सफलता मिली है। इसके साथ ही दो सक्रिय तत्वों वाले फॉर्मुलेशन में अनुकूलता बनाए रखने और उत्पाद की स्थिरता सुधारने पर भी काम किया गया है।
ऐसे फॉर्मुलेशन का उद्देश्य बेहतर भंडारण क्षमता, नियंत्रित गाढ़ापन और खेत में बेहतर प्रभाव हासिल करना है।
प्रयोगशाला से फैक्ट्री तक तकनीक पहुंचाना चुनौती
फॉर्मुलेशन उद्योग में एक बड़ी समस्या यह है कि प्रयोगशाला में सफल परिणाम मिलने के बावजूद बड़े स्तर पर उत्पादन के दौरान उत्पाद के गुण बदल सकते हैं। इसका कारण तापमान, मिलिंग प्रक्रिया, मिश्रण की गति और अन्य उत्पादन स्थितियों में अंतर हो सकता है।
इसीलिए प्रक्रिया नियंत्रण को फॉर्मुलेशन विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इसमें तापमान को नियंत्रित रखना, मिलिंग प्रक्रिया को अनुकूल बनाना और उत्पादन के दौरान लगातार निगरानी करना शामिल है।
इस तरह की व्यवस्थित प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि प्रयोगशाला में विकसित उत्पाद और औद्योगिक संयंत्र में तैयार उत्पाद के गुणों में बड़ा अंतर न आए।
उर्वरक और कृषि रसायन उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण
फॉर्मुलेशन तकनीक में होने वाला यह बदलाव केवल कीटनाशक या फसल सुरक्षा उत्पादों तक सीमित नहीं है। इसका संबंध व्यापक कृषि इनपुट उद्योग से है, जिसमें उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व, बायोस्टिमुलेंट और अन्य कृषि उत्पाद भी शामिल हैं।
आज किसान ऐसे कृषि इनपुट चाहते हैं जिन्हें आसानी से इस्तेमाल किया जा सके, खेत में समान रूप से पहुंचाया जा सके और कम मात्रा में प्रभावी परिणाम मिल सके। उर्वरकों के क्षेत्र में भी बेहतर फॉर्मुलेशन तकनीक के जरिए पोषक तत्वों की उपलब्धता और उपयोग दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
विशेष रूप से तरल उर्वरक, माइक्रोन्यूट्रिएंट और मिश्रित कृषि इनपुट उत्पादों में स्थिरता और घटकों की अनुकूलता महत्वपूर्ण होती है। इसलिए SC जैसी फॉर्मुलेशन तकनीकों से विकसित वैज्ञानिक समझ भविष्य में कृषि इनपुट उद्योग के दूसरे क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।
टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
एग्रोकेमिकल उद्योग अब केवल उत्पाद की प्रभावशीलता पर ध्यान नहीं दे रहा है। पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना और सुरक्षित एवं टिकाऊ फॉर्मुलेशन विकसित करना भी उद्योग की प्राथमिकताओं में शामिल हो रहा है।
कम मात्रा में अधिक प्रभाव देने वाले फॉर्मुलेशन से कृषि रसायनों के उपयोग की दक्षता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही स्थिर फॉर्मुलेशन से भंडारण और परिवहन के दौरान उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने में भी सहायता मिल सकती है।
FAT2026 में होने वाली चर्चा का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक शोध और औद्योगिक उपयोग के बीच की दूरी को कम करना है। डॉ. हृषीकेश जे. मिरगल के 32 वर्षों के औद्योगिक अनुभव के आधार पर फॉर्मुलेशन विज्ञान, सर्फैक्टेंट रसायन और इंटरफेसियल साइंस के व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा की जाएगी।
कुल मिलाकर, कम गलनांक वाले सक्रिय तत्वों, अधिक मात्रा वाले SC फॉर्मुलेशन और कई सक्रिय तत्वों वाले कृषि रसायनों को स्थिर बनाने की दिशा में व्यवस्थित वैज्ञानिक दृष्टिकोण आने वाले समय में एग्रोकेमिकल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि प्रयोगशाला स्तर की तकनीक को बेहतर प्रक्रिया नियंत्रण के साथ औद्योगिक स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो इससे कृषि इनपुट उत्पादों की गुणवत्ता, स्थिरता और उपयोग दक्षता में सुधार की संभावना बढ़ेगी।

