भारत के गैर-कृषि क्षेत्र की जमीनी तस्वीर अब पहले के मुकाबले ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने पहली बार बड़े पैमाने पर किए गए राष्ट्रव्यापी उद्यम सर्वेक्षण के आधार पर District-Level Estimates जारी किए हैं। इन आंकड़ों से देश के गैर-कृषि, गैर-निगमित क्षेत्र की जिला स्तर पर स्थिति, रोजगार, महिला भागीदारी, आर्थिक गतिविधियों और Productivity की विस्तृत तस्वीर सामने आई है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की इस पहल को देश में Sub-State Level Data को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिला स्तर के आंकड़ों के माध्यम से अब नीति निर्माताओं को यह समझने में अधिक मदद मिलेगी कि देश के अलग-अलग जिलों में गैर-कृषि आर्थिक गतिविधियों का आकार कितना है, रोजगार की स्थिति कैसी है और किन क्षेत्रों में Productivity अपेक्षाकृत अधिक या कम है।
NSO की रिपोर्ट के अनुसार, देश में गैर-निगमित प्रतिष्ठानों की आर्थिक गतिविधियां कुछ चुनिंदा जिलों में काफी अधिक केंद्रित हैं। शीर्ष 50 जिलों में कुल प्रतिष्ठानों, कार्यबल और Gross Value Added (GVA) का लगभग एक-तिहाई हिस्सा शामिल है। वहीं 237 जिलों में गैर-निगमित क्षेत्र के कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी एक-तिहाई है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 280 जिलों में प्रति कार्यकर्ता GVA अखिल भारतीय औसत से अधिक है। इससे इन जिलों में अपेक्षाकृत बेहतर Economic Productivity का संकेत मिलता है।
पहली बार District-Level Data से सामने आई गैर-कृषि क्षेत्र की तस्वीर
हाल के वर्षों में High-Frequency और Micro-Level Data का महत्व तेजी से बढ़ा है। इसका प्रमुख कारण Evidence-Based Policy Making और Targeted Intervention की बढ़ती आवश्यकता है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर के आंकड़ों से किसी क्षेत्र की व्यापक तस्वीर तो मिल जाती है, लेकिन जिला स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में मौजूद अंतर कई बार स्पष्ट नहीं हो पाते। देश के अलग-अलग जिलों में उद्योग, व्यापार, रोजगार, जनसंख्या, Infrastructure और स्थानीय बाजार की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं।
ऐसे में District-Level Estimates नीति निर्माताओं को अधिक Targeted Policy बनाने में मदद कर सकते हैं।
MoSPI ने इसी दिशा में पहली बार देश के गैर-निगमित गैर-कृषि क्षेत्र का जिला स्तर पर विस्तृत सांख्यिकीय विवरण जारी किया है। यह रिपोर्ट Annual Survey of Unincorporated Sector Enterprises (ASUSE) 2025 के आंकड़ों पर आधारित है।
757 जिलों के लिए जारी किए गए विस्तृत अनुमान
ASUSE 2025 के दौरान उपलब्ध 770 जिलों में से 757 जिलों के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण Indicators के जिला-स्तरीय अनुमान उपलब्ध कराए गए हैं। ये आंकड़े राष्ट्रीय स्तर पर Representative Survey Data के आधार पर तैयार किए गए हैं।
रिपोर्ट में प्रतिष्ठानों की संख्या और उनके आकार, रोजगार, पारिश्रमिक, स्वामित्व संरचना, महिलाओं की भागीदारी, Registration Status तथा Economic Performance जैसे कई Indicators को शामिल किया गया है।
इसके अलावा Market Establishments के लिए प्रति प्रतिष्ठान GVA और प्रति Worker GVA जैसे Productivity Indicators भी उपलब्ध कराए गए हैं।
इससे पहली बार जिला स्तर पर यह देखने का अवसर मिलता है कि गैर-कृषि क्षेत्र किस जिले में कितना बड़ा है और वहां आर्थिक गतिविधियों की Productivity किस स्तर पर है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह सावधानी भी बताई गई है कि बाद में हुए District Boundary Changes, नए जिलों के निर्माण या जिलों के नाम और भौगोलिक स्वरूप में हुए बदलावों के कारण रिपोर्ट का District Coverage वर्तमान प्रशासनिक संरचना से अलग हो सकता है।
Top 50 जिलों में एक-तिहाई गैर-कृषि गतिविधियां
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष देश के गैर-निगमित क्षेत्र में Economic Concentration से जुड़ा है।
अनुमानित गैर-निगमित प्रतिष्ठानों की संख्या के आधार पर Top 10 जिलों में देश के कुल प्रतिष्ठानों, श्रमिकों और इस क्षेत्र द्वारा उत्पन्न GVA का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है।
वहीं Top 50 जिलों में कुल प्रतिष्ठानों, Workforce और GVA का लगभग एक-तिहाई हिस्सा शामिल है।
इससे पता चलता है कि गैर-निगमित गैर-कृषि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां पूरे देश में समान रूप से वितरित नहीं हैं। कुछ जिलों में छोटे और गैर-निगमित व्यवसायों का Concentration काफी अधिक है।
Top 10 जिलों की सूची गुजरात, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में फैली हुई है। वहीं Top 50 जिलों में बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के जिले शामिल हैं।
करीब एक-तिहाई जिलों में एक लाख से ज्यादा प्रतिष्ठान
District-Level Distribution से गैर-निगमित क्षेत्र के आकार में राज्यों और जिलों के बीच बड़ा अंतर भी सामने आया है।
लगभग एक-तिहाई जिलों में प्रति जिला एक लाख से अधिक गैर-निगमित प्रतिष्ठान होने का अनुमान है। दूसरी ओर लगभग 9 प्रतिशत जिलों में प्रति जिला 10,000 से कम प्रतिष्ठान हैं।
रिपोर्ट के अनुसार देश के केवल 16 जिलों में पांच लाख से अधिक गैर-निगमित प्रतिष्ठान हैं। इनमें पश्चिम बंगाल के आठ, महाराष्ट्र के तीन, गुजरात के दो तथा कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश का एक-एक जिला शामिल है।
यह Distribution बताता है कि स्थानीय बाजार, शहरीकरण, व्यापारिक गतिविधियां और अन्य आर्थिक परिस्थितियां गैर-निगमित उद्यमों की संख्या को प्रभावित करती हैं।
प्रति Worker GVA में भी जिलों के बीच बड़ा अंतर
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Economic Productivity से संबंधित है।
ASUSE 2025 के जिला स्तर के अनुमानों के अनुसार लगभग 331 जिलों में प्रति Worker GVA 1 लाख रुपये से 1.5 लाख रुपये के बीच है।
वहीं 280 जिलों में प्रति Worker GVA अखिल भारतीय औसत 1,56,539 रुपये से अधिक है।
यह आंकड़ा इन जिलों में गैर-निगमित क्षेत्र की अपेक्षाकृत बेहतर Productivity को दर्शाता है।
हालांकि, प्रति Worker GVA में अंतर को केवल किसी एक कारण से नहीं समझा जा सकता। स्थानीय Industrial Structure, Business Mix, Capital Availability, Market Conditions, Workforce Composition और अन्य Economic Factors भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं।
District-Level Data इन अंतर को समझने के लिए आगे के Research और Policy Analysis का आधार उपलब्ध कराता है।
महिला उद्यमिता की स्थिति भी आई सामने
NSO की रिपोर्ट में Women Entrepreneurship और Female Workforce Participation पर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है।
महिला नेतृत्व वाले गैर-पंजीकृत प्रतिष्ठानों की सबसे अधिक हिस्सेदारी वाले Top 10 जिलों में तेलंगाना, मणिपुर और मेघालय के जिले शामिल हैं।
विशेष रूप से मिजोरम की स्थिति उल्लेखनीय है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के प्रत्येक जिले में कम से कम 50 प्रतिशत प्रतिष्ठान महिला स्वामित्व वाले हैं।
यह आंकड़ा बताता है कि देश के कुछ राज्यों में महिलाएं Non-Corporate Business Sector में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
महिलाओं की भूमिका केवल Business Ownership तक सीमित नहीं है। Workforce Participation के आंकड़े भी कई राज्यों में उनकी मजबूत उपस्थिति दिखाते हैं।
237 जिलों में महिला कार्यबल की हिस्सेदारी एक-तिहाई
रिपोर्ट के अनुसार 237 जिलों में गैर-निगमित क्षेत्र के कुल Workforce में महिलाओं की हिस्सेदारी कम से कम एक-तिहाई है।
वहीं 25 जिलों में महिला Workers की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है।
महिला Workforce Participation में सबसे अधिक हिस्सेदारी वाले Top 10 जिलों में तेलंगाना, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम के जिले शामिल हैं।
ये आंकड़े महिला उद्यमिता और रोजगार को लेकर District-Level Policy Planning के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
जहां महिला स्वामित्व वाले व्यवसायों की संख्या अधिक है, वहां Financial Access, Skill Development, Market Linkages और Entrepreneurship Support जैसी नीतियों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा सकता है।
राज्यों के भीतर भी दिखी बड़ी आर्थिक असमानता
NSO की रिपोर्ट केवल राज्यों के बीच अंतर नहीं दिखाती, बल्कि Intra-State Economic Variation को भी सामने लाती है।
कई राज्यों में कुछ खास जिले गैर-निगमित प्रतिष्ठानों की संख्या में बहुत आगे हैं। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में पुणे, गुजरात में सूरत, पंजाब में लुधियाना, राजस्थान में जयपुर, हरियाणा में गुरुग्राम, तेलंगाना में रंगारेड्डी और कर्नाटक में बेंगलुरु (शहरी) प्रमुख जिले के रूप में सामने आए हैं।
इसी तरह बिहार में पटना, केरल में तिरुवनंतपुरम, उत्तराखंड में उधम सिंह नगर, जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर और पश्चिम बंगाल में उत्तर चौबीस परगना प्रमुख योगदान वाले जिलों में शामिल हैं।
इन जिलों की स्थिति यह संकेत देती है कि राज्य की कुल आर्थिक गतिविधि के भीतर कुछ जिलों का योगदान काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
कुछ जिलों में गैर-निगमित व्यवसायों का अत्यधिक Concentration
कुछ क्षेत्रों में District-Level Concentration बेहद उल्लेखनीय है।
रिपोर्ट में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण अंडमान जिले का राज्य के भीतर अनुमानित गैर-निगमित प्रतिष्ठानों में 61.04 प्रतिशत योगदान दर्ज किया गया है।
इसी तरह गोवा के उत्तरी गोवा जिले का योगदान 77.66 प्रतिशत, पुडुचेरी का 76.64 प्रतिशत और दादरा एवं नगर हवेली का 65.48 प्रतिशत बताया गया है।
इन आंकड़ों से छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आर्थिक गतिविधियों के भौगोलिक Concentration को समझने में मदद मिलती है।
दूसरी ओर बड़े राज्यों में भी प्रमुख जिलों की हिस्सेदारी अलग-अलग स्तर पर है। उदाहरण के लिए तेलंगाना में रंगारेड्डी का योगदान 23.53 प्रतिशत, गुजरात में सूरत का 19.43 प्रतिशत और पंजाब में लुधियाना का 14.74 प्रतिशत बताया गया है।
गैर-कृषि क्षेत्र में Manufacturing, Trade और Services शामिल
ASUSE 2025 के तहत गैर-कृषि प्रतिष्ठानों के तीन प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है—Manufacturing, Trade और Other Services।
सर्वेक्षण में गैर-निगमित प्रतिष्ठानों को उनके Ownership Structure के आधार पर भी शामिल किया गया है। इसमें Proprietorship, Partnership, Cooperatives, Societies/Trusts आदि शामिल हैं। Limited Liability Partnership को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
इस व्यापक Coverage के कारण रिपोर्ट गैर-कॉरपोरेट बिजनेस सेक्टर की जमीनी स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण Data Source बनती है।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को किया गया शामिल
ASUSE 2025 का Coverage देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों तक रहा है। हालांकि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के कुछ दुर्गम गांव इसके अपवाद रहे हैं।
इससे रिपोर्ट को देश के व्यापक Non-Farm Economic Landscape को समझने के लिए उपयोगी बनाया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि गतिविधियां किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए Alternative Livelihoods का महत्वपूर्ण स्रोत हो सकती हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में Trade, Manufacturing और Services छोटे व्यवसायों तथा रोजगार के बड़े आधार के रूप में काम करते हैं।
इसलिए District-Level Non-Farm Data ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच संबंधों को समझने में भी उपयोगी हो सकता है।
दिल्ली के लिए जिला स्तर का अनुमान क्यों नहीं
रिपोर्ट में दिल्ली को लेकर विशेष स्थिति बताई गई है। दिल्ली की ग्रामीण आबादी अपेक्षाकृत कम होने और गांवों की संख्या सीमित होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के सभी जिलों को एक ही स्तर में शामिल किया गया।
शहरी क्षेत्र में भी इसी प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके कारण दिल्ली के लिए District-Level Estimates तैयार करना संभव नहीं हो सका।
इसलिए इस रिपोर्ट में दिल्ली के अलग-अलग जिलों के अनुमान प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
Survey में अपनाई गई Scientific Sampling Method
ASUSE 2025 को Multistage Stratified Sampling के तहत संचालित किया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में First Stage Units (FSUs) के रूप में Census Villages का इस्तेमाल किया गया। ग्रामीण केरल में Panchayat Wards को FSU माना गया।
शहरी क्षेत्रों में Urban Frame Survey (UFS) Blocks को First Stage Units के रूप में इस्तेमाल किया गया।
Final Stage Units के रूप में दोनों क्षेत्रों में Establishments को शामिल किया गया। बड़े FSUs के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों में Village Groups और शहरी क्षेत्रों में Sub-Blocks के रूप में Intermediate Sampling Stage भी अपनाई गई।
इस Sampling Framework का उद्देश्य देश के अलग-अलग क्षेत्रों से Representative Data तैयार करना था।
Tablet और CAPI से किया गया Data Collection
Survey में Data Collection को आधुनिक Digital Process के माध्यम से किया गया। चयनित प्रतिष्ठानों से आवश्यक जानकारी Computer Assisted Personal Interviewing (CAPI) के जरिए Tablets पर दर्ज की गई।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पहले First Stage Units के भीतर प्रतिष्ठानों की Listing तैयार की गई। इसके बाद Sample Design के अनुसार आवश्यक संख्या में प्रतिष्ठानों का Survey किया गया।
यह Digital Data Collection प्रक्रिया Survey Data की Processing और Management को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद करती है।
Policy Making के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये आंकड़े?
District-Level Data का सबसे बड़ा फायदा Targeted Policy Intervention में हो सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर तैयार नीति सभी जिलों के लिए समान रूप से प्रभावी हो, यह जरूरी नहीं है। जिस जिले में रोजगार का बड़ा हिस्सा Trade से आता है, वहां की जरूरत Manufacturing-केंद्रित जिले से अलग हो सकती है।
इसी तरह जिन जिलों में महिला Entrepreneurship अधिक है, वहां Women-led Businesses के लिए अलग प्रकार की सहायता उपयोगी हो सकती है।
जहां प्रति Worker GVA कम है, वहां Productivity Improvement, Skill Development, Technology Adoption और Access to Finance पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है।
इस तरह District-Level Estimates सरकार और अन्य Stakeholders को अधिक Data-Driven Decision Making में मदद कर सकते हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम संकेत
गैर-कृषि क्षेत्र का महत्व ग्रामीण भारत के लिए भी काफी बड़ा है। ग्रामीण परिवारों के लिए Agriculture के साथ-साथ Trade, Manufacturing और Services से जुड़ी गतिविधियां Income Diversification का माध्यम बनती हैं।
ऐसे में किसी जिले में Non-Farm Enterprises की संख्या, रोजगार और Productivity को समझना Rural Economy की वास्तविक तस्वीर समझने में मदद कर सकता है।
यह Data Rural Entrepreneurship, Skill Development, MSME Support, Financial Inclusion और Local Market Development जैसी नीतियों के लिए उपयोगी हो सकता है।
आगे के लिए मजबूत होगा Evidence-Based Planning
NSO की यह पहल भारत के Statistical System में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है। पहली बार बड़े राष्ट्रव्यापी Survey से प्राप्त District-Level Estimates को व्यापक रूप से उपलब्ध कराया गया है।
इससे Researchers, Policymakers, Economists और अन्य Stakeholders को देश की अर्थव्यवस्था को Sub-State Level पर समझने के लिए अधिक Detailed Data मिलेगा।
हालांकि NSO ने यह भी स्पष्ट किया है कि District-Level Estimates Sample Survey Data पर आधारित हैं। इसलिए अलग-अलग जिलों की तुलना करते समय Economic और Demographic Characteristics, Industrial Structure, Local Conditions तथा Sampling Variability को ध्यान में रखना जरूरी है।
कुछ मामलों में Relative Standard Error (RSE) अधिक होने के कारण आंकड़ों की व्याख्या सावधानी से करनी होगी।
भारत के District Economy Data में महत्वपूर्ण कदम
कुल मिलाकर, NSO द्वारा पहली बार जिला स्तर पर गैर-कृषि क्षेत्र के अनुमान जारी करना भारत की Data-Driven Economy और Evidence-Based Policy Making की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रिपोर्ट से साफ होता है कि गैर-निगमित क्षेत्र देश के सभी जिलों में समान रूप से वितरित नहीं है। Top 50 जिलों में कुल प्रतिष्ठानों, Workforce और GVA का लगभग एक-तिहाई हिस्सा केंद्रित है। वहीं लगभग एक-तिहाई जिलों में एक लाख से अधिक गैर-निगमित प्रतिष्ठान हैं।
महिला भागीदारी के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। 237 जिलों में महिला Workforce की हिस्सेदारी एक-तिहाई है और 25 जिलों में यह 50 प्रतिशत से अधिक है। दूसरी ओर 280 जिलों में प्रति Worker GVA राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
ये आंकड़े बताते हैं कि भारत की District Economy में काफी विविधता है। किसी जिले की वास्तविक आर्थिक क्षमता को समझने के लिए केवल State-Level Data पर्याप्त नहीं है।
अब District-Level Data उपलब्ध होने से सरकार और Researchers अधिक Targeted Strategies तैयार कर सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, Entrepreneurship, Productivity, Women Participation और Non-Farm Business Development को बढ़ावा देने वाली नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार किया जा सकता है।
NSO और MoSPI की यह पहल आने वाले समय में भारत के Local Economic Planning, District Development और Data-Based Governance को नई मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

