केंद्र सरकार बीज और पेस्टिसाइड से जुड़े पुराने कानूनों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रस्तावित बीज और पेस्टिसाइड कानून को संसद में पेश करने से पहले किसान संगठनों और दूसरे संबंधित पक्षों के साथ एक बार फिर चर्चा की जाएगी। सरकार का कहना है कि बदलते कृषि क्षेत्र, नई तकनीक और किसानों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए दशकों पुराने कानूनों में बदलाव जरूरी हो गया है।
सरकार की इस पहल का असर केवल बीज और कीटनाशक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि उत्पादन में बीज, उर्वरक और फसल सुरक्षा उत्पाद एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण बीज के साथ किसानों को सही गुणवत्ता की यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरक समय पर उपलब्ध कराना भी कृषि नीति की बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।
20 किसान संगठनों से सरकार ने की बातचीत
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रस्तावित कानून को लेकर करीब 20 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से सलाह-मशविरा किया। सरकार का कहना है कि कानून बनाने से पहले किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों की राय को इसमें शामिल किया जाएगा।
चौहान ने कहा कि नए बीज और पेस्टिसाइड कानून की जरूरत इसलिए है क्योंकि मौजूदा व्यवस्था 1966 के दौर की है और उसके बाद कृषि क्षेत्र में काफी बदलाव आ चुके हैं। खेती में नई किस्मों, नई तकनीक, निजी कंपनियों, आधुनिक कृषि रसायनों और उन्नत कृषि पद्धतियों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
सरकार की कोशिश है कि किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले कृषि इनपुट उपलब्ध हों और नकली या घटिया उत्पादों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके।
पहले आएगा नया बीज कानून
कृषि मंत्री के अनुसार सरकार शुरुआत में नया बीज कानून संसद में पेश करेगी। ड्राफ्ट बीज बिल, 2025 को पहले ही सार्वजनिक सुझावों के लिए रखा जा चुका है। 11 दिसंबर 2025 तक इस पर आम लोगों और विभिन्न संगठनों से सुझाव मांगे गए थे।
मंत्रालय को इस प्रक्रिया के दौरान करीब 18,000 सुझाव और आपत्तियां मिलीं। इतनी बड़ी संख्या में सुझाव मिलने से साफ है कि बीज क्षेत्र में प्रस्तावित बदलाव को लेकर किसानों, कंपनियों और दूसरे हितधारकों की काफी रुचि है।
उर्वरक क्षेत्र के लिए भी गुणवत्ता और निगरानी अहम
भारत में खेती की लागत और उत्पादन दोनों पर उर्वरक की सीधी भूमिका है। यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता में थोड़ी भी परेशानी होने पर किसानों को फसल की लागत बढ़ने और उत्पादन प्रभावित होने की चिंता रहती है।
बीज की गुणवत्ता को लेकर नया कानून जिस तरह ट्रेसेबिलिटी और बाजार निगरानी पर जोर दे रहा है, उसी तरह उर्वरक क्षेत्र में भी उत्पाद की गुणवत्ता, आपूर्ति श्रृंखला और बिक्री की निगरानी महत्वपूर्ण है। किसानों तक सही मात्रा और सही गुणवत्ता का उर्वरक पहुंचे, इसके लिए वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाना जरूरी है।
खासकर यूरिया और डीएपी जैसे प्रमुख उर्वरकों के मामले में किसानों को समय पर आपूर्ति मिलना खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार पहले से ही उर्वरक की उपलब्धता, राज्यों को आपूर्ति और बिक्री व्यवस्था की निगरानी के लिए कई स्तरों पर व्यवस्था चला रही है।
नकली कृषि इनपुट पर रोक सरकार की बड़ी चुनौती
प्रस्तावित बीज कानून का एक प्रमुख उद्देश्य नकली और खराब गुणवत्ता वाले बीजों की बिक्री पर रोक लगाना है। यही चुनौती कृषि क्षेत्र के दूसरे इनपुट में भी दिखाई देती है।
किसानों को नकली बीज, नकली कीटनाशक या घटिया कृषि उत्पाद मिलने से सीधे आर्थिक नुकसान होता है। कई बार किसान एक पूरे मौसम की मेहनत और लागत लगाने के बाद भी खराब उत्पाद के कारण अपेक्षित उत्पादन हासिल नहीं कर पाते।
उर्वरक क्षेत्र में भी किसानों के लिए पैकिंग, गुणवत्ता, निर्धारित कीमत और अधिकृत बिक्री केंद्रों की जानकारी महत्वपूर्ण है। इसलिए कृषि इनपुट की निगरानी व्यवस्था जितनी मजबूत होगी, किसानों के हितों की सुरक्षा उतनी ही बेहतर होगी।
बीज की किस्मों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
प्रस्तावित कानून में बीज की किस्मों के अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान किया गया है। मौजूदा व्यवस्था में ऐसा अनिवार्य पंजीकरण नहीं था। नए कानून के तहत बाजार में उपलब्ध बीजों और पौध रोपण सामग्री की गुणवत्ता को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, बीज अधिनियम 1966 की धारा 5 के तहत पहले से अधिसूचित किस्मों को नए कानून के तहत पंजीकृत माना जाएगा। इससे पुरानी और अधिसूचित किस्मों के लिए व्यवस्था में अचानक बदलाव की स्थिति नहीं बनेगी।
किसानों को उचित कीमत पर कृषि इनपुट देने पर जोर
सरकार का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य किसानों को अच्छी गुणवत्ता और अधिक उत्पादन देने वाले बीज उचित कीमत पर उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही नकली और घटिया कृषि इनपुट की बिक्री पर रोक लगाना भी प्राथमिकता है।
यही लक्ष्य उर्वरक क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। किसानों को यूरिया और डीएपी जैसे प्रमुख उर्वरक निर्धारित कीमत पर और जरूरत के समय उपलब्ध हों, यह सुनिश्चित करना कृषि उत्पादन के लिए जरूरी है। उर्वरक की कीमत और उपलब्धता सीधे किसान की लागत को प्रभावित करती है।
सरकार की ओर से उर्वरक आपूर्ति की योजना बनाते समय राज्यों की मांग, फसल सीजन और क्षेत्रवार जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है। भविष्य में कृषि इनपुट से जुड़े कानूनों और निगरानी व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने से किसानों को इसका लाभ मिल सकता है।
निजी कंपनियों और रिसर्च को भी बढ़ावा
प्रस्तावित कानून को लेकर बड़े बीज संगठनों का कहना है कि नई व्यवस्था से वास्तविक और गंभीर कंपनियों को अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा। कृषि क्षेत्र में नई और बेहतर किस्मों का विकास किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसी तरह उर्वरक क्षेत्र में भी नई तकनीक और बेहतर उत्पादों पर शोध की जरूरत लगातार बढ़ रही है। नैनो उर्वरक, संतुलित पोषक तत्व, जल दक्षता और मिट्टी की जरूरत के अनुसार उर्वरक उपयोग जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान से किसानों की लागत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पुराने कानूनों की जगह लेगा नया ढांचा
प्रस्तावित नया कानून दशकों पुराने बीज अधिनियम, 1966 और बीज नियंत्रण आदेश, 1983 की जगह लेने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पहले भी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव के कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन अब सरकार नए सिरे से कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कृषि क्षेत्र में बीज, उर्वरक और कीटनाशक तीनों ही उत्पादन व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसलिए आने वाले समय में कृषि इनपुट से जुड़े नियमों को किसानों की जरूरत, गुणवत्ता, कीमत और उपलब्धता को ध्यान में रखकर तैयार करना महत्वपूर्ण होगा।
करीब 3.82 अरब डॉलर का है भारतीय बीज बाजार
आधिकारिक जानकारी के अनुसार भारत का बीज उद्योग करीब 3.82 अरब डॉलर का है। कृषि में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका और नई तकनीक के विस्तार के साथ इस क्षेत्र का महत्व और बढ़ रहा है।
सरकार का लक्ष्य केवल बाजार को नियंत्रित करना नहीं बल्कि किसानों को भरोसेमंद कृषि इनपुट उपलब्ध कराना है। बीज की गुणवत्ता के साथ उर्वरक और कीटनाशक की गुणवत्ता पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि नए कानूनों के बाद उन्हें बेहतर गुणवत्ता वाले बीज, सही गुणवत्ता के कृषि रसायन और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उचित कीमत पर समय पर उपलब्ध हों। यदि प्रस्तावित व्यवस्था में निगरानी, ट्रेसेबिलिटी और जवाबदेही मजबूत होती है, तो इसका सीधा लाभ किसानों को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, सरकार द्वारा बीज और पेस्टिसाइड कानून में बदलाव की तैयारी कृषि इनपुट क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। आने वाले समय में इसका दायरा उर्वरक क्षेत्र तक भी व्यापक रूप से जुड़ सकता है, क्योंकि किसान की पूरी खेती व्यवस्था गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित उर्वरक और प्रभावी फसल सुरक्षा उत्पादों पर निर्भर करती है।

